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Harish Rana Died: 'उसने लंबी जंग लड़ी और हर जंग का एक अंत होता है'; हरीश ने अपने परिवार को बना दिया योद्धा

Thu, 26 Mar 2026 01:58 PM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद

सार

सोसायटी के लोगों ने कहा कि हरीश राणा ने अपने परिवार को 13 वर्षों की जंग लड़ाकर योद्धा बना दिया। हरीश राणा की अंतिम विदाई में हर आंख नम हो गई। लोगों को भावुक होता देख हरीश के पिता अशोक ने खुद के साथ सभी को संभाला।
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दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह पर हरीश राणा का अंतिम संस्कार हुआ - फोटो : अमर उजाला
किसी भी पिता के लिए पुत्र की अंत्येष्टि करना जीवन का सबसे असहनीय और टूटकर बिखेर देने वाला अनुभव होता है। हरीश राणा की अंतिम विदाई में शामिल हर चेहरा इस दर्द का साक्षी था। आंखें नम थीं, गला रुंधा हुआ था, लेकिन सबसे ज्यादा मजबूत दिखने की कोशिश कर रहे थे पिता अशोक राणा।

राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज एंपायर सोसायटी में अशोक राणा के पड़ोस में रहने वाले तेजस भी हरीश की अंतिम यात्रा में शामिल हुए। उन्होंने बताया कि यह सिर्फ एक अंतिम संस्कार नहीं था, बल्कि 13 वर्षों तक चली एक मौन पीड़ा, संघर्ष और उम्मीदों की कहानी का अंतिम पड़ाव था। 
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दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह पर हरीश राणा का अंतिम संस्कार हुआ - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित अंत्येष्टि स्थल पर बुधवार सुबह जब लोग जुटने लगे तो माहौल शोक में डूबता चला गया। भीड़ के बीच खड़े अशोक राणा ने लोगों को भावुक होते देखा तो खुद को संभालते हुए बोले 'संयम रखिए, भावुक मत होइए, उसने लंबी जंग लड़ी है, हर जंग का एक अंत होता है। हरीश को हमेशा मिसाल के रूप में याद किया जाएगा।'
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दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह पर हरीश राणा का अंतिम संस्कार हुआ - फोटो : अमर उजाला
यह कहते हुए उनकी आवाज भले स्थिर थी, लेकिन भीतर का दर्द साफ महसूस किया जा सकता था। तेजस ने बताया कि अशोक के ये शब्द सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। अंत्येष्टि स्थल तक जाते समय पूरे रास्ते में हरीश और उनके माता-पिता के संघर्ष की ही चर्चा होती रही कि कैसे एक बेटा 13 साल तक दर्द से लड़ता रहा और कैसे उसके माता-पिता ने हर दिन एक नई उम्मीद के साथ जिया।

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दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह पर हरीश राणा का अंतिम संस्कार हुआ - फोटो : अमर उजाला
करीब 50 से 60 लोग सोसायटी से वहां पहुंचे थे। उस भीड़ में हर व्यक्ति खुद को हरीश के परिवार का हिस्सा महसूस कर रहा था। विदाई के उस पल में दर्द और राहत का मिला-जुला अहसास था। राहत इस बात की कि अब हरीश को तकलीफों से मुक्ति मिल गई है।

 
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Harish Rana Case - फोटो : वीडियो ग्रैब
कानून के पन्नों में भी रहेंगे जिंदा
हरीश राणा की यह कहानी सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि साहस, धैर्य और मानवीय गरिमा की मिसाल बन गई है। सोसायटी के लोगों का मानना है कि हरीश अब सिर्फ यादों में ही नहीं, बल्कि कानून के पन्नों में भी जिंदा रहेंगे। आने वाले समय में जब भी इस तरह के मामलों पर अदालतों में बहस होगी तो हरीश का नाम संदर्भ के रूप में लिया जाएगा।
 
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हरीश राणा की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सोसायटी के लोग बोले- परिवार के दर्द, हिम्मत और संघर्ष को नहीं किया जा सकता बयां
हरीश राणा के अंतिम संस्कार से लौटे सोसायटी निवासियों का कहना है कि अशोक राणा और उनके परिवार के दर्द, हिम्मत और संघर्ष को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि हरीश ने अपने परिवार के लोगों को 13 वर्षों की जंग और संघर्ष के दौरान योद्धा बना दिया। इस साहस ने माता पिता के लिए संतान की अहमियत पूरे देश को दिखा दी।
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बेटे हरीश के साथ माता-पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बुधवार सुबह करीब 10 बजे हरीश राणा पंचतत्व में विलीन हो गए। राज इंपायर सोसायटी निवासी सचिन ने बताया कि सोसायटी में सुबह से ही लोग एक-दूसरे से अंतिम संस्कार स्थल जाने की जानकारी ले रहे थे। लोग सुबह आठ बजे तक रवाना हुए और करीब साढ़े नौ बजे स्थल पर पहुंचे।

 

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हरीश के पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इस दौरान अंत्येष्टि स्थल पर अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही थीं। हरीश का पार्थिव शरीर पहले ही लाया जा चुका था। माता-पिता ने 13 वर्षों तक बेटे के लिए संघर्ष किया। हर मुश्किल का सामना किया और उम्मीद बनाए रखी कि एक दिन हरीश भी अन्य बच्चों की तरह अपने पैरों पर खड़े होंगे व दौड़ेंगे। इस लंबी लड़ाई ने परिवार को भी योद्धा बना दिया।

 

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बेटे हरीश के साथ मां - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
छोटे भाई ने दी मुखाग्नि
सोसायटी निवासियों ने बताया कि हरीश राणा को छोटे भाई आशीष ने दर्द भरी आंखों के साथ मुखाग्नि दी। मुखाग्नि देते समय आशीष का दर्द आंसुओं में तब्दील होकर आंखों से छलक पड़ा। पिता अशोक और सोसायटी निवासियों व रिश्तेदारों ने उनको ढांढस बंधाया।
 

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हरीश राणा की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यह है मामला
जुलाई 2010 में हरीश ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। वर्ष 2013 में वह अंतिम वर्ष के छात्र थे। इसी दौरान अगस्त 2013 में रक्षाबंधन वाले दिन बहन से मोबाइल फोन पर बात करते हुए पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे।

 

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हरीश राणा और उसके पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गंभीर रूप से घायल हरीश को तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। बाद में दिसंबर 2013 में उसे दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि वह क्वाड्रिप्लेजिया से ग्रसित है। इस स्थिति में उसके हाथ-पैर पूरी तरह निष्क्रिय हो गए और वह जीवन भर बिस्तर पर रहने को मजबूर हो गए।
 
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हरीश राणा के पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हरीश के असहनीय दर्द और शारीरिक अक्षमता के कारण माता-पिता ने दिल्ली हाईकोर्ट में इच्छामृत्यु की अपील की, जिसे 8 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। करीब आठ महीने बाद 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दे दी थी। 24 मार्च को हरीश की मौत हो गई।

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