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पांच परिवारों पर टूटा कहर: शव से लिपट मां बोली- भगवान, मेरे लाल को क्यों छीना, सेना में जाना चाहते थे लोकेश-विवेक

Mon, 04 Jul 2022 12:08 AM IST
प्रशांत कुमार प्रवीण बैंसला, पलवल।
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गमगीन परिजन - फोटो : अमर उजाला
परिवार के लिए रोटी कमाने की आस में सेना में नौकरी पाने की इच्छा रखने वाले दो युवा एक बार फिर काल के मुंह में समा गए। रविवार को गांव पेलक में एक साथ दो नौजवान युवाओं के चिताएं जली तो श्मशान घाट में मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। गांव में पांच परिवारों के साथ हुई इतनी बड़ी घटना से हर व्यक्ति गमगीन है। दो युवक जान गवां चुके हैं तथा तीन जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं। आगे चलकर परिवार का सहारा बनने वाले युवाओं के चले जाने पर परिवार के लोग सदमे में हैं। गांव में शव पहुंचने पर युवकों की मां अपने लाल को बार-बार उठने की भगवान से दुहाई देती रही कि मेरे लाल को क्यों छीन लिया। 
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युवकों की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
किसान परिवारों से संबंध रखने वाले युवा कई माह से सेना की भर्ती की तैयारी कर रहे थे। रोजाना जल्दी सुबह उठकर केजीपी जाकर दौड़ लगाते थे तथा वहीं पर कुछ देर कसरत करते थे। केजीपी पर सुजवाड़ी पुल के समीप पेलक, सुजवाड़ी व चिरवाडी गांव के दर्जनों युवक एकत्रित होकर भर्ती की तैयारी करते थे। रविवार को गांव पेलक से लोकेश, विवेक, हरीश, सौरभ, सन्नी व रोहताश सुजवाड़ी पुल के समीप दौड़ लगाने के बाद कसरत कर रहे थे। रोहताश कसरत के बाद केजीपी से नीचे उतर गया। उसी दौरान पलवल की तरफ से आई अल्टो कार ने युवकों को कुचल दिया।  घटना स्थल पर खून से लथपथ टायरों के निशान, युवकों के जूते, कपड़े, टोपी व पानी की बोतल पूरी कहानी बयां कर रही थी। 
 
 
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गमगीन परिजन - फोटो : अमर उजाला
पूरे घर को संभाले हुए था लोकेश
किसान व गरीब परिवार से संबंध रखने वाला लोकेश सेना में नौकरी कर अपने परिवार की स्थिति को सुधारना चाहता था। गांव के ही एक स्वामी विवेकानंद स्कूल से 12वीं कक्षा पास करने के बाद लोकेश सेना में भर्ती के लिए पलवल से कोचिंग ले रहा था। एक भाई व बहन के बाद सबसे छोटा होने के कारण लोकेश परिवार का लाडला था।

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गमगीन परिजन - फोटो : अमर उजाला
बड़ी बहन की करीब चार साल पहले शादी हो चुकी थी, जबकि भाई तोताराम का एक हादसे में पैर टूट जाने के कारण वह अपाहिज हो गया। अपने पिता व माता का स्वास्थ्य ठीक न रहने के कारण घर व खेत का सारा काम लोकेश संभालता था। करीब एक सप्ताह पहले ही मां गीता का पथरी का ऑपरेशन हुआ था। अभी तक उसकी मां के जख्म भी नहीं भरे थे कि समय ने उसे जिंदगी भर न भरने वाला जख्म दे दिया। 

 
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गमगीन परिजन - फोटो : अमर उजाला
रोजगार के साथ देश सेवा का जुनून रखता था विवेक
दो भाइयों में बड़ा होने के कारण विवेक का परिवार के भरण पोषण की चिंता थी, वहीं उसमें देश सेवा का भी जुनून था। पिछले कई सालों से विवेक भर्ती के लिए दौड़ कर रहा था, परंतु 12वीं कक्षा पास करते हुए उसने सेना में जाने का पूरा मन बना लिया। सेना में भर्ती होने के लिए वह रोजाना सुबह और शाम जी तोड़ मेहनत करता था। विवेक के पिता प्रेमराज किसान होने के बावजूद उसकी तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे। विवेक को कोचिंग भी दिलाई जा रही थी। रविवार को जब विवेक का शव घर पहुंचा तो पिता प्रेमराज व मां अनीता के सभी अरमान अधूरे रह गए। वे अपने बेटे के शव से लिपटकर खड़े होने की दुहाई देते रहे। अभी 12वीं कक्षा में हुआ छोटा भाई हिमांशु भी अपने भाई के शव को छोड़ने को तैयार नहीं था। 
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