हैवानियत का दूसरा नाम बन चुके इस्लामिक स्टेट आतंकी संगठन के हमलावारों के बारे में यूएन ने बड़ा खुलासा किया है। जानिए आत्मघाती हमलों का सच।
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भारी नशा करने के बाद आत्मघाती हमला करते हैं ISIS के आतंकी
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आईएस आतंकियों की हैवानियत का टॉप सीक्रेट सामने आया है। यूनाइटेड नेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक आत्मघाती हमलों को अंजाम देने से पहले आतंकी भारी मात्रा हार्ड नशीली दवाइयों का सेवन कर लेते हैं।
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नशे के मद में चूर होकर आतंकियों के जेहन में केवल एक चीज रहती है, और वो है उनके आकाओं के जरिए बताया गया टारगेट। नशेड़ी आतंकी तय लक्ष्य पर धमाका करने के लिए खुद को उड़ाने से नहीं हिचकिचाते तो इसकी वजह है नशे की भारी डोज, जो वो पहले ही ले चुके होते हैं।
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UNODC यानी यूनाइटेड नेशन्स ऑफिस ऑन ड्रग एंड क्राइम की रिपोर्ट के मुताबिक सीरिया में खुली सीमाओं से भारी मात्रा में एम्फेटामाइन्स (नशे की दवाइयां) पहुंच रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक नशे की खेपों को पहुंचाने के लिए स्थानीय आपराधिक संगठन काम कर रहे हैं। जिनमें ज्यादातर लोग देश-विद्रोही संगठनों से हैं।
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द सन की खबर के मुताबिक जिहादियों का पसंदीदा नशा 'केप्टागोन' दवा है। केप्टागोन को साल 1960 में दिमागी बीमारियों के इलाज के लिए ईजाद किया गया था।
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साल 1980 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने केप्टागोन को प्रतिबंधित दवाओं की सूची में रखा था लेकिन मध्य एशिया के देशों में इसके इस्तेमाल पर पाबंदी नहीं लगाई जा सकी। सीरिया में इसकी तस्करी जोरडन, लेबनान और तुर्की से होती है।
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UNODC के हेड मसूद करीमीपौर के मुताबिक आईएस के आतंकी केपटागोन का इस्तेमाल इसलिए करते हैं ताकि वो निर्भीक और शक्तिशाली महसूस कर सकें।