हादसे के बाद मेट्रो अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही सामने आई है। मेट्रो अस्पताल प्रबंधन ने वर्ष 2017 से अग्निशमन विभाग से लाइसेंस ही रिन्यू नहीं कराया था। जबकि यह नवीनीकरण हर वर्ष कराना अनिवार्य होता है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि जांच में यह पता चला है कि वर्ष 2017 के बाद से लाइसेंस रिन्यू नहीं कराया गया है। इसके लिए अस्पताल प्रबंधन को नोटिस भेजा जाएगा।
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metro hospital fire
- फोटो : लाल सिंह
वहीं, अस्पताल में स्मोक प्रेशराइज सिस्टम भी नहीं था। अगर लग जाए तो इसे खोल देने पर धुआं आसानी से बाहर निकलता है। इससे दम घुटने से लोग बच सकते हैं। अगर अस्पताल में यह सिस्टम होता तो आसानी से बचाव हो सकता था। विभाग सभी पहलुओं पर जांच कर रहा है। इसके अलावा हौजपाइप को देखा जाएगा। बड़ी इमारतों में हौज पाइप लगा होता है। आग लगने की घटना के बाद दमकल हौजपाइप को दमकल से जोड़ती है, लेकिन अधिकतर इमारतों में हौज पाइप का रखरखाव ठीक नहीं है। मेट्रो अस्पताल में भी आग से बचाव के उपकरण बेकार ही थे। उधर, प्राधिकरण में अस्पताल में लगी आग के लिए सेक्टर-5 की पानी की टंकी से फायर टैंकरों को पानी उपलब्ध कराना पड़ा।
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- फोटो : लाल सिंह
फायर सिलेंडर से तोड़ रहे थे शीशा
मेट्रो अस्पताल के अंदर फायर फाइटिंग सिस्टम अच्छे से काम नहीं कर रहा था। अग्निशमन विभाग इसकी जांच कर रहा है। इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन को नोटिस दिया जाएगा। प्रत्यक्षदर्शियों ंके मुताबिक अस्पताल के अंदर फायर सिलेंडर खाली पड़े थे। अस्पताल में फंसे लोगों इन खाली सिलेंडरों से अस्पताल के शीशे तोड़े। अन्य अग्निशमन उपकरण भी काम नहीं कर रहे थे।
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- फोटो : अमर उजाला
90 फीसदी औद्योगिक इमारतें भी असुरक्षित
नोएडा की औद्योगिक इकाइयों में अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन में लापरवाही बरती जा रही है। नोएडा की कंपनियों में अग्निसुरक्षा उपायों की जांच शुरू की गई। अग्निशमन विभाग की मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़ व नोएडा की टीमें लगातार नोएडा की कंपनियों व फैक्ट्री की जांच कर रही हैं। इसमें अधिकतर औद्योगिक इकाईयों में खामियां मिल रही हैं। इन्हें विभाग नोटिस भेजेगा।
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- फोटो : लाल सिंह
आग लगने के हुए बड़े मामले
13 जनवरी 2018 - सेक्टर-9 स्थित लकड़ी के गोदाम में लगी आग। 20 घंटे बाद अग्निशमन विभाग ने किया काबू।
06 सितंबर 2017 - सेक्टर-68 स्थित हल्दीराम की फैक्ट्री में लगी आग। तीन दिन बाद काबू को काबू करने में मिली सफलता। एक माह बाद मलबे में मिला एक कर्मचारी का शव।
18 मई 2017- सेक्टर-18 स्थित मैकडोनाल्ड रेस्टोरेंट में लगी आग। नजदीक के इंडसइंड एटीएम से शुरू हुई थी आग।
17 मई 2017 - ग्रेटर नोएडा ईको टेक स्थित फोम फैक्ट्री में लगी आग। दूसरे दिन पाया जा सका काबू।
10 मई 2017 - ग्रेटर नोएडा स्थि ईपैक कंपनी में भयंकर आग लगने से मची अफरातफरी।
19 अप्रैल 2017 - सेक्टर-11 की तीन मंजिला एक्सेल ग्रीन टेक कंपनी में आग से मालिक व युवती समेत छह की मौत।
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शहर में यह हैं संसाधन
हाइड्रोलिक प्लेटफार्म 32 मीटर ऊंचा 3
हाइड्रोलिक प्लेटफार्म 42 मीटर ऊंचा 1
वाटर कैनल 1
ब्राउजर 11 हजार लीटर 4
ब्राउजर15 हजार लीटर) 5
फोम टेंडर 4
फायरटेंडर 12
फायर स्टेशन 9
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तीन वर्ष में हुए अग्निकांड
वर्ष हादसे नुकसान
2017 618 54 करोड़
2016 1359 70.98 करोड़
2015 1000 54 करोड़
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अफरातफरी के बीच कूदने का भी किया प्रयास
