इससे पहले उनकी हालत गंभीर बताई जा रही थी। उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया था। जगह-जगह उनके स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रार्थनाएं की जा रही थीं। जिस कमरे में उन्हें रखा गया था, वहां पर सिर्फ जैन मुनियों और शिष्यों को ही जाने की इजाजत थी। गुरुवार शाम कुछ अन्य जैन संत भी उनसे मिले थे।
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