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छह महीने बाद अस्पताल से घर लौटे डॉ. अजीत, परिजनों की आंखों से छलक पड़े आंसू, ऐसे हुआ स्वागत

Sun, 06 Sep 2020 09:47 AM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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घर पहुंचने पर उतारी गई डॉ. अजीत की आरती - फोटो : अमर उजाला
कोरोना संक्रमण पर बेशक हम अब तक पूरी तरह काबू नहीं पा सके हैं, लेकिन इसपर नियंत्रण पाने और इस महामारी से निपटने में जिन्होंने सबसे अहम भूमिका निभाई है, वो हैं हमारे देश के स्वास्थ्यकर्मी। हम और आप घर बैठे अंदाजा भी नहीं लगा सकते कि एक-एक मरीज की जान बचाने के लिए उन्होंने कैसे-कैसे बलिदान दिए हैं। कई स्वास्थ्यकर्मियों की तो ऐसी कहानी है जिसे सुनकर आपकी आंखें भर आएंगी। आज हम आपको बता रहे हैं एक ऐसे डॉक्टर के बारे में जिन्होंने संकट की इस घड़ी में अपने घर-परिवार को भूलकर खुद को हमारे प्रति समर्पित कर दिया। 
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पिता के स्वागत के लिए उत्साहित बेटी - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली के ताहिरपुर स्थित राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कोविड केयर नोडल अधिकारी के पद पर कार्यरत डॉ. अजीत जैन का घर अस्पताल से महज 13 किलोमीटर दूर है। इसके बावजूद कोरोना मरीजों की सेवा में वो इस कदर जुटे रहे कि शनिवार को करीब छह महीने के बाद डॉ. अजीत अस्पताल से अपने घर लौटे। 
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छह महीने बाद डॉ. अजीत को देख भावुक हो उठे परिजन - फोटो : अमर उजाला
वह अस्पताल में कोरोना के मरीजों की देखभाल का जिम्मा संभालते हैं। ऐसे में अस्पताल के मरीजों की सेवा और परिवार को संक्रमण से बचाने के लिए डॉ. अजीत छह महीने तक लगातार अस्पताल में ही रहे और मरीजों के लिए काम करते रहे। लगातार 170 दिन काम करने के बाद शनिवार को जब वह घर पहुंचे तो उनका सम्मान ऐसे किया गया कि जैसे कोई सैनिक सीमा से जंग जीतकर लौटा हो। उनकी आरती उतारी गई और तिलक लगाया गया। 

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पिता को देखते ही लिपट गई बेटी - फोटो : अमर उजाला
सिर्फ एक बार निकले अस्पताल से बाहर
उन्होंने बताया कि अक्सर उनकी बेटी आरुषि जैन यही पूछा करती थी कि पापा घर कब आओगे। उनके अस्पताल में 17 मार्च को कोरोना के पहले 10 मरीज भर्ती हुए थे। तब से वह सिर्फ एक बार अस्पताल से बाहर निकले। उन्हें 15 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होना था। अप्रैल और मई में काफी मरीज भर्ती होने लगे तो दिन-रात उनकी सेवा में रहना पड़ता था।
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घर पहुंचने पर उतारी गई डॉ. अजीत की आरती - फोटो : अमर उजाला
सिर्फ रात में एक से दो बजे की बीच ही 15 मिनट के लिए अपने परिवार से बात करते थे। इस दौरान अस्पताल को ही उन्होंने अपना घर बना लिया था। स्वस्थ होकर अपने घर लौटे मरीजों से भी वह लगातार संपर्क में हैं। यदि उन्हें कोई परेशानी होती है तो अस्पताल में बनाए गए पोस्ट कोविड केयर क्लीनिक में उनका इलाज किया जाता है। 1500 से ज्यादा मरीजों को छुट्टी दी जा चुकी है। एक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से वह सभी मरीजों के साथ जुड़े रहते हैं। 

केजरीवाल कर चुके हैं सम्मानित
डॉ. जैन के मुताबिक, राजीव गांधी ही एक अस्पताल है, जिसमें सबसे कम मरीजों की मौत हुई। इससे पहले डॉ. जैन को कोरोना काल में बेहतरीन सेवाओं के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ओर से सम्मानित भी किया जा चुका है।
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बेटे और बेटियों को मिठाई खिलाते डॉ. अजीत - फोटो : अमर उजाला
बेटी बोली-परिवार को होने लगी थी चिंता, अब खुश हैं..
डॉ. जैन की बेटी आरुषि और अदिति फरीदाबाद के मानव रचना संस्थान से बीडीएस की पढ़ाई कर रही हैं। बेटा अजिताभ जेईई व नीट परीक्षा की तैयारी कर रहा है। दो दिन पहले ही उसने नीट की परीक्षा दी है। बड़ी बेटी आरुषि बताती हैं कि जब उन्हें पता चला कि उनके पिता को कोविड का नोडल अधिकारी बनाया गया है तो उन्हें लगा कि उनके पिता जल्द ही घर आ जाएंगे, लेकिन दिन बीतते रहे। उन्हें अपने पिता की काफी चिंता होने लगी थी। आरुषि बताती हैं कि पूरे छह महीने एक डर जरूर बना रहा, लेकिन अब वह खुश हैं कि कुछ दिन की छुट्टी लेकर उनके पिता घर आ गए हैं।
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