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पंजाब की बेटी, यूपी की बहू और दिल्ली की धाकड़ नेता, कुछ ऐसी थीं शीला दीक्षित, अनसुने किस्से

Sat, 20 Jul 2019 11:06 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शीला दीक्षित - फोटो : Amar ujala
दिल्ली में 15 साल तक मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित यूपी की बहू होने के साथ-साथ पंजाब की बेटी भी रही हैं। शीला दीक्षित का जन्म पंजाब के कपूरथला में 31 मार्च 1938 को हुआ। ब्राह्मण समुदाय से ये ताल्लुक रखती हैं, लेकिन उन्होंने शिक्षा से लेकर राजनीति की जमीन दिल्ली में बनाई। दिल्ली के कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल से दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस कॉलेज तक का सफर तय करने वाली शीला ने दिल्ली में सीएम की सबसे बड़ी पारी खेली। हालांकि, अपने आखिरी विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा।
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शीला दीक्षित - फोटो : Amar Ujala
शीला को कॉलेज के जमाने में विनोद दीक्षित से प्यार हुआ और जो शादी तक पहुंचा। विनोद दीक्षित आईएएस अफसर रहे। शीला के बेटे संदीप दीक्षित किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वो कांग्रेस के सांसद रहे हैं। शीला का ससुराल यूपी में है और इसके ही मद्देनजर कांग्रेस ने उन्हें अपना सीएम कैंडिडेट बनाया। शीला का ससुराली संबंध यूपी में बड़े कांग्रेसी नेता उमाशंकर दीक्षित के परिवार से है। उमाशंकर दीक्षित केंद्रीय मंत्री के साथ साथ राज्यपाल भी रहे हैं।

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शीला दीक्षित - फोटो : अमर उजाला
राजनीति में आने से पहले वे कई संगठनों से जुड़ी रही हैं और उन्होंने कामकाजी महिलाओं के लिए दिल्ली में दो हॉस्टल भी बनवाए। 1984 से 89 तक वे कन्नौज (उप्र) से सांसद रहीं। इस दौरान वे लोकसभा की समितियों में रहने के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र में महिलाओं के आयोग में भारत की प्रतिनिधि रहीं। वे बाद में केन्द्रीय मंत्री भी रहीं। वे दिल्ली शहर की महापौर से लेकर मुख्यमंत्री भी रहीं।  

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शीला दीक्षित - फोटो : अमर उजाला
बीते लोकसभा चुनाव में शीला दीक्षित को कांग्रेस की तरफ से यूपी का सीएम प्रोजेक्ट किए जाने कपूरथला में रहने वाले उनके 93 वर्षीय मामा वीएन पुरी बेहद उत्साहित दिखे थे। मामा पुरी ने बताया कि करीब सवा साल तक वह अपनी नानी लज्जावती के साथ हिंदू पुत्री पाठशाला सीनियर सेकेंडरी स्कूल में सातवीं कक्षा की पढ़ाई की। उनकी नानी वहां की प्रिंसिपल थीं।
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शीला दीक्षित - फोटो : amar ujala
वीएन पुरी ने बताया था कि वे खुश हैं कि उनकी भांजी केंद्र की सियासत में अहम भूमिका निभा रही हैं। शीला 1988 में अपनी नानी लज्जावती के स्वर्गवास पर कपूरथला आई थीं, उस समय वह केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री थी। वैसे तो वह साल में एक बार ननिहाल जरूर आती थी, लेकिन सियासत में ज्यादा व्यस्त होने के चलते वह 2004 में एक समारोह में शिरकत करने आई तो घर में कमरे और स्कूल की कक्षा और उस बैंच को देखा, जहां वह बैठती थीं।
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