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गढ़ की चटाई निर्माता संतोष का पीएम मोदी ने मन की बात में किया जिक्र, जानें क्यों हैं प्रेरणास्रोत

Mon, 01 Mar 2021 03:13 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, गढ़मुक्तेश्वर

सार

- नगर के चटाई बनाने वालों में खुशी की लहर
- कारोबार के तेजी से बढ़ने की जगी आस
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संतोष देवी - फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में आत्मनिर्भर भारत के उदाहरण में गढ़ गंगानगरी के चटाई कारोबार का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने चटाई निर्माता संतोष देवी का नाम लिया तो उनके परिजनों और चटाई बनाने वाले लोगों में खुशी छा गई। प्रधानमंत्री द्वारा अपने कार्यक्रम में चटाई के व्यवसाय का जिक्र करने के बाद इससे जुड़े लोगों में कारोबार के तेजी से बढ़ने की आस जगी है। 

गंगानगरी गढ़मुक्तेश्वर में सैकड़ों वर्षों से चटाई बनाने का काम किया जाता है। ये इलाका चटाई और मूढ़ा उद्योग के लिए दूर दूर तक प्रसिद्ध है। हस्तशिल्प केंद्र के रूप में भी इसकी पहचान है। गढ़ नगर के सैकड़ों परिवार चटाई बनाने के व्यवसाय से जुड़े हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में गढ़ नगर के मोहल्ला चटाई वाला निवासी ऋषिपाल सिंह की पत्नी संतोष देवी का जिक्र आत्मनिर्भर भारत बनने के आह्वान में उदाहरण के रूप में किया।
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संतोष देवी परिवार के साथ - फोटो : अमर उजाला
पीएम ने कहा कि कोरोना जैसी महामारी के बीच भी संतोष ने चटाई बनाने के कार्य नहीं छोड़ा, जिसमें चटाई की डिमांड समय-समय में मिलती रही और लॉकडाउन जैसे समय में भी बिक्री होती रही। आत्मनिर्भर भारत बनाने के प्रयासों का ये एक बेहतरीन उदाहरण है। पीएम के संबोधन में संतोष देवी का जिक्र आते ही उनके घर और चटाई निर्माण के व्यवसाय से जुड़े लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई।
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संतोष देवी - फोटो : अमर उजाला
पीएम मोदी द्वारा गंगानगरी ब्रजघाट में होने वाले हस्तशिल्प निर्माताओं के काम को आत्मनिर्भर भारत के स्लोगन से जोड़ा गया है। संतोष देवी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने मन की बात में नगर के छोटे से कस्बे में चटाई से जुड़े कार्यों के बारे में जानकारी लेते हुए पूरे देश को आत्मनिर्भर भारत बनने का अच्छा उदाहरण दिया है, जिसे सुनकर वह काफी खुश हैं।

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संतोष देवी ने बनाई ये चटाइयां - फोटो : अमर उजाला
बिचौलिए, ठेकेदार उठा रहे लाभ, नहीं मिल रही उचित कीमत
संतोष देवी ने कहा कि चटाई बनने के बाद में दो सौ से तीन रुपये में ठेकेदार खरीदकर ले जाते हैं। जिसके बाद आगे कंपनी और अन्य संस्थाओं में वहीं माल ठेकेदारों या बिचौलियों द्वारा सात से आठ सौ रुपये में बेच दिया जाता है। लोकल स्तर पर अधिक दाम नहीं मिलता जबकि ऊपर जाकर वही माल महंगे दामों में बेचा जाता है। संतोष देवी ने कहा कि सरकार को कुछ इस तरह की योजनाएं लानी चाहिए जिसमें चटाई निर्माता को एक निश्चित मू्ल्य मिल सके। उन्होंने कहा कि सरकार हस्तशिल्प को बढ़ावा दे रही है, लेकिन बिचौलियों और ठेकेदारों का वर्चस्व खत्म होना चाहिए, ताकि निर्माता अपना माल सीधे ग्राहकों को बेच सकें। 
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संतोष देवी - फोटो : अमर उजाला
कच्चा माल भी बाहर से मंगाना पड़ रहा
संतोष देवी ने बताया कि गंगा के खादर क्षेत्र में पहले आबादी काफी कम थी, अधिकांश स्थानों पर बंजर भूमि थी। तराई क्षेत्र में चटाई बनाने से संबंधित कच्चा माल (पटेरा) पहले आसानी से उपलब्ध हो जाता था। क्षेत्र में ही पैदा होने के चलते कच्चे माल के दाम भी काफी कम थे। लेकिन अब अधिकांश क्षेत्र में खेती होने लगी है, जिसके चलते पटेरा उगना बंद हो गया है। अब कच्चा माल बाहर से मंगाना पड़ता है, जिससे लागत भी अधिक हो जाती है।
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