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शिप्रा ने सरपंच को बताई थी अपहरण की झूठी कहानी

Sat, 05 Mar 2016 04:18 PM IST
सौरभ श्रीवास्तव/अमर उजाला, नोएडा
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Fashion Designer Kidnapping - फोटो : Amar Ujala
फैशन डिजाइनर शिप्रा मलिक अपहरण मामला सुलझाने का मोर्चा डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने 3 मार्च दोपहर करीब 12 बजे संभाला। एक घंटे की केस स्टडी करने के बाद ही उन्होंने शिप्रा के भाई शिवांग से पूछताछ करने के आदेश दे दिए। लक्ष्मी सिंह का निशाना भी ठीक बैठा और शाम करीब 5 बजे शिवांग को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। शिवांग के हिरासत में लेते ही उसका असर यह हुआ कि यह खबर शिप्रा तक पहुंची और शिप्रा खाटू श्याम जी के आश्रम से चल पड़ी और देर रात गुड़गांव पहुंचकर अपहरण के ढोंग की कहानी गुड़गांव के सुल्तानपुर के सरपंच को सुनाई।
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शिवांग के हिरासत में लेते ही शिप्रा एक्टिव हो गई

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Fashion Designer Kidnapping - फोटो : Amar Ujala
डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने घटना का खुलासा करते हुए कहा कि शिवांग के हिरासत में लेते ही शिप्रा एक्टिव हो गई और देर रात उसने ही खुद ही अपने सुरक्षित होने की सूचना पति चेतन को दी। डीआईजी ने एक स्पेशल टीम यह जांच करने के लिए लगा रखी है कि परिवार का ऐसा कौन सदस्य है जिसने शिवांग के हिरासत में लिए जाने की खबर शिप्रा तक पहुंचाई। डीआईजी ने यह साफ कहा है कि उसका भाई और परिवार के कुछ लोग अभी भी शक के दायरे में हैं और इस केस से जुड़े सभी बिंदुओं के आधार पर तस्दीक की जा रही है। वहीं, पुलिस ने शिवांग द्वारा किसी के पास गिरवी रखी गई मर्सिडीज कार को भी बरामद किया है।
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सरपंच को बताई झूठी कहानी

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Fashion Designer Kidnapping - फोटो : Amar Ujala
शिप्रा उसके बाद उसने फर्रुखनगर रोड स्थित सुलतानपुर गांव में एक शख्स के घर का दरवाजा खटखटाने लगी। उस शख्स ने उसको सुलतानपुर गांव के सरपंच से देर रात मिलवाया, जहां उसने अपनी झूठी कहानी बताई। शिप्रा ने उन्हें बताया कि वैन सवार चार लोगों ने उसका नोएडा से अपहरण किया था और तीन दिनों तक किसी सुनसान जगह पर उसे रखा। उसके बाद सड़क पर वह बदमाश उसे वैन से बाहर फेंककर चले गए। शिप्रा ने सरपंच के मोबाइल से रात करीब सवा एक बजे अपने पति चेतन को फोन किया और सकुशल होने की बात कही।

आश्रम पहुंचने के बाद उसने मोबाइल और पर्स वहीं फेंक दिया

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Fashion Designer Kidnapping - फोटो : Amar Ujala
मोबाइल और पर्स नहीं मिला: पूछताछ के दौरान शिप्रा ने पुलिस को बताया कि खाटू श्याम जी के आश्रम पहुंचने के बाद उसने मोबाइल और पर्स वहीं फेंक दिया, ताकि उसके बारे में कोई जानकारी न जुटा पाए। हालांकि, शिप्रा ने पहले ही अपना फोन स्विच ऑफ कर दिया था, फिर उसने अपना पर्स और मोबाइल क्यों फेंका यह बड़ा सवाल है।
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75 लाख रुपये ससुर को देने की बात क्यों छुपाई

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Fashion Designer Kidnapping - फोटो : Amar Ujala
केस की जांच के दौरान पता चला कि शिप्रा के पति चेतन ने ससुर सतीश कटारिया को 75 लाख लाख उधार दिए थे। इसके बावजूद शिप्रा के अपहरण की जांच के दौरान चेतन ने न तो पुलिस से यह बात शेयर की और न ही मीडिया को बताया। चेतन हमेशा रुपयों के लेन-देन की बात को नकारता रहा।
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बैंक लॉकर ऑपरेट करना

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Fashion Designer Kidnapping - फोटो : Amar Ujala
पुलिस ने बृहस्पतिवार रात को सीसीटीवी फुटेज के साथ खुलासा किया कि दोपहर 1:25 बजे सेक्टर-18 स्थित बैंक में लॉकर को ऑपरेट किया। शुक्रवार को शिप्रा के लौटने के बाद पुलिस की निगरानी में जब लॉकर तोड़ा गया, उस दौरान उसकी सास भी मौजूद थी। लॉकर में सभी आभूषण मौजूद थे। अगर शिप्रा को वहां से आभूषण निकालने नहीं थे तो वह वहां क्यों गई।
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गुड़गांव पुलिस और नोएडा पुलिस के दावों में फर्क

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Fashion Designer Kidnapping - फोटो : Amar Ujala
गुड़गांव पुलिस की तरफ से जारी प्रेस नोट में कहा गया कि शिप्रा ने सरपंच को सूचना दी और उसके बाद सूचना गुड़गांव पुलिस को दी गई। शिप्रा के मिलने की खबर गुड़गांव पुलिस ने नोएडा पुलिस को दी। जबकि डीआईजी ने दावा किया है कि शिप्रा ने सरपंच के मोबाइल से पति को फोन कर अपने सुरक्षित होने की बात बताई और पति की सूचना पर नोएडा पुलिस की टीम उसे लेने के लिए रवाना की गई।संपादित : शिप्रा अपहरण मामले से संबंधित
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आश्रम की कहानी से आज उठेगा पर्दा

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शिप्रा ने पहले अपने अपहरण की कहानी एसएसपी नोएडा किरण एस को सुनाई। उससे करीब एक घंटे तक पूछताछ एसएसपी ने की, लेकिन असली कहानी उससे नहीं उगलवा पाए। सुबह करीब 6 बजे डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने पूछताछ करनी शुरू की। उसके बाद शिप्रा टूट गई और उसने बताया कि वह खुद ही कार पार्क कर खाटू श्याम के आश्रम चली गई थी और वहीं पर तीन दिन तक रही। इस बात की तस्दीक करने के लिए एक टीम खाटू श्याम रवाना की गई है जहां जांच करने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि शिप्रा वहां रुकी थी या नहीं। डीआईजी का कहना है कि शनिवार सुबह तक सारी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
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