दीवाली पर त्रिलोकपुरी में हुए सांप्रदायिक दंगे को लोग अभी भूले नहीं हैं कि शनिवार को एक बार इलाके को दंगे की आग में झुलसाने का प्रयास किया गया। लेकिन समय रहते पुलिस की कार्रवाई और सूझबूझ से बड़ा बलवा होने से टल गया। (सभी फोटो: अनिल कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली)
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ऐसा नहीं करती पुलिस तो बिगड़ जाता सांप्रदायिक माहौल
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खुद संयुक्त आयुक्त संजय बेनीवाल और पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त अजय कुमार रात भर इलाके में डटे रहे। रातों-रात इलाके में पड़े पत्थरों ट्रॉलियों की मदद से हटा लिया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में अमन कमेटी के लोगों ने रातभर लोगों को समझाने का काम किया।
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अमन कमेटी के सदस्य मो. यूनुस खान ने बताया कि इलाके के कुछ शरारती लोग नहीं चाहते हैं कि दोनों समुदाय के बीच शांति बनी रहे। मौका ढूंढकर दोनों समुदाय को लड़ाना ही कुछ लोगों का मकसद है।
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शनिवार को मामूली झगड़े के बाद बवाल को सांप्रदायिक रंग देने का खूब प्रयास किया गया। एक समुदाय के लोगों ने दूसरे समुदाय के दुकानों में लूटपाट का प्रयास किया। लेकिन समय रहते पुलिस मौके पर पहुंच गई।
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आसपास के थानों से आई पुलिस ने 26 और 27 ब्लॉक के ब्लॉक को काबू किया। बाद में आई फोर्स ने 28 ब्लॉक के लोगों को खदेड़ दिया। एक अन्य शख्स गोविंद ने बताया कि कुछ शरारती तत्व खंभों पर लगे स्ट्रीट लाइट के मेन स्विच को बंद कर कर देते हैं। ऐसे में पूरे इलाके में अंधेरा हो जाता है। दीवाली पर हुए दंगे में भी ऐसा ही किया गया था। शनिवार को बवाल के बाद भी ऐसा ही किया गया। पुलिस अधिकारियों ने समय पर पहुंचकर स्ट्रीट लाइट को दोबारा से ऑन करवाया।
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त्रिलोकपुरी इलाके में दीवाली पर हुए दंगे के बाद से लोगों के दिलों में खौफ अब भी बरकरार है। रविवार को लोगों की आंखों में यह खौफ देखा गया। सड़कों पर भीड़ भी कम ही दिखी। बुंदू नामक दुकानदार ने बताया कि दीवाली के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपने-अपने मकान बेचकर दूसरे स्थानों पर लेना शुरू कर दिया है। बुंदू के मुताबिक खुद उसका मकान 28 ब्लॉक में था। दीवाली पर उसके दुकान में लूटपाट के अलावा घर तोड़फोड़ की गई। दंगे के बाद उसने अपना मकान बेचकर 26 ब्लॉक में लिया है।