प्रदूषण
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सात मंत्रालयों की बनाई कमेटी कर रही निगरानी
अमर उजाला से बातचीत में भारत के स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. एस वेंकटेश का कहना है कि हवा में कार्बन मोनो ऑक्साइड, ओजोन, ब्लैक कार्बन, सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे जहरीली गैसें श्वास के जरिए रक्त में मिश्रित होकर जानलेवा बन रही हैं। उन्होंने बताया कि 2016 में प्रदूषण के कारण पांच वर्ष तक 1 लाख से ज्यादा शिशु मृत्यु के शिकार हुए। उनका कहना है पीएमओ के निर्देश पर सात मंत्रालयों को मिलाकर एक कमेटी बनाई है, जो लगातार प्रदूषण के गंभीर परिणामों की निगरानी कर रही है। साथ ही इसके लिए जल्द ही ठोस नीति पर कार्य भी होगा।
इन चार राज्यों में सबसे ज्यादा जहर
दिल्ली, हरियाणा, यूपी और बिहार में सबसे ज्यादा जहरीली हवा दर्ज की है। यहां के मॉनीटरिंग स्टेशन और अस्पतालों से मिले आंकड़ों के अनुसार वायु प्रदूषण के कारण सर्वाधिक मौतें उत्तर प्रदेश में 2.6 लाख हुई हैं। जबकि हरियाणा में 28965, पंजाब में 26594, दिल्ली में 12322, उत्तराखंड में 12 हजार, हिमाचल में 7485, जम्मू-कश्मीर में 10476 मौतें 2017 के दौरान दर्ज की हैं। जबकि घर के प्रदूषण की बात करें तो उत्तर प्रदेश 78888, हरियाणा में 6751, जम्मू-कश्मीर में 3496, उत्तराखंड में 3570, पंजाब में 6139, हिमाचल प्रदेश में 2986 और दिल्ली में 52 लोगों की मौत हुई है।