धुआं भरने से घुटन होने लगी। इसके बाद तीसरी मंजिल से कई लोग रस्सी के सहारे नीचे कूदने लगे। कई लोगों ने ऊपर से छलांग लगाने का प्रयास किया, लेकिन नीचे खड़े लोगाें ने उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया। बाद में ऐसे लोगों को बचाव दल अपने साथ नीचे लेकर आया।
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19 अप्रैल को सबसे भयानक हादसा
19 अप्रैल को सेक्टर-11 स्थित एलईडी बल्ब बनाने की कंपनी एक्सेल ग्रीनटेक में सबसे भयानक हादसा हुआ था। चौथी मंजिल पर आग लगने से 6 लोग जिंदा जल गए थे। हादसे में कंपनी का एक निदेशक व एचआर हेड की भी जान चली गई। पूरी इमारत खाक हो गई थी। इसके बाद 9 मई को सेक्टर-63 में खिलौना बनाने की कंपनी नियो क्राफ्ट इंपेक्स में भीषण आग लगने से 450 लोग फंस गए थे, लेकिन सभी सकुशल निकल गए। हादसे में एक दमकलकर्मी समेत पांच लोग घायल हो गए थे। जबकि पूरी कंपनी जलकर खाक हो गई थी।
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गैस पाइप लाइन में लगती आग, तो होता बड़ा हादसा
मेट्रो अस्पताल के अंदर पीछे से आईजीएल की गैस पाइप लाइन गई है। अगर आग पाइप लाइन तक पहुंच जाती तो बड़ी तबाही होती। सबसे पहले अस्पताल के अंदर ही भयानक विस्फोट व हादसा होता। इसका असर पीछे की मार्केट में भी होता। अस्पताल के पीछे की मार्केट में काफी भीड़ होती है। हादसे के वक्त भी काफी संख्या में लोग मौजूद थे।
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डीजल तक पहुंचती आग तो होता धमाका
अस्पताल में जेनरेटर चलाने के लिए सैकड़ों लीटर डीजल रखा हुआ था। आग की लपटें अगर डीजल के ड्रम तक पहुंच जाती तो धमाका हो जाता। इससे कई लोगों की जान भी जा सकती थी। आग लगने के बाद अग्निशमन अधिकारियों को इस पर नजर पड़ी तो ड्रम हटाने का काम शुरू हो गया। समय रहते ही डीजल को हटा लिया गया।
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सेक्टर-12 स्थित जिस मेट्रो हार्ट अस्पताल में आग लगी थी। वहां केवल हार्ट के मरीज भर्ती थे या बृहस्पतिवार को दिखाने आए थे। आग लगने के बाद अस्पताल परिसर में अफरातफरी मची थी, लेकिन सभी मरीजों को सुरक्षित निकाल लिया गया।
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दरअसल, आग लगते ही मौके पर पुलिस व अग्निशमन अधिकारी पहुंच गए और सबसे पहले रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। इसके लिए बाहर का ट्रैफिक रोक दिया गया और सेक्टर-12 मेट्रो अस्पताल से सेक्टर-11 मेट्रो अस्पताल तक पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाया। पुलिस व दमकल कर्मियों ने मरीजों को कॉरिडोर से तुरंत ही सेक्टर-11 में शिफ्ट कर दिया। वहीं, कुछ मरीजों ंको दूसरे अस्पताल भी ले जाया गया। अस्पताल में दो सीढ़ियां हैं। इससे बचाव कार्य के दौरान काफी मदद मिली। एक सीढ़ी अस्पताल के सबसे किनारे की तरफ है। इससे ही अधिकतर मरीजों को नीचे उतारा गया। यह सीढ़ी काफी चौड़ी थी।
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ढाई घंटे तक ट्रैफिक डायवर्जन
आग लगने की घटना के बाद मेट्रो अस्पताल के आसपास के ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया गया। 12 बजे से लेकर ढाई बजे तक सेक्टर-120 11, 22 व इसके आसपास की तरफ से मेट्रो अस्पताल व मदर डेयरी जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया गया। इससे हरिदर्शन और 12-22 में कुछ देर तक जाम भी लग गया। बचाव कार्य पूरा होने के बाद करीब ढाई बजे डायवर्जन हटा लिया गया।
मीटिंग में जा रहे पुलिस पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे
बृहस्पतिवार को एसपी सिटी सुधा सिंह कोतवालाें के साथ बैठक करने वाली थीं। इस कारण पुलिस अधिकारी रास्ते में थे। आग की सूचना के बाद अधिकारियों को मौके पर भेज दिया गया। इन पुलिस अधिकारियाें ने सबसे पहले ट्रैफिक को रोका और अस्पताल में घुसकर अफरातफरी से फैला डर का माहौल कम किया। इसका असर हुआ कि किसी ने अस्पताल के ऊपर से बचने के चक्कर में छलांग नहीं लगाई।