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Delhi Violence: अमर उजाला के फोटो जर्नलिस्ट का कॉलर पकड़कर बोले, ‘ले चलो इसको अंदर’

Wed, 26 Feb 2020 10:05 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
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delhi violence - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली के जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर अमर उजाला के फोटो जर्नलिस्ट के साथ भीड़ ने बदसलूकी की। उनका कैमरा छीन लिया। प्रदर्शन के फोटो देखे और गंदी गालियां दीं। साथ ही कुछ युवकों ने मेरा कॉलर से पकड़ लिया और कहा, ‘ले चलो इसे अंदर और इसका कैमरा तोड़ दो।’ मेरे लिए इससे ज्यादा खौफनाक मंजर कुछ नहीं हो सकता था।

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delhi violence - फोटो : अमर उजाला
जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर बाइक लगाने के बाद जैसे ही मैं मौजपुर की तरफ बढ़ा तो कुछ लोगों का झुंड चिल्लाते हुए आया और मेरा कैमरा छीन लिया। उन्होंने कैमरे में मेरे खींचे जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे चल रहे प्रदर्शन के फोटो देखे और गंदी गालियां देना शुरू कर दिया। इसके बाद उन्होंने मुझे वहां से जल्दी से भाग जाने को कहा।
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delhi violence - फोटो : अमर उजाला
उनसे कुछ दूर जाने के बाद मैंने कई दुकानों को बंद पड़े देखा। उनका एक फोटो लिया ही था कि पीछे से कुछ युवकों का झुंड आ धमका। गाली देते हुए उन्होंने कहा, ‘क्या खींचा।’ मैंने जवाब दिया कि कुछ नहीं। बस जो यहां दुकानें बंद पड़ी हैं, उनका एक फोटो लिया है। तभी कुछ लोगों ने मुझे कॉलर से पकड़ लिया और कहा, ‘ले चलो इसे अंदर और इसका कैमरा तोड़ दो।’ मेरे लिए इससे ज्यादा खौफनाक मंजर कुछ नहीं हो सकता था।

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delhi violence - फोटो : अमर उजाला
मैं डर के मारे कांप रहा था। मैंने उनसे कहा कि मैं अपनी ड्यूटी कर रहा हूं और अब यहां से निकल भी जाऊंगा। तभी वहां पर पीछे से पुलिस भी आती दिखी। इतनी देर में उग्र प्रदर्शनकारियों ने मेरे कैमरे से मेमोरी कार्ड निकाल लिया और अंदर की गलियों में चले गए। पुलिस वालों ने मुझसे तुरंत उस इलाके से जाने को कहा। मैं अपना कैमरा लेकर बाइक लेने के लिए बढ़ा। अपने पास मौजूद दूसरा मेमोरी कार्ड मैंने कैमरे में लगा लिया। 
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delhi violence - फोटो : एएनआई
आगे मुबारकपुर बाबरपुर मेट्रो स्टेशन के पास गली से और उसके सामने रोड से दोनो पक्षों के बीच पथराव चल रहा था। मेट्रो स्टेशन के ऊपर चढ़ने के लिए सीढ़ियां बनी थीं। उसके ऊपर खड़े होकर मैंने पत्थरबाजी के फोटो लिए। तभी पता लगा कि मौजपुर चौक के 200 मीटर आगे गाड़ियों में आग लगा दी गई है और लोगों के घरों में आगजनी की जा रही है। वहीं खड़ी पुलिस कुछ नहीं कर रही थी। यह देखकर मैंने जैसे ही अपना कैमरा उठाया, वैसे ही पीछे से पीठ पर एक डंडा पड़ा। एक पुलिसवाले ने कहा, ‘रख ले अपना कैमरा, तुड़वाएगा क्या।’
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दिल्ली हिंसा - फोटो : अमर उजाला
हथियारों के जखीरे पर वक्त से पहले शिकंजा क्यों नहीं कस पाई पुलिस
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा बढ़ती जा रही है। उपद्रवियों ने दुकानों, वाहनों और घरों में तोड़फोड़ के बाद धार्मिक स्थलों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। हैरत की बात ये है कि कुछ दिन पहले ही खत्म हुए विधानसभा चुनाव के दौरान निकटवर्ती राज्यों से असलहा लाने पर पाबंदी लगाई गई थी, लेकिन अब उपद्रवी हाथों में तलवार, डंडे और पिस्तौल लेकर सरेआम घूम रहे हैं। 
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violence in delhi - फोटो : अमर उजाला
ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि धीरे-धीरे बाहर निकल रहे हथियारों के जखीरे पर वक्त से पहले शिकंजा क्यों नहीं कस पाई पुलिस। आखिर पुलिस को कैसे नहीं मालूम हो पाया कि इतनी बड़ी हिंसा के लिए हथियार लंबे वक्त से जमा किए हुए हैं। पुलिस ने ऐसे कई घरों से तलवार व अन्य धारदार हथियार बरामद किए हैं, जिनका उपयोग हिंसा फैलाने में किया जा रहा है।
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