फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bakrid: 70 का सोनू 55 हजार में बिका, कारोबारी बोले- दशकों में ऐसा कभी नहीं हुआ; जो इस बार हुआ

Sun, 10 Jul 2022 07:14 PM IST
Vikas Kumar आशीष निगम, अमर उजाला, गुरुग्राम
विज्ञापन
1 of 6
बकरा मार्केट - फोटो : अमर उजाला
मिलेनियम सिटी में मोटी कमाई की उम्मीद लगाए बकरा कारोबारियों की बकरीद बकरों पर कुर्बान हो गई। उन्हें उम्मीद थी कि एक साल बाद होने वाले त्योहार में लोग मनपसंद जानवर मुंहमांगे दाम में ले जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। महंगाई के कारण लोगों ने बहुत कम खरीदारी की। 
विज्ञापन

2 of 6
बकरा मार्केट - फोटो : अमर उजाला
आलम ये रहा कि जिस बकरा बाजार में बकरीद पर 700 से 800 बकरे अमूमन बिक जाते हैं, वहां 250 का ही सौदा हुआ है। शनिवार की रात गुरुग्राम से दिल्ली भेज गए सैकड़ों बकरे और भैंसे भी लौट आए। वहां भी खरीदारी नहीं हुई।

इस हालात में जब लोग घरों में लजीज व्यंजनों का लुत्फ उठा रहे थे। उस वक्त कई बकरा कारोबारी सड़कों पर थे। माल नहीं बिकने से होने वाले घाटे का हिसाब लगा कर परेशान हो रहे थे। इन लोगों ने सदर बाजार के बकरा बाजार में ही त्योहार मनाया। वहीं नमाज पढ़ने के बाद बाहर से ही कुछ मंगा कर भूख मिटाई।
विज्ञापन

3 of 6
बकरा कारोबारी - फोटो : अमर उजाला
सोहना और बादशाहपुर निवासी कुछ कारोबारी सुबह घर में कुछ पैसे देकर वापस आ गए। नूंह, फिरोजपुर झिरका, मेवात वाले दूरी के कारण नहीं गए थे। जो रात में गए भी, वो भी सुबह इस उम्मीद में लौट आए कि शायद खरीदार आ जाएं तो काम बन जाए। इन सभी को परिजनों के साथ त्योहार नहीं मनाने का अफसोस भी था। बच्चों की याद भी आ रही थी।

आखिरी जुगाड़ में जब बचे कुए कुछ जानवर काट कर बेचे गए तो उमस में सड़ने के डर से मीट का रेट अचानक कम हो गया, क्योंकि फुटकर दुकानदार पहले से ही अपना माल खपाने में लगे थे। जी हां.. कुछ ऐसी ही गुजरी बकरा विक्रेताओं की बकरीद। मायूस कारोबारी बोले.. दशकों में ऐसा कभी नहीं हुआ था।

4 of 6
बकरा मार्केट - फोटो : अमर उजाला
70 का सोनू बिका 55 हजार में
बलू का चर्चित बकरा सोनू 55 हजार रुपये में बिका। जिसकी कीमत 70 हजार रुपये मांगी जा रही थी। इस बकरे का वजन एक क्विंटल और लंबाई 3.8 फुट थी, जिसकी वजह से ये पूरे बाजार में चर्चा में था। इसके मालिक ने सौदा होने के बाद राहत की सांस ली। नहीं तो इसके लिए एक साल और इंतजार करना पड़ा।
विज्ञापन

5 of 6
नुकसान का हिसाब लगाता कारोबारी - फोटो : अमर उजाला
भैंसे वाले भी नुकसान में
कुर्बानी के लिए भैंसे बेचने वाले भी नुकसान में हैं। साझे में कुर्बानी देने वाले इस बार बहुत कम थे, इसलिए इनकी बिक्री नहीं हुई। इस कारोबार से जुड़े मुबीन कुरैशी ने बताया कि इस बार कुर्बानी में सख्ती का असर पूरे हरियाणा में रहा। लोगों ने इसलिए कम खरीदारी की है।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
बकरा मार्केट - फोटो : अमर उजाला
98 बकरे लाया था, 30 रह गए हैं। जिस कीमत पर खरीद हुई थी, उसी में बेच दिया। आठ दिन में जो खर्च हुआ, उसको जोड़ दें तो घाटा ज्यादा हो गया है। दिल्ली भेजे गए बकरे भी वापस आ गए। -वसीम कुरैशी निवासी सोहना।

35 बकरे लाया था, बहुत मेहनत से बिना मुनाफा बेचने के बाद भी तीन रह गए। खरीदारों का इंतजार कर रहा हूं। आठ दिन हो चुके हैं। कुछ समझ में नहीं आ रहा है। नुकसान कैसे पूरा होगा, यही सोच रहा हूं। -सुलेमान, निवासी मेवात।

मैं आठ बकरे लाया था। दो ही बिके, छह बाकी हैं। 30 साल से ये काम कर रहा हूं। पहला मौका है जब त्योहार सड़कों पर हो रहा है। दो बकरों के पैसे घर भिजवा दिए। हमारा क्या हम सड़कों पर ही ठीक है। घाटा हुआ है, अब भरवाई कैसे होगी, यही सोच रहे हैं। -इनामुद्दीन, निवासी बादशाहपुर।

दो लाख रुपये जुटा कर चार बकरे लाया था, दो बिके और दो बच गए हैं। उधार पैसे लेकर काम किया। एक लाख रुपये का कर्ज हो गया है। जब तक दोनों बिक नहीं जाएंगे, नुकसान बना रहेगा। -हाजी शाहिद कुरैशी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें