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हाथरस जमीन घोटाले में पीसी गुप्ता सहित 27 पर एफआईआर

Sat, 16 Mar 2019 04:17 AM IST
vivek shukla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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हाथरस जमीन घोटाला मामले में यमुना प्राधिकरण ने 2011-12 में करीब 42 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया। इसके बदले किसानों को सात प्रतिशत विकसित भूखंड देने का प्रावधान है, जिसके लिए प्राधिकरण को पांच हेक्टेयर जमीन की जरूरत थी, लेकिन 2014 में अधिकारियों ने कुछ लोगों से मिलीभगत करके हाथरस जिले के मिधावली गांव में जरूरत से अधिक 14.48 हेक्टेयर जमीन खरीद ली। यह जमीन पहले फेज के मास्टर प्लान से बाहर है। 

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उस समय इस जमीन को खरीदने में 16.15 करोड़ रुपये खर्च हुए। वर्तमान समय में इस पर 7.77 करोड़ रुपये ब्याज देना पड़ा। दोनों को जोड़कर 23.92 करोड़  रुपये का नुकसान हुआ है। एक शिकायत पर हुई जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सब जान बूझकर और गिरोह बनाकर किया गया।

जमीन खरीद के इस गिरोह में शामिल दिल्ली, बुलंदशहर, आगरा, गाजियाबाद आदि जगहों से जुड़े लोगों ने पहले किसानों से सस्ती दर पर जमीन खरीद ली। इसके तुरंत बाद यीडा ने उसे खरीद लिया, जबकि इन जमीनों पर अब तक प्राधिकरण का कब्जा नहीं है और न ही इस पर कोई प्लान बन सका है। कासना कोतवाली प्रभारी अजय कुमार का कहना है कि यीडा की तहरीर पर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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जमीन खरीदने में इन लोगों के हैं नाम
हाथरस में जिन लोगों ने किसानों से जमीन खरीदी और उसे प्राधिकरण ने अधिग्रहीत किया उनमें मनोज कुमार पुत्र तेजपाल सिंह, गौरव पुत्र तेजपाल सिंह, अनिल पुत्र जगपाल सिंह, निर्दोष चौधरी पुत्र सत्यवीर सिंह, सत्येंद्र पुत्र तुरसनपाल, स्वेदश गुप्ता पुत्र आरसी गुप्ता, एनएनजी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड कंसलटेंट प्राइवेट लिमिटेड, विवेक कुमार जैन पुत्र निरोतमदास जैन, (मथुरा जमीन घोटाले के प्रकरण में भी इनकी भूमि हिमालया इंफ्रा वेंचर प्राइवेट लिमिटेड के नाम से थी), धीरेंद्र सिंह चौहान पुत्र राजेंद्र बहादुर चौहान, मदन पाल सिंह पुत्र कृपाल सिंह, अजीत कुमार सिंह पुत्र मदन पाल सिंह।

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पत्रावलियों में इन अफसरों के हस्ताक्षर

मथुरा जमीन घोटाले की तरह ही हाथरस में भी जमीन खरीदने के लिए तैयार पत्रावलियों में जिन तत्कालीन अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं उनमें सीईओ पीसी गुप्ता, एसीईओ सतीश कुमार, ओएसडी वीपी सिंह, प्रबंधक ब्रजेश कुमार, प्रबंधक परियोजना अतुल कुमार सिंह, तहसीलदार अजीत परेश, तहसीलदार राजेश शुक्ल, तहसीलदार रणबीर सिंह, तहसीलदार सुरेश चंद शर्मा, पंकज कुमार लेखपाल, चमन सिंह नायब तहसीलदार, वित्त विभाग के लेखाकार, सहायक लेखाकार, प्रबंधक वित्त व महाप्रबंधक वित्त शामिल हैं।

इन गड़बड़ियों पर हुई जांच
- जो भूमि खरीदी गई है, वह किसी एक खसरा नंबर की पूरी जमीन (चंक) नहीं है।
-यह भूमि 15 कंपनियों और व्यक्तियों ने खरीदी थी। इन लोगों ने ही मथुरा में भी जमीन खरीदी थी।
- खरीदी गई जमीन का म्यूटेशन बाद में हुआ है।
- सभी ने महामेधा और नोएडा कामर्शियल कार्पोरेशन बैंक में चेक जमा कराए। मथुरा जमीन घोटाले में भी इन्हीं बैंकों से लेन देन हुआ था।

इस तरह की कार्रवाई के दिए हैं आदेश
चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि पूर्व सीईओ पीसी गुप्ता व अन्य अफसरों के खिलाफ कंपनियों और जमीन बेचने वाले लोगों और बैंकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। प्राधिकरण के सीईओ से विधिक परीक्षण कराने के बाद इन रजिस्ट्रियों को शून्य घोषित कराने को कहा है। जमीन खरीद में अब तक का ब्याज करीब 7.77 करोड़ रुपये की वसूली इसमें शामिल अधिकारियों से कराने का निर्देश दिया है। जमीन का मूल पैसा करीब 16 करोड़ रुपये किसानों से जमीन खरीदकर प्राधिकरण को बेचने वालों से वसूलने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा इस मामले में शामिल सरकारी सेवा में कार्यरत अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए, जबकि कंपनियों के खिलाफ रजिस्ट्रार से कार्रवाई के लिए पत्र लिखा जाए।

आयकर विभाग को भी दी जाएगी सूचना
जमीन खरीद में पैसों के भुगतान की जानकारी आयकर विभाग को दी जाएगी, ताकि जिन लोगों ने ब्लैक मनी देकर किसानों से जमीन खरीदी है, उनके खिलाफ कार्रवाई हो सके।- डॉ. प्रभात कुमार, चेयरमैन
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