इन आरोपों में माना दोषी
अदालत ने दोनों आरोपियों को आईपीसी की धाराओं के तहत नाबालिग से दुष्कर्म, अप्राकृतिक कृत्य, अपहरण, हत्या का प्रयास, सबूतों से छेड़छाड़ और गलत इरादे से बंधक बनाने का दोषी माना है। साथ ही उन्हें पॉक्सो एक्ट के तहत गंभीर यौन हमले का भी दोषी माना है, जिसके लिए अधिकतम उम्रकैद की सजा का प्रावधान है।
छह साल, सात जज, 57 गवाह
एकतरफ जहां ट्रायल कोर्ट ने 2012 के निर्भया कांड में महज 10 महीने बाद 2013 में ही दोषियों को फांसी की सजा सुना दी थी, वहीं मासूम गुड़िया को निचली अदालत से न्याय मिलने में ही छह साल लग गए। इस दौरान सात जजों ने सुनवाई की और अभियोजन ने 57 गवाहों को पेश किया। आरोपियों की गवाही में ही अदालत को 5 दिसंबर, 2018 से 25 सितंबर, 2019 तक करीब एक साल का समय लगा।