31 साल पहले के लाठीचार्ज की याद ताजा
तीस हजारी कोर्ट परिसर में शनिवार के बवाल ने 31 साल पहले यहीं हुए वकीलों पर लाठीचार्ज की याद को ताजा कर दिया है। 1988 में झड़प के बाद पुलिस ने वकीलों पर लाठीचार्ज किया था। उसमें कई वकील घायल हुए थे। दिल्ली बार काउंसिल के अध्यक्ष केसी मित्तल ने बताया कि अदालतों के इतिहास में वकीलों और पुलिस के बीच कई बार झड़पें हुई हैं, लेकिन कभी किसी वकील पर गोली चलाने जैसी घटना सामने नहीं आई।
उन्होंने कहा कि तीस हजारी अदालत में 1988 में वकीलों पर पुलिस के लाठीचार्ज की घटना अब तक सबसे निंदनीय थी। तत्कालीन डीसीपी किरण बेदी थीं। शनिवार की घटना उससे भी बड़ी है। मित्तल ने सवाल उठाया कि पुलिस के गोली चलाने के लिए कौन जिम्मेदार है।
भीड़ देखकर पहुंचे थे विजय वर्मा
दिल्ली बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष संजीव नसीयर ने बताया कि विजय वर्मा (40) उनके जुनियर रह चुके हैं। वह यहां 10-12 साल से वकालत कर रहे हैं। पार्किंग को लेकर झगड़े के दौरान विजय भीड़ देखकर वहां गए थे। उस दौरान कोर्ट के गेट नंबर 2 के पास स्थित तीसरी बटालियन के लॉकअप में काफी पुलिसकर्मी थे। तभी वकीलों को लगा कि पुलिसकर्मी किसी वकील को अंदर बंद करके पीट रहे हैं। वकील लॉकअप के गेट पर तैनात पुलिसकर्मियों से इसे खोलने को कह रहे थे। पुलिसकर्मियों ने अचानक लॉकअप के अंदर से गोली चलाई, जो विजय को लग गई।
छोटी पार्किंग से अक्सर होता है विवाद
तीस हजारी कोर्ट में सालों पहले बनी पार्किंग समय के साथ छोटी पड़ गई है। इसमें बेहद कम वाहनों के खड़े होने की व्यवस्था है। अधिकारियों के लिए अलग पार्किंग की व्यवस्था है, लेकिन वकीलों के लिए जगह कम है। इस कारण आए दिन यहां पार्किंग को लेकर विवाद होता है। वकीलों का कहना है कि यहां बड़ी पार्किंग की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि झगड़े की स्थिति पैदा न हो।