बाहरी दिल्ली की वाहन चोरी निरोधक शाखा ने बवाना औद्योगिक क्षेत्र में 5 और 10 रुपये के नकली सिक्के बनाने की फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है। फैक्ट्री से सिक्के की सप्लाई करने वाले एक युवक की गिरफ्तारी के बाद इसका खुलासा हुआ। हालांकि फैक्ट्री में दबिश होने से पहले ही सिक्के बनाने के धंधे में लगे तीन आरोपी फरार हो गए।
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नकली सिक्के बनाने वाली फैक्ट्री पकड़ी
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस को गिरफ्तार आरोपी के पास से 40 हजार रुपये मूल्य के नकली सिक्के मिले हैं। पुलिस ने फैक्ट्री सील कर दी और गिरफ्तार आरोपी को चार दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। उपायुक्त एमएन तिवारी ने बताया कि जिले की वाहन चोरी निरोधक शाखा की टीम शनिवार को रोहिणी सेक्टर-11 और 17 को बांटने वाली रोड पर वाहनों की तलाशी ले रही थी।
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पुलिस ने शाहबाद डेयरी की ओर से आ रही स्विफ्ट डिजायर कार को रोका। तलाशी के दौरान डिग्गी में दो प्लास्टिक बैग मिले, जिसमें 20-20 पैकेट में करीब सौ-सौ सिक्के रखे थे। सिक्के पांच और दस रुपये के थे। आरोपी के पास से करीब 40 हजार रुपये मूल्य के सिक्के मिले। पुलिस ने रोहिणी सेक्टर-11 निवासी चालक नरेश कुमार (42) को हिरासत में लेकर सिक्कों के बारे में पूछताछ की।
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नरेश ने पुलिसकर्मियों को बताया कि वह पंजाब नेशनल बैंक का कर्मचारी है। जब पुलिस ने उसे पहचान पत्र दिखाने के लिए कहा, तो आरोपी पुलिस को बातों में उलझाने लगा। पुलिस ने नरेश को गिरफ्तार कर उससे कड़ाई से पूछताछ की, तब उसने बताया कि बवाना औद्योगिक क्षेत्र में नकली सिक्के बनाने की अवैध फैक्ट्री चल रही है।
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इसे हरियाणा निवासी दो सगे भाई सोनू और राजू चलाते हैं। राजेश कुमार इस फैक्ट्री का मैनेजर है। इस खुलासे के बाद पुलिस ने फैक्ट्री पर छापा मारा, लेकिन तीनों आरोपी फरार हो गए थे। पुलिस ने फैक्ट्री से सिक्के बनाने वाली मशीन और भारी मात्रा में कच्चा माल बरामद किया।
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मॉल, टोल और छोटे दुकानदारों के पास जाते थे सिक्के
पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी ने खुलासा किया है कि मॉल, टोल और छोटे दुकानदारों के पास ये सिक्के खपाए जाते थे। सोनू और राजू हर छह माह में फैक्ट्री का ठिकाना बदलते रहते हैं। नरेश ने बताया कि वह इस धंधे में दो साल से है। इससे पहले वह हरियाणा के चरखी दादरी में कार के कलपुर्जे की दुकान करता था।
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जहां सोनू और राजू उसे पांच और दस रुपये का सिक्का लाकर देते थे। जान-पहचान होने पर सोनू और राजू ने उसे कमीशन पर सिक्के बेचने का ऑफर दिया। कारोबार में घाटा और कर्ज होने की वजह से उसने हामी भर दी। कुछ समय बाद सोनू और राजू चरखी दादरी से सिक्का बनाने का कारोबार बंद कर फरार हो गए। उसके बाद दोनों ने दिल्ली के बवाना औद्योगिक क्षेत्र में यह धंधा शुरू किया, जिसके बाद फिर से दोनों ने उससे सिक्के बेचने के लिए संपर्क किया।
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फैक्ट्री में काम करते हैं आठ मजदूर
पुलिस सूत्रों का कहना है कि सरकार को नुकसान पहुंचाने वाली इस फैक्ट्री में आठ मजदूर काम करते हैं। मजदूरों को इस बात की जानकारी नहीं है कि वे अवैध तरीके से नकली सिक्के बनाते थे। पुलिस ने मजदूरों को गिरफ्तार नहीं किया है, लेकिन उनसे पूछताछ कर जानकारी इकट्ठा की जाएगी। जांच में पुलिस को इस बात की भी जानकारी मिली है कि दिल्ली के अन्य इलाकों में भी आरोपी सिक्के बनाने का काम कर रहे हैं।