कांग्रेस और आप दोनों का ही वोट बैंक अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति और स्लम एवं अनाधिकृत कॉलोनियों में रहता है। ऐसे में संभावित सीटों का पेंच फंसा हुआ है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता की मानें तो दोनों पार्टियों के बीच इस वक्त 3:3:1 के फॉर्मूले पर काम चल रहा है। इसके तहत दोनों ही पार्टियां अपने तीन-तीन उम्मीदवारों को उतार सकती हैं और एक सीट पर निष्पक्ष उम्मीदवार उतारा जाना है। हालांकि किस सीट पर कौन सी पार्टी अपना उम्मीदवार उतारेगी यह तय कर पाना मुश्किल हो रहा है।
जानकारों का मानना है कि आम आदमी पार्टी ने जिस तरह गठबंधन को लेकर उतावलापन दिखाया है उससे उसका पक्ष कमजोर हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि आप ने अपने जिन 6 उम्मीदवारों की घोषणा की है उनमें से वह तीन को बहुत मजबूत मानती है। वो तीन उम्मीदवार जिन तीन सीटों पर खड़े हैं, उनमें पूर्वी दिल्ली, उत्तर पूर्वी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली है। इन्हीं तीन सीटों पर दोनों पार्टियों का वोटबैंक मानी जाने वाली जनसंख्या बड़ी मात्रा में रहती है।
ये हैं आप के मजबूत दावेदार
आप ने इन तीन सीटों से अपने सबसे मजबूर दावेदार आतिशी, दीलीप पांडेय और राघव चड्ढा को खड़ा किया है। पार्टी को इन तीनों पर ही पूरा भरोसा है कि ये तीन सीटें उसके खाते में आ सकती हैं। वहीं कांग्रेस के एक नेता ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि अगर गठबंधन होने पर पार्टी को तीन सीटें मिलती हैं तो वह पूर्वी दिल्ली और उत्तर पूर्वी दिल्ली की सीटें जरूर हासिल करना चाहेंगे, जिससे वह 2004 और 2009 में जीत हासिल कर चुके हैं। उन्होंने ये भी बताया कि कांग्रेस उन सीटों पर लड़ना चाहती है जहां अल्पसंख्यक, पिछड़े और एससी वोट बड़ी मात्रा में हों।
जानकारी के अनुसार उत्तर पूर्वी दिल्ली में सबसे ज्यादा आबादी मुस्लिम वोटरों की है। उसके बाद दलित, फिर पिछड़ी जातियों के वोटर यहां रहते हैं। इसी तरह पूर्वी दिल्ली में सबसे ज्यादा पिछड़ी जातियों के वोटर हैैं फिर एससी और फिर मुस्लिम वोटर हैं। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस ये सीट चाहती है और संदीप दीक्षित को यहां से टिकट देने की योजना बना रही है क्योंकि वह यहां से 2004 और 2009 में चुनाव जीत चुके हैं। वहीं कांग्रेस नेता जय प्रकाश अग्रवाल ने तीन बार चांदनी चौक से जीतने के बाद 2009 में उत्तर पूर्वी दिल्ली से आराम से जीत हासिल की थी।
वहीं आम आदमी पार्टी किसी भी कीमत पर आतिशी को पूर्वी दिल्ली और उत्तर पूर्वी दिल्ली से दिलीप पांडेय को हटाना नहीं चाहेगी। पार्टी को इन दो नेताओं के अलावा राघव चड्ढा की जीत पर भी काफी भरोसा है जो दक्षिणी दिल्ली से उम्मीदवार हैं। अब मामला यहीं फंस रहा है कि दोनों ही पार्टियां इन तीन सीटों पर अपने-अपने उम्मीदवार उतारना चाह रही हैं।
वहीं जिस सीट पर दोनों ही पार्टियां अपना दावेदार नहीं ढूंढ पा रही हैं वह है पश्चिमी दिल्ली। यह सीट भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती है क्योंकि यहां सिख(12 प्रतिशत), पंजाबी-खत्री(12 प्रतिशत) और जाट(8 प्रतिशत) बड़ी संख्या में हैं। ये वोट भाजपा के माने जाते हैं।