दिल्ली के करोल बाग इलाके में बुधवार सुबह हुए हादसे में भले ही करोड़ों रुपये नुकसान हुआ है, लेकिन इसमें किसी के भी जीवन को क्षति नहीं पहुंची है। वहां मौजूद लोगों का कहना था कि हादसा सुबह 10 बजे के बाद होता तो शायद इसमें कई लोगों की जान चली जाती। दस बजे के बाद ग्राउंड फ्लोर पर बनी दुकानें खुलने लगती थीं। ऊपर फैक्टरी और बूटीक में भी कारीगर पहुंच जाते थे। एक समय में इमारत में लगभग 80 लोग मौजूद होते थे। इस इमारत में काम करने वाले इसे अपनी खुशकिस्मती ही समझ रहे हैं। बिल्डिंग गिरते समय वहां की सड़क भी लगभग खाली ही थी। अमूमन दिन में वहां भी भीड़ होती है।
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- फोटो : अमर उजाला
पान की दुकान चलाने वाले हीरालाल चौरसिया ने बताया कि ग्राउंड फ्लोर पर बनी सभी आठ दुकानों में 40 से अधिक लोग रहते थे। करीब इतने ही लोग बुटीक व शर्ट की फैक्टरी में काम करते हैं। एक समय में इमारत में 80 लोग होते हैं। दिन में सड़क पर भी भीड़भाड़ शुरू हो जाती है। इमारत गिरने के समय सभी फैक्टरी और दुकानें बंद थीं। ऐसे में लोगों की जान बच गई। शर्ट फैक्टरी में काम करने वाले मुकेश ने बताया कि उनका मालिक तीसरी और चौथी मंजिल का सौदा करने की तैयारी कर रहा था।
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- फोटो : अमर उजाला
मंगलवार को इस संबंध में पार्टी से मीटिंग भी हुई थी। शायद मालिक को पता था कि बिल्डिंग खतरनाक है। इसीलिए उसकी सौदेबाजी चल रही थी। पड़ोसी सुनील ने बताया किे रात करीब 9 बजे अचानक एक झटका लगा था। उन्हें अहसास भी नहीं हुआ कि यह झटका पड़ोस की बिल्डिंग के खिसकने का है।
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सुबह करीब 8:30 बजे उन्हें लगा, जैसे भूकंप आ गया है। उन्होंने खिड़की से झांककर देखा तो पता चला कि ठीक बराबर वाली बिल्डिंग गिर गई है। पुलिस ने एहतियात के तौर पर आसपास की आधा दर्जन से अधिक इमारतों को खाली करा लिया। सुनील का कहना है कि एमसीडी ने समय पर कार्रवाई की होती तो शायद इमारत नहीं गिरती।
एक पड़ोसी बिल्डर ने बताया कि ग्राउंड फ्लोर पर दुकान चलाने वाले एक बुजुर्ग ने जब देखा कि इमारत एक ओर झुकने लगी है तो उन्होंने उससे संपर्क कर इमारत को ठीक करने का उपाय पूछा था। बिल्डर ने उस समय इमारत में बाहर से पिलर बनाकर उसे रोकने का उपाय बताया था। बुजुर्ग ने बिल्डिंग और बाकी दुकानों के मालिकों से उसे ठीक कराने के लिए आर्थिक योगदान के लिए कहा था। रुपये इकट्ठे नहीं होने के कारण इमारत की मरम्मत नहीं हो पाई और बिल्डिंग सड़क की ओर झुकती चली गई। इसके बाद पड़ोसी और हादसे वाली बिल्डिंग के बीच आठ से 10 इंच का फासला बढ़ता चला गया।