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डीयू छात्रा छेड़छाड़ मामलाः बदमाशों ने 32 मिनट फिर तीन घंटे पुलिस ने घुमाया, नहीं पहुंचाया अस्पताल

Fri, 15 Mar 2019 09:33 AM IST
पूजा त्रिपाठी राजीव शर्मा, अमर उजाला, गाजियाबाद

सार

- सीमा विवाद में उलझी विजयनगर पुलिस, तीन घंटे बाद मिली मेडिकल सुविधा
- परिजनों का आरोप छात्रा को कभी नोएडा तो कभी घटना स्थल पर ले गई पुलिस
- घायल होने के बावजूद नहीं पहुंचाया अस्पताल, वीडियो में बयान करती रही रिकार्ड
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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डीयू की छात्रा को ऑटो गैंग ने बंधक बनाकर छेड़छाड़ व लूटपाट के दौरान 32 मिनट तक गाजियाबाद की सड़कों पर घुमाया, लेकिन पुलिस के पास आकर भी उसकी प्रताड़ना खत्म नहीं हुई।

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विजयनगर पुलिस भी उसे करीब तीन घंटे सड़कों पर घुमाती रही। बदमाशों की पिटाई और ऑटो से फेंके जाने से घायल छात्रा को तत्काल मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराने की बजाय पुलिस उसे लेकर कभी नोएडा तो कभी घटनास्थल पर घुमाती रही।

विजयनगर पुलिस कई घंटे तक सीमा विवाद में उलझी रही और मामला इंदिरापुरम थाना क्षेत्र का बताकर परिजनों को टरकाती रही। विजयनगर पुलिस की कोशिश थी कि मामला इंदिरापुरम थाने में ट्रांसफर हो जाए। हालांकि परिजनों के दबाव के बाद विजयनगर पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करनी पड़ी।
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पीड़ित छात्रा के पिता ने बताया कि 12 मार्च की रात करीब 10:10 बजे उनकी बेटी घर जाने के लिए ऑटो में सवार हो गई थी। बदमाश उसे करीब 32 मिनट तक हाइवे पर बंधक बनाकर घुमाते रहे, लेकिन कहीं पुलिस की चेकिंग नहीं थी।

पीड़िता की कटी जीभ, आंख में भी लगी चोट, हो रही देखने-बोलने में परेशानी

रात 10:42 बजे उनकी बेटी बदमाशों के चंगुल से छूटी और मोबाइल से लोकेशन उनके मोबाइल पर भेजी। उन्होंने तत्काल फोन किया तो बदहवास बेटी ने घटना बताई। वह तत्काल बेटी की लोकेशन पर पहुंचे और डायल-100 पर कॉल किया।

पिता के मुताबिक पुलिस की एक गाड़ी के साथ दो पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे, लेकिन विजयनगर थाने जाने की सलाह देकर पल्ला झाड़ लिया। परिजन छात्रा को लेकर विजयनगर थाने पहुंचे तो यहां भी पुलिस का रवैया मदद वाला नहीं था। तमाम पूछताछ के बाद पुलिसकर्मी इंदिरापुरम थाना क्षेत्र की घटना बताकर पल्ला झाड़ने लगे।

छात्रा के पिता ने बताया कि उनकी बेटी की जीभ कट गई थी, सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और आंख में चोट लगने से दिखाई देने में दिक्कत हो रही थी। बावजूद इसके न तो उसे अस्पताल ले जाया गया और न ही रिपोर्ट दर्ज करने के लिए तैयार हुए। छात्रा के ताऊ और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ने विरोध जताया पुलिसकर्मियों ने कार्रवाई शुरू की।
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वीडियो रिकार्ड करते रहे पुलिसकर्मी

छात्रा के पिता ने बताया कि बेटी की हालत गंभीर थी, वह पुलिसकर्मियों से उसे अस्पताल में भर्ती कराने की गुजारिश करते रहे, लेकिन पुलिस वाले उसे कभी नोएडा तो कभी घटना स्थल ले गए। वह घायल छात्रा का वीडियो बनाकर बयान रिकार्ड करते रहे। आरोप है कि गंभीर रूप से घायल बेटी को इलाज की बजाय पुलिसकर्मी खानापूर्ति करते रहे। उनकी मंशा थी कि उन्हें रिपोर्ट दर्ज न करनी पड़े और मामला इंदिरापुरम थाना या नोएडा क्षेत्र का बताकर उन्हें वापस भेज दें। बाद में एसएसपी के आदेश पर विजयनगर थाना पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करनी पड़ी।

इसी अंदाज में महिला डेंटिस्ट से हुई थी लूट
बीती 9 मार्च को ऑटो गैंग ने वैशाली के एक अस्पताल में तैनात महिला डेंटिस्ट को अगवा कर लिया था। बदमाशों ने डेंटिस्ट से लूटपाट के बाद दुष्कर्म की कोशिश की थी। बदमाश उन्हें काफी देर तक हाइवे पर घुमाते रहे और फिर फेंककर भाग गए। महिला डेंटिस्ट घर जाने के लिए ऑटो में सवार हुई थी। यह दूसरी वारदात भी उसी अंदाज पर की गई है। माना जा रहा है कि दोनों वारदातों को एक ही गैंग ने अंजाम दिया है। पुलिस पड़ताल कर रही है।

पुलिस को चुनौती दे रहा ऑटो गैंग
हाइवे पर सक्रिय ऑटो गैंग पुलिस को खुली चुनौती दे रहा है। तीन दिन में दो बड़ी वारदातों को अंजाम देकर गैंग ने गाजियाबाद में हो रही पुलिसिंग की भी पोल खोल दी। एक ही थाना क्षेत्र में दो वारदातों को अंजाम दिए जाने से विजयनगर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। यहां पुलिस न तो पेट्रोलिंग करती दिखाई देती है और न ही बदमाशों पर अंकुश लगाती दिख रही।
घटना की तत्काल रिपोर्ट दर्ज कराकर बदमाशों की तलाश के लिए टीमें लगाई गई है। सीमा विवाद का कोई मामला नहीं है। अगर कोई भी थाना प्रभारी सीमा की बात करता है तो पीड़ित तत्काल उच्चाधिकारियों को फोन करके शिकायत करें। रिपोर्ट तभी दर्ज की जाएगी। बदमाशों के संबंध में काफी सुराग मिले हैं, जल्द ही वारदातों का खुलासा कर लिया जाएगा। अभी तक की जांच से लग रहा है कि दोनों वारदातें एक ही गैंग ने की हैं। - उपेंद्र कुमार अग्रवाल, एसएसपी
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