उत्तर-पूर्वी दिल्ली में जगह-जगह धुएं के गुबार उठ रहे थे. शोर-शराबे और भीड़ की नारेबाजी के बीच गोलियों और आंसू गैस के गोलों की आवाजें गूंज रही थीं। उपद्रवी ‘मारो-मारो और भागो-भागो’ चिल्ला रहे थे। झुंड बनाकर सड़कों पर जुटे ज्यादातर लोगों के हाथ में बेसबॉल के बैट, लोहे की रॉड, लाठियां, हॉकी और हमले करने की अन्य वस्तुएं मौजूद थीं। पुलिस भीड़ को एक ओर से खदेड़ती तो उपद्रवी दूसरी जगह से आकर बवाल शुरू कर देते।