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चिंताजनक: पिज्जा, बर्गर, सिगरेट और शराब...छोटी उम्र में हो रहा दिल खराब; इलाज का खर्च इतना कि बिक जाए घर-द्वार

Fri, 29 Jul 2022 08:07 PM IST
Vikas Kumar आशीष निगम, अमर उजाला, गुरुग्राम
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तेजी से बढ़ रही है हृदय रोगियों की संख्या - फोटो : अमर उजाला
सांस लेने में बार-बार तकलीफ, अचानक उलझन होना, चलने, दौड़ने या सीढ़ी चढ़ने में परेशानी होना अब आम बात हो गई है। लोग इन शिकायतों के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। चिंताजनक बात ये है कि इसमें दस फीसदी 30 से 40 आयुवर्ग के युवा है। सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल के हार्ट सेंटर में रोजाना औसतन 40 मरीज दिल में दर्द कुछ ऐसी ही शिकायत लेकर आ रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक जंक फूड, शराब, सिगरेट और नशे की लत के कारण हृदय रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। 
 
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नागरिक अस्पताल स्थित हार्ट सेंटर - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2018 में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत केरल की कंपनी मेडीट्रीना ने नागरिक अस्पताल में हार्ट सेंटर की शुरुआत की थी। इसमें दो हृदयरोग विशेषज्ञ डॉक्टर, 25 पैरामेडिकल स्टाफ सहित कुल 40 कर्मियों का स्टाफ कार्यरत है। वर्ष 2021 में यहां 25 एंजियोप्लास्टी हुई, इस वर्ष 75 मरीजों को इसकी सेवा मिली। अब 100 का लक्ष्य निर्धारित है। अब तक यहां दो हजार मरीजों की एंजियोप्लास्टी हो चुकी है, जबकि 50 लोगों को पेसमेकर लगाया जा चुका है। बाईपास सर्जरी के गंभीर मामलों को एम्स, सफदरजंग और जीबी पंत हॉस्पिटल भेजा जाता है। 
 
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मोहम्मद शफी - फोटो : अमर उजाला
केस नंबर एक 
बिहार के छपरा निवासी 33 वर्षीय शफी को एक महीने पहले बाएं कंधे में पीठ की ओर दर्द शुरू हुआ। जांच कराने पर पता चला कि उनके हृदय में ब्लॉकेज हो रहा है। इलाज शुरू हुआ तो उनको दो स्टंट लगा कर ब्लॉकेज खोला गया। अब वो सीसीयू में उपचाराधीन हैं। उनको ये शिकायत अनियमित खानपान और स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देने से हुई।

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अतुल - फोटो : अमर उजाला
केस नंबर दो
हिसार निवासी 40 वर्षीय अतुल को शराब की लत लग गई थी। इससे उनके जिगर और फेफड़े में संक्रमण हो गया। इसके बाद हृदय की बीमारी हो गई। वर्तमान में उनको भी उपचार दिया जा रहा है। डाक्टरों ने बताया कि आदतों में सुधार कर अभी वह स्वस्थ रह सकते हैं लेकिन अत्यधिक नशे के इस्तेमाल से बहुत छोटी उम्र में उनको गंभीर बीमारियां हो गई है। 
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डॉ. सुशांत - फोटो : अमर उजाला
अब हृदयरोग बड़ी उम्र वालों की बीमारी नहीं रही। ये किसी भी उम्र में हो सकता है। इसलिए जंक फूड से बचें। दिनचर्या को व्यवस्थित रखें और तनाव से बचें। अन्यथा किसी भी उम्र में ये बीमारी हो सकती है। 30 से 40 आयु वर्ग के हृदय रोगी रोजाना मिलना बहुत चिंता की बात है। -डॉ. सुशांत, हृदयरोग विशेषज्ञ।
 
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डॉ. संजय अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला
गुजरे चार वर्षों में लगातार कम उम्र के हृदयरोगियों की संख्या बढ़ रही है। रोजाना ओपीडी में आने वाले मरीजों में दस फीसदी 40 वर्ष तक के मरीज हैं। ये बहुत चिंताजनक है। हमें अपनी दिनचर्या और खानपान को सही करना होगा। अन्यथा ये संख्या बढ़ती रहेगी। महिलाओं में अभी इस बीमारी का प्रकोप कम है। -डॉ. संजय अग्रवाल, हार्ट सेंटर संचालक।

- 30 से 40 वर्ष आयुवर्ग के दिल के मरीजों की संख्या 10 फीसदी
- 40 से 50 वर्ष आयुवर्ग के दिल के मरीजों की संख्या 15 फीसदी
- 50 से अधिक आयुवर्ग के दिल के मरीजों की संख्या 75 फीसदी
- 80 फीसदी हृदयरोगी पुरुष, 20 फीसदी महिलाएं
- मासिक चक्र के कारण महिलाओं में कम शिकायत
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हृदय की बीमारी से ग्रस्ती मरीज - फोटो : अमर उजाला
निजी अस्पतालों में इलाज के खर्च में दोगुने से ज्यादा का अंतर
नागरिक अस्पताल सेक्टर-10 में स्थित हार्ट सेंटर में इलाज कराना बाकी निजी अस्पतालों की तुलना में सस्ता है। खर्च में ये अंतर लगभग दोगुने से ज्यादा है। पीपीपी यानी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत चलने वाले सेंटर के संचालक डॉ. संजय अग्रवाल कहते हैं कि केंद्र सरकार से निर्धारित दरों पर ही यहां इलाज हो रहा है। ये दरें सीजीएचएस की दरों से भी कम हैं। इसलिए यहां इलाज कराने वालों की संख्या बढ़ रही है।

फीस                    हार्ट सेंटर            निजी अस्पताल
ओपीडी फीस          116 रुपये              500 रुपये 
टीएमटी                  326 रुपये             1000 रुपये 
ईको                      982 रुपये              2500 से 3000 रुपये
स्टेंट                      47 हजार              एक से डेढ़ लाख रुपये 
दो स्टेंट                  75 हजार              ढाई से तीन लाख रुपये   
पेसमेकर               एक लाख रुपये       दो से ढ़ाई लाख रुपये
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