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बताया जा रहा है कि पोलिंग बूथ पर तैनात पुलिसकर्मियों के लिए खाने के पैकेट्स लाए गए थे, लेकिन मीडिया को वहां आते देखा तो कार वैसे ही आगे निकल गई। मामले में चुनाव आयोग ने सफाई दी। कहा कि इन पैकेज को भेजने वाले रेस्टोरेंट का नाम ही ‘नमो फूड्स’ है। वहीं नमो फूड मामले में गौतमबुद्धनगर के एसएसपी वैभव कृष्ण का कहना है कि कुछ गलत सूचना फैलाई जा रही है कि कुछ पुलिसकर्मियों को एक राजनीतिक पार्टी से भोजन वितरित किया गया है। यह बिल्कुल गलत है। स्थानीय स्तर पर कुछ खाद्य पैकेट नमो फूड शॉप से खरीदे गए थे, न कि किसी राजनीतिक पार्टी से। कुछ लोग गलत और राजनीति से प्रेरित अफवाहें फैला रहे हैं और किसी विशेष खाद्य आउटलेट से भोजन की खरीद का कोई आधिकारिक आदेश नहीं है।
अतिरिक्त मुख्य चुनाव अधिकारी बीआर तिवारी ने नोएडा में नमो फूड पैकेट बांटे जाने की घटना के संबंध में बयान दिया है। चुनाव अधिकारी का कहना है कि उन्हें मीडिया रिपोर्टों से इस घटना के बारे में पता चला। उन्होंने बताया कि नमो फूड पैकेट एक 10 साल पुरानी दुकान के हैं, जिसका ब्रांड नाम ही 'नमो' है। हालांकि इसे मीडिया में अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया है।