साइबर सिटी पुलिस और कॉरपोरेट के संयुक्त महत्वाकांक्षी अभियान कार फ्री डे की मंगलवार को हवा निकलती दिखाई दी। इस पर आईपीएस विवाद पूरी तरह से हावी रहा। पुलिस आयुक्त नवदीप सिंह विर्क तो दिखे लेकिन ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर (ट्रैफिक) भारती अरोड़ा वहां नहीं थीं। जिन सड़कों पर कार फ्री अभियान रखा गया था, वहां दिन भर कार दौड़ती रहीं। इस डे की थोड़ी बहुत इज्जत मारुति कर्मचारियों और रोटरी स्कूल ने बचाई।
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IPS अधिकारियों की लड़ाई ने निकाली कार फ्री डे की हवा
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शहर के सेक्टर-29 स्थित लेजर वैली ग्राउंड में मारुति कर्मचारियों द्वारा कार फ्री-डे को सफल बनाने के लिए ट्रैफिक अनुशासन दिवस मनाया गया। कंपनी के कर्मचारी पहले लेजर वैली पार्क पहुंचे। वहां सभी ने अपनी कारों को पार्क किया। वहां कंपनी की ओर से तकरीबन पांच बसों की व्यवस्था की गई थी, जो उन सभी को कंपनी तक लेकर गई।
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कर्मचारियों की पहली बस को हरी झंडी दिखा गुड़गांव के पुलिस कमिश्नर नवदीप सिंह विर्क ने रवाना किया। विर्क ने कहा कि मारुति कंपनी ने कार फ्री अभियान को अपना समर्थन देकर इसे सफल बनाया है। मारुति उद्योग कामगार यूनियन के महासचिव कुलदीप जांघू ने कहा कि बस के अलावा कंपनी कर्मचारी साइकिल और कार पुलिंग कर भी आए।
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कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि जहां रोजाना कर्मचारी तकरीबन आठ सौ कारों को लेकर आते हैं। कार फ्री अभियान के दौरान इस संख्या में 50 प्रतिशत से अधिक की कमी आई। आईपीएस विवाद के मद्देनजर शुरू से ही कार फ्री डे के तीसरे संस्करण पर संशय था। अभियान में जुटे पुलिस वालों से लेकर, कॉरपोरेट सेक्टर और अन्य संगठनों का उत्साह काफी कम रहा।
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साइकिल ट्रैक दिखा सूना कार फ्री डे के दौरान पुलिस द्वारा तैयार साइकिल ट्रैक पूरी तरह से खाली नजर आ रहा था। सुभाष चौक-हुडा सिटी सेंटर रोड पर आरक्षित साइकिल ट्रैक में कारों को खड़ा देखा गया। उसे हटवाने वाला कोई पुलिसकर्मी भी नजर नहीं आया। साइकिल की सवारी करने वालों में पुलिस और कॉरपोरेट सेक्टर के गिने-चुने लोग ही दिखे।
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कार फ्री डे के लिए निर्धारित सड़कों पर दिन भर कारों का रेला चलता रहा। गोल्फ कोर्स रोड, हुडा सिटी सेंटर, शंकर चौक, साइबर सिटी और उद्योग विहार की सड़कों को देखकर लग ही नहीं रहा था कि यह कार फ्री हैं। जो लोग गुड़गांव को कार फ्री देखना चाहते हैं, उन्हें यह दृश्य देखकर काफी निराशा हुई। एक कॉरपोरेट कंपनी में अधिकारी मंजीत राय ने कहा कि कार फ्री डे को सफल बनाने के लिए पुलिस को अभी काफी मेहनत करनी होगी।
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शहर को कार और प्रदूषण मुक्त रखने का महत्वाकांक्षी अभियान अपने आगाज के साथ ही दम तोड़ता दिख रहा है। मंगलवार को इसका तीसरा दौर निराशाजनक रहा। मात्र कुछ चेहरों के भरोसे इसे सफल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। हर कैंपेन में वही गिने-चुने लोग नेतृत्व करते दिख रहे हैं। कोई नया चेहरा अभियान का हिस्सा नहीं बन रहा। आयोजन से जुड़े लोग भी इसके भविष्य को लेकर संशय की स्थिति में हैं।
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22 सितंबर को साइबर सिटी में कार फ्री डे का आगाज हुआ। इसकी शुरूआत शानदार रही। गुड़गांव पुलिस के सभी आला अधिकारियों ने इसमें शिरकत की। मगर अभियान के तीसरे दौर में पुलिस के भी तेवर ढीले थे। कार फ्री कांसेप्ट को गुड़गांव में लेकर आने वाली संयुक्त पुलिस आयुक्त (ट्रैफिक) भारती अरोड़ा ने इससे दूरी बनाए रखी। हालांकि बताया जा रहा है कि वह कार फ्री डे-3 के दौरान शहर में मौजूद नहीं थीं।
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शहर के सेक्टर-29 स्थित लेजर वैली ग्राउंड में जब पुलिस कमिश्नर नवदीप सिंह विर्क पहुंचे तो लोगों की नजरें भारती अरोड़ा को भी तलाश रही थीं। लोगों के बीच उनकी गैर-मौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। कार फ्री डे का कैंपेन नगारो, जेनपैक्ट, फिडैलिटी, एनटीटी डाटा, नैस्कॉम और डिविनिटी जैसी कुछ कंपनियों के ही भरोसे चलाया जा रहा है।