उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के साहिबाबाद के लिंक रोड थाना अंतर्गत साइट चार स्थित मेडिकल उपकरण बनाने की फैक्टरी में गुरुवार रात धमाके के साथ भीषण आग लग गई। साइट चार की फैक्टरी में काम करने वाले सैफुल रात करीब नौ बजे घर जाने के लिए छुट्टी के बाद गेट पर ही पहुंचे थे, इसी दौरान धमाके के बाद आग लग गई। चंद मिनटों में आग फैल गई। वह और उनके तीन चचेरे भाई भी आग में झुलस गए।
मूलरूप से असम के रहने वाले सैफुल यहां लिंकरोड के महाराजपुर में किराए के मकान में बुआ के बेटे रकीबुल, चाचा के बेटे राशिद और जीजा के भतीजे सद्दाम के साथ रहते हैं। चारों साइट चार की इसी फैक्टरी में नौकरी करते हैं। सैफुल टेप बनाने का काम करता है। सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सैफुल ने फोन पर बताया कि वह बृहस्पतिवार रात करीब नौ बजे छुट्टी के बाद घर जाने के लिए गेट पर खड़े होकर बुआ के बेटे रकीबुल का इंतजार कर रहे थे।
इस दौरान रकीबुल मालिक कुनाल से बात कर रहा था। मालिक रात में रकीबुल और विश्वनाथ की नाइट ड्यूटी लगा रहे थे। उन्हें रात में खाना खाने का लिए 120 रूपये भी दिए थे। इसी बीच तेज धमाके के साथ वहां आग लग गई। सैफुल ने बताया कि वह और रकीबुल पीछे से झुलस गए। राशिद और सद्दाम भी झुलस गए। सैफुल का कहना है कि सद्दाम की हालत गंभीर बनी हुई है।
उन्होंने अभी तक परिजनों को घटना की जानकारी नहीं दी है। जांच में सामने आया है कि मोहित और उनके ताऊ का बेटा विश्वनाथ एक ही फैक्टरी में काम करते हैं। दोनों झुलस गए हैं। दोनों का इलाज चल रहा है।
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मेडिकल उपकरण बनाने वाली फैक्टरी में आग
- फोटो : अमर उजाला
दोपहर तक उठ रहा था धुआं
फैक्टरी में दूसरे दिन भी आग पूरी तरह बुझी नहीं थी। कंपनी में मशीन और जले कागज व अन्य सामान से शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे तक धुआं उठ रहा था। दोपहर करीब सवा 12 बजे दमकल विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और सुलग रही आग को बुझाया।
मेडिकल उपकरण बनाने वाली फैक्टरी में आग
- फोटो : अमर उजाला
फैक्टरी में अवैध रूप से बनाए जा रहे थे मेडिकल उत्पाद
साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र के भूखंड संख्या 12/71 पर जिस फैक्टरी में आग लगी, उसमें अवैध रूप से मेडिकल उत्पाद बनाए जा रहे थे। वर्ष 2006 में फैक्टरी में इलेक्ट्रिकल उत्पाद बनाने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) से स्वीकृति ली गई थी, लेकिन लॉकडाउन के दौरान मोटे मुनाफे के चक्कर में इसमें पीपीई किट और मास्क बनाए जाने लगे। जबकि इसके लिए यूपीसीडा व अन्य विभागों से अनुमति नहीं ली गई थी। दमकल विभाग के मुख्य अधिकारी सुनील कुमार भी मानते हैं कि फैक्टरी में आग से बचने के पर्याप्त साधन मौजूद नहीं थे।