सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है एक गेम। गेम नहीं इसे सुसाइड गेम कहना ज्यादा सही होगा। क्योंकि इस गेम में आखिर में आपको खुदकुशी करनी होती है। इस सुसाइड गेम का मायाजाल युवाओं और स्कूली छात्रों में तेजी से बढ़ता जा रहा है। ताजा मामला दिल्ली के द्वारका का है। यहां एक 17 साल का छात्र ब्लू व्हेल गेम के मायाजाल में इस कदर फंसा कि उसने ज्योमेट्री बॉक्स के टूल से अपना चेहरा ही जख्मी कर लिया। हालांकि, छात्र की मां ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए उसकी जिंदगी बचा ली।
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blue whale
- फोटो : blue whale
पीड़ित छात्र ने ब्लू व्हेल गेम के आधे प्वाइंट पार कर लिए थे। अगले स्टेप में उसने गेम के निर्देश के तहत अपने चेहरे को ज्योमेट्री बॉक्स के टूल से जख्मी कर दिया था। करीब 11 दिन से साइकोथेरेपी, काउंसलिंग व मेडिसिन देकर पीड़ित को सामान्य किया जा रहा है।
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ब्लू व्हेल गेम
- फोटो : सांकेतिक चित्र
द्वारका स्थित वेंकेटेश्वर अस्पताल के डिपार्टमेंट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड बिहेव्यरल साइंसेस में 20 अगस्त को दिल्ली के एक मध्यम वर्गीय परिवार की महिला ने अस्पताल में फोन करके न्यूरो साइकेट्रिस्ट का समय मांगा। पीड़ित छात्र की मां डॉ. भगवत राजपूत के पास पहुंचीं और उन्हें अपने बेटे की केस हिस्ट्री बताई। मां ने डॉक्टर को बताया कि उसके बेटे का बर्ताव पिछले एक महीने से बिल्कुल बदल गया है। सारा दिन अपने कमरे में रहता है और किसी से बात नहीं कर रहा है। पूछने पर कोई सही जवाब भी नहीं देता है। सुबह उठते ही हॉरर मूवी देखने बैठ जाता है और अन्य समय मोबाइल पर गेम्स खेलता रहता है। स्कूल के दोस्तों से लेकर परिवार के किसी सदस्य से वो बात भी नहीं करता है।
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डॉक्टर भगवत ने केस हिस्ट्री सुनने के बाद पीड़ित छात्र को अस्पताल लाने को कहा। इसी बीच अगले दिन छात्र ने अपने कमरे में जमेट्री बॉक्स के टूल से अपने चेहरे को जगह-जगह से कट कर दिया। मां ने जैसे ही देखा तो तुरंत उसे वेंकेटेश्वर अस्पताल लेकर आ गई। सबसे पहले उसके चेहरे का इलाज किया गया। डिपार्टमेंट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड बिहेव्यरल साइंसेस के न्यूरो साइकेट्रिस्ट्र डॉ. भगवत राजपुत के मुताबिक, पीड़ित छात्र से बात करनी शुरू की तो पता चला कि वह उसे मोबाइल पर गेम्स खेलना बेहद पसंद है।
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Blue Whale Challenge
काउंसलिंग के दौरान पता चला कि वह ब्लू व्हेल गेम के बारे में जानता है। उसके काफी प्वाइंट भी पार कर चुका होगा, क्योंकि तभी गेम के निर्देश के तहत उसने अपने चेहरे को चोट पहुंचाई। काउंसलिंग और जांच में पता चला कि उसकी मानसिक स्थिति एक ऐसे मोड़ पर है, जहां मरीज जो कल्पना करता हैै, वैसे ही करता है। इसलिए बेहद ही धैर्य के साथ उसका इलाज शुरू किया गया। उसे दवा भी दी गई।
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Blue Whale Suicide
- फोटो : Youtube
डॉ. भगवत राजपुत के मुताबिक, छात्र के इस हालत के जिम्मेदार पेरेंट्स की अनदेखी और बड़े भाई की बचपन से तारीफ थी, जबकि उसको सिर्फ फटकार मिलती थी। इससे आत्मविश्वास कम होने से वह दोस्त भी नहीं बना पाया और मोबाइल गेम्स के सहारे अकेलापन दूर करने लगा। इसी बीच ब्लू व्हेल गेम्स की गिरफ्त में आ गया। उन्होंने बताया कि मरीज के ठीक होने में अभी काफी समय लगेगा।
पीडियाट्रिक न्यूरोलोजिस्ट के सीनियर कंसलटेंट रिटायर्ड ब्रिगेडियर डॉ. केएस राणा के मुताबिक, दस से 17 साल की उम्र बेहद ही नाजुक अवस्था होती है, जिसमें शारीरिक और बाहरी जिंदगी में बदलाव आते हैं। ऐसे में पेरेेंट्स को बहुत ध्यान देने की जरूरत है। बच्चे को समय दें और इनडोर गेम्स की बजाय आउटडोर गेम्स खेलने पर फोकस करें। उनके मोबाइल या कंप्यूटर में जांचें कि वो क्या देखता है। बच्चे से दोस्ताना व्यवहार रखें, उनकी जिंदगी के बारे में अपडेट रहें।