जन्माष्टमी
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पंडितों के अनुसार, शुक्रवार को दिनभर अष्टमी रहेगी और शनिवार सुबह नवमी प्रारंभ हो जाएगी। चूंकि, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि में रात 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए कई स्थानों पर कान्हा का जन्म रात 12 बजे अष्टमी तिथि में मनाया जाएगा। कुछ इलाकों में लोग शनिवार को रोहिणी नक्षत्र में जन्मोत्सव मनाएंगे।