वायु प्रदूषण
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मौसमी परिस्थितियों की वजह से इस साल कम होगा प्रदूषण का प्रभाव
सफर के मुताबिक, बीते वर्ष के मुकाबले इस साल अक्तूबर और नवंबर में प्रदूषण का कम प्रभाव देखने को मिल सकता है। इसके लिए मौसमी परिस्थितियां प्रमुख रूप से जिम्मेदार हैं। सफर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल मानसून की विदाई तय समय से देरी से हुई है। साथ ही मानसून बीतने के बाद अभी वातावरण में गर्मी बरकरार है। इस बार दिवाली भी अक्तूबर में है और एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन बन रहा है। इन सभी परिस्थितियों की वजह से हवा की सेहत धीरे-धीरे बिगड़ेगी। ऐसे में अक्तूबर के अंत तक प्रदूषण का अधिक धुआं नहीं होने की संभावना है। वहीं, यदि इस बार अक्तूबर के अंत तक पराली जलाने की घटनाएं चरम पर पहुंचती हैं और पराली जलाने की घटनाएं आधी रह जाती हैं तो गंभीर श्रेणी वाला दिन रिकॉर्ड होने की संभावना भी कम है। ऐसे में हवा की गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में ही दर्ज की जा सकती है।