हरियाणा के झज्जर में जन्मी मनु भाकर तीन वर्ष पहले टोक्यो ओलंपिक में निराशाजनक प्रदर्शन से दुखी थीं। लेकिन पेरिस ओलंपिक में उन्होंने अपनी मेहनत और लगन की दम पर दो कांस्य जीतकर इतिहास रच दिया। स्कूल के दिनों में उन्होंने टेनिस, स्केटिंग और मुक्केबाजी में भी कई पदक जीते। लेकिन इन खेलों में पक्षपात के कारण 14 वर्ष की उम्र में इन्हें छोड़कर निशानेबाजी में कदम रखा। 16 वर्ष में मनु भाकर ने कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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18 फरवरी, 2002 को झज्जर में जन्म लेने वाली मनु भाकर करीब पांच वर्ष पहले सूरज कुंड स्थित इविजा सोसाइटी में अपने परिजनों के साथ रहने लगीं। घर से करणी सिंह शूटिंग रेंज नजदीक होने के कारण वह रोजाना अभ्यास करने जाने लगीं।
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मनु भाकर की मां
- फोटो : अमर उजाला
उनकी मां सुमेधा का कहना है कि 14 साल की उम्र में उन्होंने शूटिंग में अपना कॅरिअर बनाने का फैसला किया, उस समय वर्ष 2016 का रियो ओलंपिक खत्म ही हुआ था। एक हफ्ते के अंदर मनु के पिता रामकिशन ने उन्हें एक बंदूक खरीदकर दी। वह एक ऐसा फैसला था जिसने मनु भाकर को ओलंपियन बना दिया।
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मात्र एक वर्ष के अभ्यास के बाद वर्ष 2017 में राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में मनु भाकर ने ओलंपियन और पूर्व विश्व नंबर-1 हीना सिद्धू को चौंकाते हुए 242.3 के स्कोर के साथ नया रिकॉर्ड बनाया। इसके साथ ही उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल के फाइनल में हीना को हरा दिया। इसी वर्ष उन्होंने एशियन जूनियर चैंपियनशिप में भी रजत पर निशाना साधा।
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मेक्सिको (ग्वाडलजारा) में अंतरराष्ट्रीय खेल शूटिंग महासंघ (आईएसएसएफ) विश्व कप में डेब्यू करते हुए मनु भाकर ने महिला श्रेणी के 10 मीटर एयर पिस्टल के फाइनल में पहुंचने के लिए क्वालिफिकेशन राउंड में जूनियर विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया। इसके साथ ही मात्र 16 वर्ष की आयु में वह आईएसएसएफ विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय बनीं।
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वर्ष 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स (ऑस्ट्रेलिया) में नया रिकॉर्ड बनाते हुए 10 मीटर एयर पिस्टल में स्वर्ण जीता। 2018 में ब्यूनस आयर्स अर्जेंटीना में यूथ ओलंपिक गेम्स में इतिहास रचते हुए मनु 10 मीटर एयर पिस्टल में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय शूटर बनीं। वहीं चीन में विश्व कप फाइनल में मनु भाकर ने व्यक्तिगत और मिश्रित टीम इवेंट दोनों में स्वर्ण जीते।
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2019 में म्यूनिख विश्व कप में चौथे स्थान पर रहीं, इसके साथ ही उन्होंने ओलंपिक में कोटा हासिल किया। मनु ने 2022 काहिरा विश्व चैंपियनशिप में महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल में रजत और हांगझोऊ में 2023 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता।
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मनु भाकर और सरबजोत
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एशियन शूटिंग चैंपियनशिप 2023 में महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में पांचवें स्थान पर रहते हुए भारत के लिए पेरिस 2024 ओलंपिक कोटा हासिल किया। अब पेरिस ओलंपिक में मनु ने दो पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
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मनु भाकर के शूटर बनने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। क्योंकि मनु के माता और पिता बेटी को कुछ और ही बनाना चाहते थे। मां डॉ. सुमेधा भाकर बेटी को डॉक्टर बनाना चाहती थीं। वहीं पिता की ख्वाहिश थी कि बेटी बॉक्सर बने। लेकिन मनु और उनकी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
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मनु भाकर और सरबजोत
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हालांकि मनु ने शूटिंग से पहले अन्य खेलों में भी खुद को आजमाया है। मनु ने बॉक्सिंग, आर्चरी, टेनिस और स्केटिंग की भी प्रैक्टिस की है, लेकिन उन्हें ये सब पसंद नहीं आया और अंत में उन्होंने शूटिंग को चुना।
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मनु भाकर
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बॉक्सिंग में लगी चोट ने बनाया शूटर
पिता रामकिशन भी अपनी बेटी को बॉक्सिंग सिखाने लगे। एक दिन प्रैक्टिस करते हुए मनु की एक आंख में ऐसी चोट लगी कि बुरी तरह सूजन आ गई। चोट लगने के बाद मनु ने बॉक्सिंग छोड़ने का मन बना लिया। इसके बाद मनु ने मार्शल आर्ट, आर्चरी, टेनिस और स्केटिंग की भी प्रैक्टिस की, मेडल भी जीते, लेकिन किसी में मन नहीं लगा। कई खेलों में हाथ आजमाने के बाद मनु ने शूटिंग शुरू की।
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मनु भाकर
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डीयू के लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातक हैं मनु
मनु भाकर ने अपनी स्कूली शिक्षा यूनिवर्सल पब्लिक सेकेंडरी स्कूल से पूरी की है। भाकर ने 2021 में दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति विज्ञान में ऑनर्स डिग्री हासिल की। मनु भाकर इस समय पंजाब यूनिवर्सिटी से लोक प्रशासन में डिग्री हासिल कर रही हैं।
ओलंपिक के लिए मनु ने त्याग दिया सोशल मीडिया
पिता रामकिशन और मां सुमेधा ने बताया कि ओलंपिक विजेता बनने के लिए मनु ने सभी तरह के सोशल मीडिया और टीवी और इंटरटेनमेंट से दूरी बनाकर रखी है। सुमेधा घर में अधिकतर समय टीवी नहीं चलने देती हैं। उन्होंने बताया कि जिस उम्र में बच्चे मस्ती करते हैं उस उम्र में मनु घंटों शूटिंग और अभ्यास में लगी रहती है। उन्होंने कहा कि अब जाकर उसके त्याग और तपस्या का फल मिला है।