ट्रकों में लदे किसानों के सामान
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जीत तय थी
हमारी जीत पहले दिन से ही तय थी, बस सरकार को समझने में वक्त लगा। हमें खुशी है कि देर से ही सही सरकार और आम जनता सबको समझ आ गया कि यह आंदोलन प्रायोजित नहीं था बल्कि यहां किसान बैठे थे। अब मांगे मान ली गई हैं तो हम 11 दिसंबर से घर वापस लौटेंगे।-गौरव टिकैत, भाकियू युवा का राष्ट्रीय अध्यक्ष
देश की जनता ने सब देखा, वही सवाल करे
घर वापसी हो रही है इसकी खुशी है, लेकिन गम इस बात का है कि अपने जीवन में ऐसी सरकार नहीं देखी जिसने अन्नदाताओं को साल भर से अधिक सड़क पर बैठा दिया। हम भी पिछले 35 वर्षों से किसानों की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं। दस से पंद्रह दिन लगते थे किसी भी सरकार ने इतना लंबा नहीं बैठाया। देश की जनता ने यह सब देखा है, वही अब सवाल करेगी।- चौधरी बिजेंद्र सिंह, भाकियू गाजियाबाद जिलाध्यक्ष