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सत्य निकेतन में मौत का खेल: खतरनाक घोषित होने के बावजूद इमारत की करवाई जा रही थी मरम्मत, गुरुद्वारे ने बचाई राजेश की जान

Tue, 26 Apr 2022 04:38 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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सत्य निकेतन में इमारत जमींदोज, इनसेट में राजेश की फोटो जिसकी बची जान - फोटो : भूपिंदर सिंह
दिल्ली के साउथ कैंपस थाना क्षेत्र के सत्य निकेतन में भरभराकर ढहने वाली तीन मंजिला इमारत को दक्षिण दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) ने गत मार्च में ही जर्जर घोषित कर दिया था, इसके बावजूद मरम्मत करवाई जा रही थी। इतना  ही नहीं काम करने वाले मजूदर भी इसी इमारत में रहते थे, ताकि उनके जाने पर किसी को पता न चल जाए। 

दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार इमारत में काम करने वाले सभी मजूदर अररिया, बिहार के रहने वाले हैं और ठेकेदार रईस अलाम के रिश्तेदार व गांव वाले हैं। सभी को ठेकेदार करीब दो महीने पहले लेकर आया था। रात में यहीं सोते थे और दिन में पास में ही स्थित दूसरी साइट पर काम करते थे। इमारत बहुत ही जर्जर हालत में थी।
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मजदूर को निकालते एनडीआरएफ के कर्मी - फोटो : भूपिंदर सिंह
दक्षिण नगर निगम ने इस इमारत को 31 मार्च को खतरनाक (डेंजर) घोषित कर दिया था। इसके बाद निगम ने इमारत पर नोटिस चस्पा कर दिया था और मालिक अमृत कौर को नोटिस भी दिया था।
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घायल मजदूर को अस्पताल ले जाते हुए - फोटो : भूपिंदर सिंह
गुरुद्वारा जाने की वजह से बच गया राजेश
 मजूदर राजेश साहनी दोपहर में नानकपुरा स्थित गुरुद्वारे में लंगर खाने चला था। इस कारण वह बच गया था। उसने बताया कि उसे गुरुद्वारे से लौटते वक्त इमारत के ढहने का पता लगा था। तीसरी मंजिल पर उनके रहने का कमरा बना हुआ था। वह एक सप्ताह पहले ही इस इमारत में रहने आया था। उसने बताया कि सीढ़ियों को तोड़कर हॉल से नई सीढ़ियां बनाई जा रही थीं। पहली मंजिल पर हॉल की दीवार को तोड़कर दूसरी दीवार बनाई जा रही थी। दीवार के लिए कॉलम बनाया गया। इमारत के ढहने से पहले वह बदरपुर लेकर आया था।

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सत्य निकेतन में इमारत जमींदोज - फोटो : भूपिंदर सिंह
परिवार में अकेला कमाने वाला था नसीम
नसीम अपने परिवार में अकेला कमाने वाला था।  परिवार में पत्नी रिजवानी के अलावा चार बेटियों व तीन वर्ष का एक बेटा है। नसीम के भाई आजाद ने बताया कि उसकी भाभी गांव में छोटा-मोटा काम करती है। नसीम के दिल्ली आने के बाद भाभी ने काम करना बंद कर दिया था। इसके बाद नसीम घर में अकेला काम करने वाला रह गया था। वह दो महीने पहले ही दिल्ली आया था। हालांकि वह नहीं आना चाहता था, मगर ठेकेदार रईस उसे अतिरिक्त मजदूरी देने का वादा कर  ले आया था।
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घायल मजदूर को ले जाते कर्मी - फोटो : भूपिंदर सिंह
सत्य निकेतन में दो महीने पहले काम शुरू किया था
आजाद ने बताया कि सत्य निकतेन में दो महीने पहले काम करना शुरू किया था। इसके लिए बिहार से मजदूरों को लाया गया था। सभी मजदूर इमारत में ही रहते थे। ताकि अवैध निर्माण की जानकारी लोगों को न लगे। इमरान अपने चाचा नसीम के साथ खाना खाता था। वह कुछ दूरी पर रहता है और मजदूरी करता है। सोमवार दोपहर वह नसीम के पास खाना खाने पहुंचा था तब उसे हादसे की जानकारी हुई। 
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