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जल्द पैसे कमाने के लिए दिल्ली की लड़कियां और कॉलेज छात्राएं कर रहीं ये गैरकानूनी धंधा

Fri, 06 Oct 2017 09:54 AM IST
परीक्षित निर्भय/अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • 10-10 हजार में अपने अंडाणु बेच रही हैं 20 साल तक की लड़कियां      
  • दिल्ली में खुले हैं 200 से ज्यादा आईवीएफ सेंटर      
  • हर दिन 5 से 10 लड़कियां पहुंच रही हैं सेंटर      
  • कई सेंटर लड़कियों को लौटा देते हैं बैरंग      
  • कई सस्ते की जुगाड़ में देते हैं 10 हजार रुपये तक    
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बांझपन, इसके बारे में तो आप जानते ही होंगे। संतान न होने का दुख इन परिवारों खासतौर पर महिलाओं पर किसी पहाड़ से कम नहीं होता। भले ही चिकित्सा जगत में इनको राहत देने के लिए आईवीएफ आया हो, लेकिन देश में सख्त नियम न होने की वजह से इसका बखूबी गलत इस्तेमाल भी किया जा रहा है।
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गर्भवती महिला
न सिर्फ लडक़े, बल्कि देश की राजधानी में 20-20 साल की लड़कियां अपने अंडाणु बेचने के लिए तैयार रहती हैं। इनमें कॉलेज की छात्राओं से लेकर बीपीओ और विदेशी महिलाएं भी शामिल हैं। अमर उजाला पड़ताल में हकीकत चौंकान्ने वाली सामने आई।
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hospital
करीब 18 वर्ष की एक लड़की गुरुवार सुबह उत्तरी दिल्ली के एक आईवीएफ सेंटर में अपने अंडाणु  देने पहुंची, इस दौरान लड़की ने बताया कि वह करीब छह महीने से अपना अंडा बेच रही है, 10 हजार रुपये में।

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'विकी डोनर' के एक सीन में आयुष्मान खुराना और यमी गौतम
विक्की डोनर भी कम नहीं: पड़ताल के दौरान कुछ आईवीएफ सेंटरों ने यह कबूल किया है कि उनके यहां विक्की डोनर और अंडाणु दान करने के लिए हर दिन 5 से 10 लडक़े-लड़कियां पहुंचते हैं। हालांकि इन लोगों को रुपये देकर अंडाणु  या स्पर्म लेने की बात पर सभी सेंटर नकार गए। लेकिन यहां के कर्मचारियों का दावा है कि सेंटर हर दिन दो से तीन लडक़े लड़कियों से अंडाणु और स्पर्म खरीद रहे हैं।
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whatsapp
वॉट्सएप का जमाना, ग्रुप पर आता है मैसेज: आईवीएफ सेंटर के अलावा दिल्ली में अंडाणु और स्पर्म को लेकर कुछ एजेंसियां भी काम करती हैं। इन एजेंसियों का काम है सेंटर को सप्लाई देना। लेकिन कुछ एजेंसी ऐसी भी हैं, जो नई उम्र के युवाओं को नजर में रखती हैं। वॉट्सएप पर ग्रुप बनता है और फिर बारी बारी एक एक को बुलाया जाता है।
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इंड‌िया गेट - फोटो : अमर उजाला
बाहरी दिल्ली में सबसे बड़ा कारोबार: पड़ताल के दौरान एक और आईवीएफ सेंटर मिला, पंजाबी बाग में। यहां सुबह साढ़े 8 बजे ही क्लिनिक खुलने से पहले दो तीन लड़कियां करीब हर दिन आ ही जाती हैं। इसी बीच सेंटर के कर्मचारी ने उनमें से एक लड़की से मिलवाया।
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सांकेतिक तस्वीर
पूछताछ में लड़की ने बड़ी ही चतुराई के साथ अपनी पहचान छिपाई, लेकिन उसने यह कबूल किया, उसका हॉस्टल दक्षिणी दिल्ली में है और अपने रुममेट से ही उसे इसके बारे में पता चला था। चूंकि मध्य दिल्ली में पहचान सार्वजनिक न हो, इस वजह से ये लोग बाहरी दिल्ली के सेंटरों से ज्यादा संपर्क में रहते हैं।

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medicine home delivery
अंडाणु की होम डिलीवरी भी: पड़ताल के दौरान एक आईवीएफ सेंटर से यह भी पता चला है कि जब उन्हें एजेंसी से समय पर स्पर्म या अंडाणु  नहीं मिल पाते हैं तो इसके लिए वे होम डिलीवरी भी रखते हैं। यानि कि सबसे छिपकर लड़की या लडक़े के लिए कैब उपलब्ध कराई जाती है फिर उसे सेंटर के ही दूसरेभाग में लेकर आया जाता है और स्पर्म या अंडाणु  लेने के कुछ देर बाद कैब वापस उसे घर छोडने चली जाती है।

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आईवीएफ से किफायती नई तकनीक
किसको करें शिकायत, कोई नहीं है जिम्मेदार : दरअसल, देश में स्पर्म या अंडाणु  दान के साथ साथ आईवीएफ को लेकर ही कोई सख्त नियम आज तक बने ही नहीं। आईवीएफ एक्सपर्ट्स का कहना है कि तीन वर्ष से स्वास्थ्य मंत्रालय के पास गाइडलाइन बनी हुई है, लेकिन यह लागू नहीं है। न ही कोई ऐसा विभाग है, जहां पर शिकायत की जा सकती है। यही वजह है कि त्यौहारी सीजन में बांझपन दूर करने के लिए जगह जगह होर्डिंग भी देखने को मिलते हैं।
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डेमो - फोटो : डेमो
तीन टाइप की महिलाएं आती हैं: हमारे यहां अंडाणु  देने के लिए तीन टाइप की महिलाएं आती हैं, इनमें कॉलेज छात्रा भी शामिल हैं। लेकिन हम उन्हें हर दिन लौटा देते हैं। हमें उनकी जरूरत नहीं, स्पर्म हो या अंडाणु  अगर मंगाना है तो एजेंसी से हम डील करते हैं, ताकि इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह एजेंसी की रहे। गाइडलाइन लागू होने के बाद इस तरह की धंधों पर लगाम लग सकती है। -डॉ. अर्चना धवन, आईवीएफ एक्सपर्ट, नर्चर सेंटर
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