शुक्रवार को पूर्वी दिल्ली में बड़ा हादसा हुआ। गाजीपुर में कूड़े का पहाड़ अचानक धंस गया। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई। कई लोग जख्मी हो गए। कई गाड़ियां भी मलबे की चपेट में आ गईं। पूर्वी दिल्ली नगर निगम की मेयर नीमा भगत ने हादसे की जांच के आदेश दिए हैं।
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delhi ghazipur landfill collapes
बताया जाता है कि दोपहर करीब ढाई बजे भारी बारिश के चलते कूड़े का पहाड़ धंस गया। इसके ऊपर का एक हिस्सा कोंडली नहर में जा गिरा। जिससे नाले का पानी पास से गुजर रही सड़क पर आ गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि कई लोग नाले में बह गए।
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हादसे में 7 गाड़ियां भी नाले में गिर गई हैं। जिसमें से 3 बाइक, एक स्कूटी और एक कार को निकाल लिया गया है। मलबे की चपेट में कुछ मवेशी भी आ गए हैं। हादसे के कारण इस रूट पर भयंकर जाम लगा हुआ है। ऐसे में इधर से आने-जाने वाले लोग आनंद विहार से होकर जाएं।
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चश्मदीदों के मुताबिक, ऐसा लग रहा था जैसे कूड़े के अंदर कोई गैस बन गई थी। जिस वजह से कूड़े के पहाड़ का एक हिस्सा लोगों पर गिर गया। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने नहर में कूदकर कुछ लोगों को बचाया तो कुछ लोगों ने कूड़े में दबे लोगों को बाहर निकाल लिया।
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घटनास्थल का जायजा लेने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया भी पहुंच चुके हैं। हादसे के बारे में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'दिल्ली सरकार का पजेशन बोर्ड एमसीडी को यहां कूड़ा नहीं डालने के लिए नोटिस दे चुका है। हम उपराज्यपाल से मिलकर एमसीडी पर दबाव बनाने की कोशिश करेंगे कि यहां कूड़ा न डाला जाए।'
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बताया जा रहा है कि जिस वक्त हादसा हुआ, उस वक्त कूड़े के पहाड़ पर कुछ लोग काम कर रहे थे। ये लोग मलबे में दब गए हैं। हादसे में मरने वालों की पहचान राजकुमारी (27) और अभिषेक (20) के रूप में हुई है। जिस वक्त कूड़े का पहाड़ धंसा।
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बता दें कि गाजीपुर में कचरे का लैंडफिल साइट है, जहां पर शहर के कचरे को इकट्ठा किया जाता है। कचरे के ढेर की वजह से यहां पहाड़ सा बन गया है। करीब 600 ट्रक रोजाना कूड़ा लेकर यहां आते हैं।
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ये पूरा क्षेत्र 70 एकड़ में फैला हुआ है। फिलहाल यह पहाड़ 50 फीट ऊंचा है। यहां 1984 से कूड़ा जमा किया जा रहा है। समय-समय पर इसे कम करने के लिए इसमें आग भी लगाई जाती है, लेकिन इसका पूर्ण निस्तारण प्रशासन के लिए हमेशा से ही एक समस्या बना हुआ है।
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बता दें कि दिल्ली से रोजाना 14 हजार टन कचरा निकलता है, जिनका इसी कूड़े के पहाड़ में निस्तारण होता है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) कूड़े के निस्तारण के लिए दिल्ली सरकार को दो बार फटकार लगा चुकी है।
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दिल्ली के गाजीपुर में कचरे का लैंडफिल उत्तर भारत का सबसे बड़ा डंपिंग यार्ड है। यह 70 एकड़ में फैला है। इसकी ऊंचाई 50 फीट है। यहां करीब 3500 मिट्रिक टन कूड़ा डंप होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस डंपिंग यार्ड को बंद करने या कहीं और शिफ्ट करने की मांग कई बार की जा चुकी है।
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दिल्ली और गाजियाबाद में बढ़ते प्रदूषण का भी काफी हद तक जिम्मेदार इस कूड़े के पहाड़ को माना जाता रहा है। कूड़े का पहाड़ आसपास रहने वाले लोगों और बगल के रास्ते से गुजरने वाले मुसाफिरों के लिए काफी लंबे समय से बड़ी मुसीबत साबित हो रहा है।
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यहां से निकलने वाली बदबू और जहरीली गैसों के चलते लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है। इस पहाड़ में कई जगह आग भी लगी रहती है, जिससे मिथेन जैसी जहरीली गैसों का रिसाव होता रहता है।
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- फोटो : अमर उजाला
एकीकृत नगर निगम के जमाने में दिल्ली का कूड़ा डालने के लिए करीब दो से तीन दशक पहले गाजीपुर, भलस्वा और ओखला में सेनेटरी लैंडफिल बनाए गए थे। उस दौरान अनुमान लगाया गया था कि यह सेनेटरी लैंडफिल वर्ष 2008 तक कूड़े से पट जाएंगे। मगर यह तीनों सेनेटरी लैंडफिल तय अवधि से करीब पांच वर्ष पहले ही कूड़े से भर गए।
हादसे में घायलों की पहचान पंकज, करण, दीपक, अमित और अयुब अंसारी के रूप में हुई है। राहत कर्मियों ने दो बाइक, एक स्कूटी और एक कार को भी नहर से बाहर निकाला है।