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देश में हर 8वें व्यक्ति की मौत प्रदूषण से, ऐसे हुआ खुलासा

Fri, 07 Dec 2018 02:57 AM IST
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मास्क लगाकर जाते हुए - फोटो : अमर उजाला
वायु प्रदूषण के चलते वर्ष 2017 के दौरान देश में 12.4 लाख लोगों की मौत हुई है। इनमें से 6.7 लाख बाहरी तो 4.8 लाख लोगों की मौत घर के प्रदूषण से हुई है। इन लोगों ने प्रदूषण के कारण फेफड़ों में कैंसर, हार्ट अटैक और क्रोनिक रोग फैलने के कारण अस्पतालों में दम तोड़ा है। हालात यह हैं कि देश में हर आठवीं मौत के लिए प्रदूषण जिम्मेदार है। मरने वालों की आयु 21 से 70 वर्ष के बीच थी। जहरीली हवा के स्वास्थ्य पर पड़ते इस असर का खुलासा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन के जरिए किया।
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दिल्ली में प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला
विश्व प्रसिद्घ लॉसेंट में प्रकाशित इस अध्ययन के मुताबिक भारत में वायु प्रदूषण के कारण मृत्युदर प्रति लाख लोजगों पर 89.9 फीसदी दर्ज की गई है। देश के 369 मॉनीटरिंग स्टेशन से प्राप्त आंकड़ों के बाद वैज्ञानिकों ने पीएम 2.5 और घर के प्रदूषण को लेकर रिपोर्ट तैयार की है। इतना ही नहीं देश के लोगों की जीवन प्रत्याशा प्रदूषित हवा लेने से 1.7 वर्ष कम हुई है।आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने अमर उजाला को बताया कि प्रदूषण को लेकर देश में विकट स्थिति देखने को मिल रही है।

लोगों को जहां गैर संक्रामक रोग शिकार बना रहेहैं, वहीं इसके कारण मृत्युदर भी चिंता का सबब बनी है। घर और उसके बाहर दोनों ही प्रदूषण लोगों के लिए जानलेवा बन गया है। प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत घर के प्रदूषण में काफी हद तक गिरावट भी देखने को मिली है। ठोस ईधन के इस्तेमाल में आ रही कमी घर के अंदर प्रदूषण को कम कर सीओपीडी जैसे रोगों पर नियंत्रण देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इससे बचने के लिए सरकार और जनता दोनों को ही आगे आने की जरूरत है। अन्यथा अगले 10 से 15 वर्षों के अंदर देश में प्रदूषण से करोड़ों मौतें हो सकती हैं।       
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प्रदूषण - फोटो : self
सात मंत्रालयों की बनाई कमेटी कर रही निगरानी
अमर उजाला से बातचीत में भारत के स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. एस वेंकटेश का कहना है कि हवा में कार्बन मोनो ऑक्साइड, ओजोन, ब्लैक कार्बन, सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे जहरीली गैसें श्वास के जरिए रक्त में मिश्रित होकर जानलेवा बन रही हैं। उन्होंने बताया कि 2016 में प्रदूषण के कारण पांच वर्ष तक 1 लाख से ज्यादा शिशु मृत्यु के शिकार हुए। उनका कहना है पीएमओ के निर्देश पर सात मंत्रालयों को मिलाकर एक कमेटी बनाई है, जो लगातार प्रदूषण के गंभीर परिणामों की निगरानी कर रही है। साथ ही इसके लिए जल्द ही ठोस नीति पर कार्य भी होगा।       

इन चार राज्यों में सबसे ज्यादा जहर
दिल्ली, हरियाणा, यूपी और बिहार में सबसे ज्यादा जहरीली हवा दर्ज की है। यहां के मॉनीटरिंग स्टेशन और अस्पतालों से मिले आंकड़ों के अनुसार वायु प्रदूषण के कारण सर्वाधिक मौतें उत्तर प्रदेश में 2.6 लाख हुई हैं। जबकि हरियाणा में 28965, पंजाब में 26594, दिल्ली में 12322, उत्तराखंड में 12 हजार, हिमाचल में 7485, जम्मू-कश्मीर में 10476 मौतें 2017 के दौरान दर्ज की हैं। जबकि घर के प्रदूषण की बात करें तो उत्तर प्रदेश 78888, हरियाणा में 6751, जम्मू-कश्मीर में 3496, उत्तराखंड में 3570, पंजाब में 6139, हिमाचल प्रदेश में 2986 और दिल्ली में 52 लोगों की मौत हुई है।  

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प्रदूषण - फोटो : amar ujala
इन राज्यों में लोगों की जीवन प्रत्याशा हुई कम
दिल्ली में 1.5, हरियाणा में 1.4, पंजाब में 1.3, यूपी में 1.2 वर्ष जीवन प्रत्याशा पिछले चार वर्षों के दौरान कम हुई है। जबकि पूरे देश में औसतन 0.9 वर्ष लोगों की जीवन प्रत्याशा कम हुई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर वायु प्रदूषण में सुधार हो तो हरियाणा में 2.1 और यूपी में 2.2 वर्ष जीवन प्रत्याशा लोगों की बढ़ सकती है।       

आयुष्मान भारत में मिलेगा सीओपीडी का इलाज
वायु प्रदूषण के इस खौफनाक रुप को देख केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के तहत सीओपीडी (श्वास संबंधी) बीमारियों का उपचार कराने का निर्णय लिया है।      

2017 में प्रदूषण से इन रोगों के बढ़े मरीज
साल 2017 में वायु प्रदूषण के कारण देश में 29.3 फीसदी लोग फेफड़ों में संक्रमण के शिकार हुए हैं। जबकि 29.2 क्रोनिक पल्मोनरी, 23.8 दिल, 7.5 स्ट्रोक, 6.9 मधुमेह और 1.8 फीसदी लोग फेफड़ों में कैंसर के कारण विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हुए हैं।       
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Delhi NCR Pollution - फोटो : PTI
2017 में जन्मे शिशुओं की घटी जीवन प्रत्याशा
वर्ष 2017 के दौरान देश में जन्मे शिशुओं की जीवन प्रत्याशा प्रदूषण के कारण घटी है। राष्ट्रीय स्तर पर शिशुओं की जीवन प्रत्याशा 69 वर्ष दर्ज की है। जबकि यूपी में 65.6, हरियाणा में 69.2, जम्मू-कश्मीर में 72.8, उत्तराखंड में 69.8, पंजाब व हिमाचल में 72.3 और दिल्ली में 73.6 वर्ष शिशुओं की जीवन प्रत्याशा 75 वर्ष से घटकर पहुंची है।         

प्रदूषण से इतने लोगों को बनाया बीमार

राज्य           पर्टिकुलेट कण         वायु प्रदूषण         घर का प्रदूषण       
उत्तर प्रदेश        3035               4246              1693      
हरियाणा          2735               3548               1138      
पंजाब             2374               3033               873       
हिमाचल प्रदेश     1631              2988               1489      
दिल्ली             2326               2402              1174      
जम्मू-कश्मीर      1708               2634             1090      
उत्तराखंड          2384               3386             1298      

(सभी आंकड़ें प्रति एक लाख की आबादी पर लोग अस्पताल पहुंचे)      
 
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