नोएडा सेक्टर-11 स्थित एक इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी में भीषण आग लगने से बुधवार को महिला अधिकारी सहित छह लोगों की मौत हो गई। इनमें से महिला अधिकारी समेत चार लोगों की पहचान उनकी अंगूठी और कड़े आदि से कर ली गई। बुरी तरह जलने से दो शव की पहचान नहीं हो सकी है। एक्सेल कंपनी में जिस वक्त आग लगी अकाउंटेंट पवन चौथी मंजिल पर मौजूद था। मूलरूप से मैनपुरी निवासी पवन खोड़ा में परिवार के साथ किराये पर रहता है। आग से बचने के चक्कर में कूदने पर पवन की रीढ़ की हड्डी टूट गई है।
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- फोटो : राजन राय
उसे मेट्रो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूचना पाकर उसके पिता महेश सिंह भी मेट्रो अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने बेटे से बातचीत के आधार पर बताया कि जिस वक्त कंपनी में आग लगी, वह चौथी मंजिल पर था।
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- फोटो : राजन राय
आग से बचने के लिए उसने पहले खुद को बाथरूम में बंद कर लिया। थोड़ी देर में बाथरूम में उसका दम घुटने लगा। उसने दरवाजा खोला तो ऑफिस में हर जगह आग लगी थी। इससे वह बहुत डर गया।
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- फोटो : राजन राय
पवन ने जान बचाने के लिए चौथी मंजिल से छलांग लगा दी। इससे उसकी रीढ़ की हड्डी और बाएं पैर की हड्डी टूट गई है। पवन के अलावा लगभग आधा दर्जन और कर्मचारी आग से बचने के चक्कर में घायल हो गए। इन लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।
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- फोटो : राजन राय
एक घंटे की देरी से पहुंची दमकल: कंपनी के कर्मचारियों का आरोप है कि दमकल की गाड़ियां सूचना मिलने के बाद एक घंटे की देरी से मौके पर पहुंचीं। इसके बाद भी हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म आने में काफी देर हो गई। इस वजह से आग को समय रहते काबू नहीं किया जा सका।
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- फोटो : राजन राय
कंपनी कर्मचारियों का आरोप है कि काफी देर तक अग्निशमन विभाग का नंबर मिला ही नहीं। आग बुझाने के लिए मौके पर पहुंचे 32 मीटर के हाइड्रोलिक प्लेफॉर्म का हौज पाइप बचाव कार्य के दौरान टूटकर निकल गया।
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- फोटो : राजन राय
अग्निशमन कर्मियों ने उसे दुरुस्त करने का प्रयास भी किया, लेकिन हौज पाइप नहीं जुड़ा। जिसके बाद इस हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म को बंद कर दिया गया। तब तक 42 मीटर ऊंचाई का दूसरा हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म मौके पर पहुंच गया था। अग्निशमन कर्मियों को मजबूरी में एक ही हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म और स्टील की लंबी सीढ़ियों की मदद से राहत व बचाव कार्य करना पड़ा।
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छह माह पहले खुली थी कंपनी: इन इंडिया योजना के तहत एक्सेल ग्रीनटेक कंपनी लगभग छह माह पहले खुली थी। ये हांगकांग की एक कंपनी का भारतीय वेंचर है, जिसे एक्सेल कंपनी के सहयोग से नोएडा में खोला गया था। नोएडा के सेक्टर-दो में भी इनकी एक यूनिट बताई जा रही है।
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15 साल पहले भी 9 लोग जिंदा जल गए थे: शहर में 15 साल पहले सेक्टर-44 की झुग्गियों सवेरे उस समय आग लग गई थी, जिस वक्त लोग काम पर जा चुके थे और महिलाएं भी बच्चों को छोड़कर घरेलू काम के लिए निकली थीं। उस वक्त 9 लोग जिंदा जलकर मर गए थे। एक मां की गोद में बच्चा मरा मिला था। ज्यादातर बच्चे ही आग का शिकार हुए थे। हजारों झुग्गियां जल कर राख हो गई थी।
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- फोटो : राजन राय
बचाने के चक्कर में दो भाइयों की मौत: करीब डेढ़ दशक पूर्व सेक्टर-16 में लगी झुग्गी की आग में दो सगे भाई मौत के मुंह में समा गए थे। आग लगने के दौरान छोटा भाई झुग्गी में सो रहा था। उसी दौरान आग गई। बड़ा भाई आग की परवाह किए बिना झुग्गी में घुसकर छोटे भाई को बचाने गया तो जलती झुग्गी उसके ऊपर गिर गई और दोनों भाई जिंदा चल गए थे। एक दूसरे से चिपके बच्चे मिले थे।
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- फोटो : राजन राय
हर साल फैक्टरियों और झुग्गियों में लगती है आग: हालांकि नोएडा में हर साल कई झुग्गियां जलकर राख हो जाती हैं और फैक्टरियों में भी आग लगती रहती हैं। लेकिन 15 साल पहले सेक्टर-44 की झुग्गी में 9 की मौत और बुधवार को सेक्टर-11 की फैक्टरी में 6 जिंदा लगने की घटनाएं भयावह हैं।
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- फोटो : राजन राय
छत का गेट बंद होने से बचने का मौका नहीं मिला: कंपनी में आग के बीच फंसे कर्मचारियों व अधिकारियों के पास बचने का कोई मौका नहीं था। कंपनी की छत के गेट पर ताला लगा था। इस वजह से आग में फंसे लोग छत पर खुली हवा में भी नहीं जा सकते थे। कंपनी में गत्तों के ढेर की वजह से बार-बार आग भड़क रही थी। इससे राहत व बचाव कार्य में छह घंटे का वक्त लग गया। वहीं, कंपनी के पीछे वाली इमारत में आग लग गई थी जिसे समय रहते बुझा दिया गया।
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- फोटो : राजन राय
अग्निशमन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर अमन शर्मा ने बताया कि कंपनी के छत पर जाने का रास्ता बंद था। छत पर जाने वाले गेट में ताला लगा था। आग कंपनी की दूसरी मंजिल में लगी थी। थोड़ी देर में ही आग ने पूरी चार मंजिला बिल्डिंग और बेसमेंट को अपनी चपेट में ले लिया। ऐसे में चौथी मंजिल पर फंसे छह लोगों को बचने का मौका नहीं मिला।
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- फोटो : Amar Ujala
अगर छत का गेट खुला होता तो कर्मचारी छत पर भागकर खुली हवा में जान बचा सकते थे। ऐसे में उन्हें हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म के जरिये बचा पाना भी आसान होता। आग और धुएं से घिरी बिल्डिंग के बीच फंसे लोगों को निकाल पाना संभव नहीं था। आग लगने की वजह और कंपनी में मौजूद अग्निशमन के इंतजाम की जांच की जाएगी।
सीएफओ हापुड़ अनिमेष सिंह और गाजियाबाद के सीएफओ एआर शर्मा ने बताया कि कंपनी के प्रत्येक तल पर भारी मात्रा में गत्तों का ढेर रखा था। इस वजह से बार-बार आग भड़क जा रही थी। आग थोड़ी नियंत्रित होने के बाद अग्निशमन कर्मी ऑक्सीजन सिलेंडर और मास्क पहनकर प्रत्येक तल में घुसे और प्रेशर से गत्तों के ढेर में पानी की बौछार डाली गई। साथ ही, गत्तों के ढेर को हटा-हटाकर भी बुझाया गया। इसके बाद आग काबू हो सकी।