आम आदमी पार्टी छोड़ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुई महिला नेता शाजिया इल्मी को बुधवार को जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में बोलने से रोक दिया गया।
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शाजिया का दावा है कि वह यूनिवर्सिटी में तीन तलाक मुद्दे पर आयोजित एक सेमिनार में वक्ता के तौर पर बुलाई गई थीं। शाजिया ने बताया कि तीन तलाक के मुद्दे पर उन्हें पैनल डिस्कशन के मुद्दे पर जामिया में निमंत्रित किया गया था लेकिन आयोजकों पर उन्हें न बोलने देने के लिए दबाव बनाया जा रहा था।
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शाजिया के मुताबिक आयोजकों को डर था कि शाजिया के बोलने से कैंपस का माहौल बिगड़ सकता है इसलिए उन्हें बोलने से मना कर दिया गया।
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बता दें कि यह सेमिनार 16 फरवरी को ही होना था लेकिन बाद में इस 28 फरवरी के लिए टाल दिया गया। साथ ही इस सेमिनार के वक्ताओं की सूची भी बदल दी गई जिसमें से शाजिया इल्मी का नाम हटा दिया गया। इल्मी का तो ये भी कहना है कि वक्ताओं के नाम बदलने के साथ ही डिबेट का इश्यू ही तीन तलाक से महिला शसक्तिकरण कर दिया गया।
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- फोटो : हिमांशू सोनी/अमर उजाला
इसके बाद शाजिया ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर रामजस में उमर खालिद और शेहला राशिद को बोलने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है तो जामिया में मुझे और मीनाक्षी लेखी को क्यों नहीं बुलाया जा सकता?
हालांकि जामिया के डीन मेहताब आलम ने इस मामले पर सीधे कोई जवाब देने से बचे और कहा कि उन्होंने ने भी कुछ ऐसी ही कहानी सुनी है कि सेमिनार में शाजिया को बोलने नहीं दिया गया।