फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

IAS बी चंद्रकला ने 'रंगरेज' के बाद फिर दिखाया अंदाज शायराना, लिखा- जानेमन 'तुम, वहीं आ जाना'

Mon, 14 Jan 2019 10:47 PM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
विज्ञापन
1 of 8
b chandrakala - फोटो : फेसबुक
अवैध खनन मामले में सीबीआई के छापे की वजह से सुर्खियों में आई आईएएस अफसर बी. चंद्रकला ने एक बार फिर शायराना अंदाज में Linkedin पर एक कविता पोस्ट की है। इससे पहले भी 10 जनवरी को उन्होंने Linkedin पर खुद लिखी एक कविता डालकर अपनी भावनाओं को व्यक्त किया था। इस कविता में उन्होंने सीबीआई के छापों को चुनावी हथकंडा बताया, और जीवन को जीने का तरीका भी बताया। 
विज्ञापन

2 of 8
IAS बी चंद्रकला की Linkedin पर पोस्ट कविता - फोटो : Linkedin
एक बार फिर आईएएस बी. चंद्रकला ने शायराना अंदाज में अपनी खुद लिखी हुई एक कविता लिंकडिन प्रोफाइल पर पोस्ट की। उन्होंने लिखा कि 
परमात्मा के दिए इस नए सवेरे में हम अपनी तरफ से प्रेम की सुगंध  फैलाएं, 'नफरत और घृणा से जीवन दूषित होता है'। कविता के अंत में बी. चंद्रकला ने लिखा है कि छापा जांच की प्रक्रिया का एक हिस्सा मात्र है। पढ़ें पूरी कविता-

प्रिय दोस्तों, आईये, परमात्मा के दिये इस नये सवेरे में हम अपनी तरफ से प्रेम की सुगंध फैलाएं ।।- नफरत और घृणा से जीवन , दूषित होता है ।। इन सुंदर पंक्तियों के साथ शुभारम्भ करते हैं---

आ सोलह श्रृंगार करूं, मैं,
आ मैं तुमको, प्यार करूं, मैं।।

घर से निकल कर, सीधी सड़क पर,
चौवाड़े से दायीं, मुड जाना,
वह जो गंगा तट है, देखो,
ऊपर एक मंदिर है, पुराना।।

उसके पीछे पीपल का वृक्ष,
जाने मन तुम, वहीं आ जाना,
आना तुम छिप-छिप कर आना,
आना, नजरें चार करेंगे, मधुवन का श्रृंगार बनेंगे।।

जारी है...
 
विज्ञापन

3 of 8
IAS बी चंद्रकला की Linkedin पर पोस्ट कविता - फोटो : Linkedin
जेट की रात है, बड़ी ही सुहानी,
माहताब है, देख दिवानी,
रातरानी, चम्पा, चमेली,
फूल, तुम लाना संग में सहेली।।

रजनीगंधा को भी ले आना,
दोस्त है ये अपना, बड़ा ही पुराना,
आना, जरा जल्दी आ जाना।।

चंदा की बे-सब्री देखो,
उग आयी है, रात की रानी,
नदियों की धारा तुम, देखो,
देखो इसका, कल-कल पानी।।

कोयल की स्वर, देखो, हे प्रिये!
उर्वशी भी है, तेरी दिवानी,
कुमकुम के रंगों से सज गयी,
गौधूली की प्रीत पुरानी ।।

4 of 8
IAS बी चंद्रकला की Linkedin पर पोस्ट कविता - फोटो : Linkedin
देखो, जब मंदिर में बजेगी ,
संध्या-भजन की घंटी, तब तुम,
बीत जाए जब, एक पहर और,
घर से निकल  ही आना प्रिय तुम।।

मैं बैठा इंतजार करूंगा,
पीपल के नीचे, चांदनी रात में,
मैं बन दर्पण, श्रृंगार करूंगा,
आना  तुमको मैं प्यार करूंगा।।
छापा, जांच की प्रक्रिया का एक  हिस्सा मात्र है।।--आपकी  चंद्रकला।।
 
