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गोल्डन बॉय सुशील कुमारः परिजनों से छुपकर शुरू की थी कुश्ती, 12 साल पुराना वादा किया पूरा

Sat, 14 Apr 2018 10:36 AM IST
विनोद डबास/अमर उजाला, नई दिल्ली
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sushil kumar - फोटो : pti
लगातार दो ओलंपिक में दो बार कांस्य एवं रजत और अब लगातार तीन कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीत चुके सुशील कुमार ने 12 वर्ष पहले विश्व में देश का नाम रोशन करने का वादा किया था।
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sushil kumar
वह अपने वायदे को निरंतर पूरा करते आ रहे हैं। वह विश्व चैंपियन भी रह चुके हैं और एशियाड में भी पदक जीत चुके हैं। संभवत: विश्व स्तर पर सबसे अधिक पदक जीतने वाले वह देश के पहले पहलवान हैं।
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sushil kumar
सुशील कुमार ने वर्ष 2006 में राष्ट्रपति से अर्जुन अवार्ड ग्रहण करने के बाद अमर उजाला से बातचीत में वायदा किया था कि देश ने उन्हें जो सम्मान दिया है, वह उसका एक दिन अवश्य कर्ज चुकाएंगे। उन्हें मालूम है कि देश को क्या चाहिए, वह देशवासियों को अवश्य देंगे।

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sushil kumar - फोटो : pti
हालांकि उस समय तक उनकी कोई खास पहचान नहीं थी। वह तब तक विश्व स्तर पर एक-दो पदक ही जीत सके थे। मगर अर्जुन अवार्ड मिलने के बाद उन्होंने पदक जीतने की झड़ी लगानी आरंभ कर दी।
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sushil kumar - फोटो : pti
उन्होंने कहा था कि उनका प्रयास है कि ओलंपिक में पदकों के सूखे को समाप्त करूं। क्योंकि कुश्ती में तब तक देश को एक ही पदक मिला था। इस तरह उन्होंने एक बार नहीं, बल्कि दो बार ओलंपिक में पदक जीतकर अपना वायदा पूरा किया।
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sushil kumar - फोटो : pti
वर्ष 2010 में विश्व चैपिंयन बनकर इतिहास रचा। उनके अलावा देश का कोई भी पहलवान विश्व चैंपियन नहीं बना है। कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीन बार स्वर्ण पदक जीता और एशियाड खेलों में भी कांस्य पदक जीत चुके हैं।
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sushil kumar - फोटो : pti
परिजनों से छुपकर कुश्ती लड़नी की थी शुरू
पिछले कई सालों से सुशील कुमार की जीत पर उसके परिजन फूले नहीं समाते है, जबकि सुशील ने कुश्ती लड़ना अपने परिजनों से छुपकर शुरू किया था। क्योंकि कुश्ती में उसके पिता को सफलता नहीं मिली थी।

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sushil kumar - फोटो : pti
इस कारण वे नहीं चाहते थे कि उनका बेटा पहलवानी करें।  सुशील ने छठी कक्षा में पढने के दौरान 30 किलोग्राम में स्पर्धा में हिस्सा लिया था और वह जोनल स्तर पर प्रथम रहा था। उसकी इस सफलता के बाद उसके परिजनों को उसके कुश्ती लडने के बारे में मालूम हुआ था।

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sushil kumar - फोटो : pti
इसी बीच सुशील छत्रसाल स्टेडियम में राज्य स्तर की स्पर्धा में हिस्सा लेने पहुंचा। वहां उसका हुनर देखकर महाबलि सतपाल ने उसे अपनी शरण में ले लिया।
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sushil kumar - फोटो : pti
इसके बाद सुशील ने मुड़कर नहीं देखा और उसने एक के बाद एक सफलता अर्जित करनी शुरू कर दी। इस तरह उसके परिजनों ने भी उसका साथ देना शुरू कर दिया। कुश्ती में सफलता मिलने के चलते सुशील को रेलवे में नौकरी भी मिल गई। 
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