रविवार को सड़क पर उतरने की जाट आंदोलनकारियों की घोषणा गर्म मौसम और पुलिस-प्रशासन की सरगर्मी की वजह से बेअसर रही। शहर में कहीं भी जाट प्रदर्शनकारी सड़क पर नजर नहीं आए। आम जनता की सुरक्षा और आंदोलनकारियों से निपटने के पुख्ता इंतजाम से पूरा दिन शांति से गुजर गया। यहां तक कि फरवरी में उपद्रव का केंद्र रहे झाड़सेंतली गांव और पियाला चौक पर भी सन्नाटा छाया रहा।
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पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
जाट आंदोलन के मद्देनजर सुबह चार बजे से ही सशस्त्र पुलिस बल और रैपिड एक्शन टीम के जवान शहर में मुस्तैद कर दिए गए। ओल्ड फरीदाबाद रेलवे स्टेशन और उसके आस पास के क्षेत्र की निगरानी एनआईटी एसएचओ नरेश कुमार की अगुवाई में टीम ने संभाली तो बस अड्डे पर कोतवाली प्रभारी सुमन पुलिस बल के साथ मौजूद थे। बल्लभगढ़ बस अड्डे पर सदर पुलिस तैनात थी।
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फरवरी में आंदोलन के दौरान झाड़सेतली गांव सेक्टर 12 और पियाला चौक पर उपद्रव हुआ था। झाड़सेतली गांव में पुलिस का अस्थायी कंट्रोल रूम बनाकर एक कंपनी बल तैनात कर दिया गया था। पियाला चौक पर भी भारी पुलिस बल की तैनाती देख आंदोलनकारी सड़क पर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सके। रविवार को छुट्टी का दिन होने की वजह से आम दिन के मुकाबले सड़कों पर यातायात भी काफी कम था।
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साढ़े दस बजे तक पारा 40 डिग्री पार कर चुका था इसका भी असर सड़कों पर दिखाई दिया। सड़क पर प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस वाहनों के अलावा अन्य वाहन बहुत ही कम नजर आए। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए शहर को कई जोन में बांटकर ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैनात किए गए थे। ताकि हालात बिगडने पर यह ड्यूटी मजिस्ट्रेट तुरंत ही कार्रवाई के आदेश जारी कर सकें।
इंतजार करता रहा रिजर्व पुलिस बल- सेक्टर 12 में लघु सचिवालय में तीन बटालियन सशस्त्र बल को रिजर्व में रखा गया था ताकि कहीं से भी सूचना आने पर उसे रवाना किया जा सके। सूत्रों के मुताबिक फरवरी के आंदोलन से सबक लेकर पुलिस ने शहर के बड़े जाट नेताओं को उनके घरों में नजरबंद कर दिया था। शहर के करीब दस जाट नेताओं के घरों आस पास भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। जाट नेताओं की गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही थी। यही वजह है कि कोई भी नेता सड़क पर नहीं दिखा।