विज्ञापन

5 of 8
b chandrakala - फोटो : ट्विटर
गौर हो कि, रेत के अवैध खनन से जुड़े मामले में सीबीआई ने 5 जनवरी को उत्तर प्रदेश और दिल्ली में 12 जगहों पर छापे मारे थे। अधिकारियों ने बताया कि आईएएस अधिकारी बी. चन्द्रकला सहित वरिष्ठ अधिकारियों के आवासों पर इस संबंध में छापे मारे गए। चन्द्रकला भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने अभियानों के लिए सोशल मीडिया पर बेहद लोकप्रिय हैं। उन्होंने बताया कि छापे उत्तर प्रदेश के जालौन, हमीरपुर, लखनऊ समेत कई जिलों के साथ ही दिल्ली में भी मारे गए।
विज्ञापन

6 of 8
b chandrakala
बी चंद्रकला पर हमीरपुर में जिलाधिकारी रहते हुए अवैध खनन व अपने चहेतों को पट्टे देने का अरोप है। इस संबंध में दो साल पहले हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया। चंद्रकला हमीरपुर, मथुरा, बुलंदशहर, मेरठ और बिजनौर में जिलाधिकारी के पद पर रह चुकी हैं। 
 
विज्ञापन

7 of 8
b chandrakala - फोटो : फेसबुक
इससे पहले लिखी कविता में उन्होंने सीबीआई के छापों को चुनावी हथकंडा बताया है और जीवन को जीने का तरीका भी बताया है। पढ़ें उनकी लिखी कविता...

बी. चंद्रकला ने लिखी ये कविता...

रे रंगरेज़ !  तू रंग  दे मुझको।।

रे रंगरेज़ तू रंग दे मुझको,
फलक से रंग, या मुझे  रंग दे जमीं  से ,
रे रंगरेज़! तू रंग दे कहीं से।। 

छन-छन  करती पायल से,
जो फूटी हैं  यौवन के स्वर ;

लाल से रंग मेरी होंठ की कलियाँ, 
नयनों को रंग, जैसे चमके बिजुरिया, 
गाल पे हो, ज्यों  चाँदनी  बिखरी,
माथे पर फैली  ऊषा-किरण,

रे रंगरेज़ तू रंग दे मुझको, 
यहाँ  से रंग, या मुझे रंग दे,  वहीं से,
रे रंगरेज़ तू रंग दे,  कहीं से।।

कमर को रंग, जैसे, छलकी गगरिया,
उर,,,उठी हो,  जैसे चढ़ती उमिरिया,
अंग-अंग रंग, जैसे, आसमान पर,
घन उमर उठी हो बन, स्वर्ण नगरिया।।
   (जारी  है...)
विज्ञापन

8 of 8
dm b. chandrakala - फोटो : अमर उजाला
रे रंगरेज़ ! तू रंग दे मुझको,
सांस-सांस  रंग, सांस-सांस  रख,
तुला बनी हो ज्यों , बाँके बिहरिया , 

रे रंगरेज़ ! तू रंग दे मुझको ।।

पग- रज ज्यों, गोधुली बिखरी हो,
छन-छन करती  नुपूर  बजी हो,
फाग के आग से उठती सरगम,
ज्यों मकरंद सी महक उड़ी हो ।।

रे रंगरेज़ तू रंग दे मुझको  ,
खुदा सा रंग , या मुझे रंग दे  हमीं से ,
रे रंगरेज़ तू रंग दे , कहीं से ।।

पलक हो,  जैसे  बावड़ी वीणा,
कपोल को चूमे, लट का नगीना,
तपती जमीं  सा मन को रंग दे,
रोम-रोम तेरी चाहूँ  पीना।।

रे रंगरेज़ तू रंग दे मुझको,
बरस-बरस मैं चाहूँ जीना।। :: बी  चंद्रकला  ,,आई ए एस।।
,,चुनावी  छापा तो पड़ता रहेगा ,,लेकिन जीवन के रंग को क्यों  फीका किया जाय ,,दोस्तों।
आप सब से  गुजारिश है कि  मुसीबतें  कैसी भी हो , जीवन की डोर को बेरंग ना छोड़ें।।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें