आचार्य जी मेरा कॅरिअर नहीं सैटल हो पा रहा है, कम से कम दो इंटरव्यू के तीन-तीन राउंड रोज फेस कर रही हूं पर फाइनल होते-होते रह जाती हूं। कौन से ग्रह हैं जो आगे नहीं बढ़ने दे रहे। कौन सा क्षेत्र मेरे लिए बेस्ट होगा? पंडित जी मेरा ब्रेकअप हो गया है। अब दूसरे रिलेशन में क्या स्थायी हो पाउंगा। ज्योतिषाचार्य जी मेरी लव मैरिज होगी या अरेंज? ये सवाल लिए युवाओं का जमघट नई दिल्ली के प्रगति मैदान में एक सप्ताह चले विश्व पुस्तक मेले में लगे स्टॉल 'नक्षत्र' में पहुंचे। दरअसल, 'नक्षत्र' में कई शहरों से 25 से ज्यादा दिग्गज महिला ज्योतिष, टैरो कार्ड रीडर, हीलर, वास्तुविद,पामिस्ट,वैदिक ज्योतिषाचार्य ने शिरकत की।
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ज्योतिषाचार्य मनीषा चौपड़ा।
यहां ज्यादातर स्टूडेंट्स और नौकरीपेशा लड़के लड़कियां टैरो कार्ड रीडर के स्टॉल पर नजर आए। पूछने पर एक छात्र ने बताया कि कुंडली पैरेंट्स से मांगनी पड़ेगी। फिर उन्हें अपनी समस्या बतानी पड़ती है। तो क्या फायदा। माता-पिता के साथ हम भी अपने कॅरियर और फ्यूचर को लेकर चिंतित हैं। इसलिए यहां आए हैं।
वर्ल्ड बुक फेयर में हस्तरेखा विशेषज्ञ व ज्योतिषाचार्य मनीषा चौपड़ा बताती हैं कि वैसे तो जीवन से जुड़ी बहुत सी समस्याओं को लेकर लोग आते हैं लेकिन यहां ज्यादातर युवा जो अपनी पढ़ाई, कॅरियर और मैरिज को लेकर परेशान हैं, आ रहे हैं। उन्हें पढ़ाई से ज्यादा रिजल्ट की चिंता होती है। युवाओं के मन को युवा अच्छे से समझ पाते हैं, इसलिए लोग युवा ज्योतिषों के पास ज्यादा आना पसंद करते हैं। यहां खुलकर वे अपनी समस्या को बयां कर पाते हैं।
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ज्योतिषाचार्य करिश्मा कौशिक।
- फोटो : अमर उजाला
ज्योतिषाचार्य और टेरो कार्ड रीडर करिश्मा कौशिक अंग्रेजी से पोस्ट ग्रेजुएट हैं। बताती हैं कि बच्चों के पास धैर्य कम होता जा रहा है। कंपटीशन के दौर में भागमभाग लाइफ होती जा रही है। इसके अलावा लव लाइफ को लेकर लड़के-लड़कियां सबसे ज्यादा परेशान हैं। जितनी जल्दी अफेयर होते हैं, उतनी जल्दी ब्रेकअप भी हो रहा है। बिना ग्रह चाल, योग के कोई भी सफलता पाना नामुमकिन है। शादी के बाद के जीवन को लेकर कई लड़के-लड़कियां तो अफेयर में ही कुंडली मिलान करा ले रहे हैं।
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ज्योतिषाचार्य कल्पना यादव।
- फोटो : अमर उजाला
जामिया मिल्लिया, नई दिल्ली से एमकॉम करके कल्पना यादव अब पेशेवर हस्तरेखा विज्ञानी और ज्योतिषाचार्य बन गई हैं। कहती हैं कि जितनी तेजी से युवा ज्योतिष बन रहे हैं, बाकायदा पढ़ाई कर इस क्षेत्र में एंट्री ले रहे हैं, हस्तरेखाओं और ग्रह चालों से अपना भविष्य जानने को युवा भी उतनी ही गति से उत्सुक होकर यहां आए हैं। इस स्टॉल पर किस क्षेत्र की पढ़ाई करने पर सफलता और नौकरी मिल पाएगी, को लेकर छात्रों का हुजूम उमड़ा रहा।
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कार्मिक हीलर और न्यूमरोलॉजिस्ट तोशिका।
- फोटो : अमर उजाला
कार्मिक हीलर और न्यूमरोलॉजिस्ट तोशिका रजौरा वैसे तो एमबीए हैं। बताती हैं कि जब हर क्षेत्र में लड़कियां आगे आ रही हैं तो इस क्षेत्र को क्यों छोड़ें। ये तो विद्या का क्षेत्र है। ज्योतिषी और अंक शास्त्र जैसे विषयों में युवा जागरूक हुए हैं। कर्म प्रधान युवाओं का इंट्रस्ट विज्ञान की इस विद्या में भी बढ़ रहा है। यही कारण है कि इतने बड़े बुक फेयर में इस बार महिला ज्योतिषों को भी स्थान दिया गया।
एंजेल और टैरो कार्ड रीडर हरप्रीत शर्मा की स्टॉल पर भी कई युवा ऐसे दिखे जो इस विद्या यानी एंजेल मैसेज से अपना भविष्य जानना चाहते थे। हरप्रीत ने बताया कि दिल और दिमाग को छोड़कर एक और चीज होती है वो एंजेल। ये डिवाइन पावर होता है। अगर आप अपने बारे में कुछ सोच समझ नहीं पाते,फैसले लेने में असमंजस में हैं तो एंजेल थेरेपी में विश्वास करिए।
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ज्योतिषाचार्य नमिता सिन्हा।
- फोटो : अमर उजाला
पूर्वाभास इंस्टीट्यूट ऑफ मिस्टिक साइंस, नई दिल्ली की ज्योतिषाचार्य नमिता सिन्हा के स्टॉल पर भी 18 से 35 वर्ष की उम्र के कई लोग अपना सवाल लिए मिले। सिन्हा तसल्ली से उस उत्सुकता और कॅरियर सैटलमेंट को लेकर पूछे सवाल पर ज्योतिषी समझा रही थीं। ये कमतर नहीं था। कई बच्चों को कंसलटेंट की तरह गाइड भी करती चल रही थीं। ज्योतिषाचार्य युक्ति मुद्गल ने बताया कि बड़े लोगों को समाधान बताने से काम पूरा हो जाता है लेकिन आज की यूथ जनरेशन को सोल्यूशन के साथ काउंसलिंग और कंसलटेटिंग भी करनी पड़ती है। वे हर सवाल विज्ञान की तरह पूछ रहे हैं।
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ज्योतिषाचार्य सारिका।
- फोटो : अमर उजाला
बकौल,इंटरनेशनल स्कूल ऑफ एस्ट्रोलॉजी, पीतमपुरा नई दिल्ली में एस्ट्रोलॉजर और टैरो कार्ड रीडर नीरू गर्ग, नो डाउट एस्ट्रो इंडस्ट्री रिच होती जा रही है। कारण, युवाओं का भी इस फील्ड में आना। वह भी अनुभव या पारपंरिक आधार पर नहीं, बल्कि इस क्षेत्र में पीएचडी और डिप्लोमा कोर्सेज कर इस पुरानी विद्या को आगे बढ़ा रहे हैं। इस स्टॉल पर ज्यादातर लड़के लड़कियां अपने रिलेशनशिप को लेकर पहुंचे। वहीं, ज्योतिषाचार्य सारिका शादी में बाधक ग्रहों शुक्र और बृहस्पति के बारे में जिक्र करती दिखीं।
वास्तु विद अर्चना जैन के अनुसार, मेट्रो सिटीज में आज की भागमभाग जिंदगी के कारण लोगों के पास समय की कमी है। दिल्ली जैसी जगह पर नौकरियों की मारामारी,जॉब कंपटीशन, हैवी स्टडी ऊपर से यहां का पॉल्यूशन, ये सभी कारण है युवाओं को अवसाद, मेंटल प्रॉब्लम और बीपी जैसी समस्याओं में घिर जाने का। आचार्य मधु कहती हैं कि कई बार अंक शास्त्र, नामों में फेरबदल और भूमि बदलने से कई हद तक युवाओं की समस्या का समाधान हुआ है।