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गुड़गांव में छोले-कुल्चे का ठेला लगाने वाली महिला ने एक साल में ही खोल लिया अपना रेस्त्रां

Tue, 20 Jun 2017 02:46 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, गुरुग्राम
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urvashi yadav - फोटो : सोशल मीड‌िया
शायद उर्वशी जैसी महिलाएं ही असल मायने में सुपर हीरो होती हैं। एक वक्त जिस परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी बुरी थी कि एक गृहिणी को बाहर निकल कर काम करना पड़ा आज उसी की बदौलत परिवार और वो खुद एक सम्माजनक स्थिति में है। वही उर्वशी ज‌िसने आर्थ‌िक मुसीबतों में घ‌िरे अपने पर‌िवार को छोले-कुल्चे का ठेला लगाकर संभाला था।
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urvashi yadav - फोटो : ह‌िंदुस्तान टाइम्स
उर्वशी जैसी महिलाएं अपने काम से उन सभी के लिए मिसाल हैं जो विपरीत परिस्थितियां आने पर घबरा जाते हैं और हार मान लेते हैं। उर्वशी के जीवन में बुरा दौर तब आया जब उनके पति का एक्सीडेंट हो गया और डॉक्टरों ने कहा कि अब उनके पति बेड से नहीं उठ पाएंगे। एक समय उनके पति परिवार के लिए कमाने वाले मुख्य सदस्य थे। उनके दोनों बच्चे गुड़गांव के नामी स्कूलों में पढ़ते हैं। वो खुद एक टीचर थीं। लेकिन उन्हें लगने लगा कि उनकी कमाई से वो अपना घर नहीं चला सकेंगी और उनके बच्चों को आर्थिक तंगी से स्कूल भी बदलना पड़ेगा।
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urvashi yadav - फोटो : सोशल मीड‌िया
यही सब सोचते हुए उन्होंने अपना खुद का काम करने की सोची लेकिन इसके लिए वो किसी के सामने हाथ नहीं फैलाना चाहती थीं। इसलिए उन्होंने कोई रेस्त्रां खोलने के बजाय छोले कुलचे का ठेला चलाना सही समझा। उर्वशी को खाना बनाना पसंद है और उन्होंने अपने इसी हुनर को फायदे के लिए इस्तेमाल करने की सोची।

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urvashi yadav - फोटो : सोशल मीड‌िया
उर्वशी बताती हैं कि उन्हें ठेला चलाने का खयाल तब आया जब एक बार वो अपने पति के लिए और दवाइयां लेने आई थीं और उन्होंने सड़क किनारे एक ठेला देखा। उन्होंने ठेले वाले को देखकर उससे बात करनी शुरु कर दी और तब उन्हें लगा कि उन्हें खुद का काम शुरु करना चाहिए।
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urvashi yadav - फोटो : सोशल मीड‌िया
उर्वशी ने सारा हिसाब-किताब लगाया और पाया कि उनकी सैलरी से ठेला खरीदा जा सकता था और काम शुरु किया जा सकता था। उर्वशी के पति ने उसके इस आइडिया में उसका साथ दिया लेकिन उसके बच्चे, ससुर और अन्य परिवार के सदस्य उसके इस विचार से सहमत नहीं थे। लेकिन फिर भी उसने इस विचार को आगे ले जाने की सोची।
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urvashi yadav - फोटो : सोशल मीड‌िया
उर्वशी ने ठेला तैयार किया लेकिन पहले दिन जब वो घर से निकालकर ठेला मार्केट ले जाने लगीं तो उन्हें बहुत ही झेप लग रही थी। पहला दिन उर्वशी के लिए बहुत मुश्किल था और वो बहुत असहज थीं। उन्होंने अपना चेहरा ढक रखा था और वो बुरी तरह टूट चुकी थीं, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला। वो कहती हैं कि मैं एसी के बिना एक मिनट भी नहीं रह सकती थी और उस दिन मुझे धूप और गरमी में खड़े होकर अपने ग्राहकों के लिए छोले कुलचे बनाने पड़ रहे थे।
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urvashi yadav - फोटो : जस्टडायल
उनका काम ठीक-ठाक चल रहा था लेकिन एक फेसबुक पोस्ट ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। सुनाली आनंद गौर ने उर्वशी की दर्दभरी कहानी फेसबुक पर पोस्ट की और यह कहानी देखते ही देखते वायरल हो गई। इस पोस्ट से सुनाली को बहुत फायदा हुआ और उनके ठेले पर तो जैसे ग्राहकों की भीड़ ही लग गई।

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उर्वशी यादव - फोटो : सोशल मीड‌िया
गुड़गांव सेक्टर 14 में गुलाब स्वीट के सामने छोले कुलचे का ठेला लगाने वाली 34 साल की उर्वशी बताती हैं कि अब उनके ससुर किसी को भी उनके बारे में कुछ नहीं कहने देते और वो उर्वशी पर गर्व करते हैं। इससे भी ज्यादा उन्हें खुद पर गर्व है क्योंकि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वो ये सब करेंगी। लेकिन तनाव के दौर में उन्हें समझ आया कि उनमें क्या काबिलियत है।

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उर्वशी यादव - फोटो : सोशल मीड‌िया
उर्वशी बताती हैं कि वर्तमान में हमें कोई आर्थिक तंगी नहीं है लेकिन मैं नहीं चाहती थी कि मेरे बच्चों के भविष्य पर कोई खतरा ना आए इसलिए मैंने यह ठेला शुरु कर दिया। लेकिन उर्वशी के कदम यहीं नहीं रुके। वो अपना काम बढ़ाना चाहती थीं। उनके सपनों को पूरा किया उनकी बढ़ती बिक्री ने और जल्द ही उन्होंने अपना फूड ट्रक खरीद लिया। इसके लिए उन्होंने लाइसेंस ‌भी लिया। पूरे देश ने उनके हिम्मत की दाद दी।

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उर्वशी यादव - फोटो : सोशल मी‌ड‌िया
फूड ट्रक उर्वशी की उड़ान के लिए काफी नहीं था। उन्होंने पैसे बचाए और अब अपना रेस्त्रां 'उर्वशी फूड ज्वाइंट' खोल लिया है जो गुरुग्राम में ही है। इसके लिए उर्वशी ने अपना मेन्यू भी दोबारा तैयार किया है और अब वो अपने मशहूर छोले कुल्चे के साथ ही अन्य च‌ीजें भी ग्राहकों को उपलब्ध कराती हैं।
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उर्वशी यादव - फोटो : सोशल मीड‌‌िया
यह कोई छोटा कदम नहीं है। उर्वशी ने एक साल से भी कम समय में छोले-कुल्चे की रेहड़ी से अपने रेस्त्रां का सफर तय किया है। उन्होंने दिखा दिया है कि अगर दृढ़ इच्छा शक्ति, लक्ष्य पर निगाह और कड़ी मेहनत की जाए तो ‌कुछ भी हा‌सिल किया जा सकता है। उनकी उड़ान को देखते हुए वो दिन दूर नहीं लगता जब वो रेस्त्रां का चेन चला रही होंगी।
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