चुनाव में नेता अपनी जीत के लिए अपने काम और जनता पर भरोसे से कहीं ज्यादा वो इनपर भरोसा करते हैं। उनकी हर कही बात को वह इतनी तवज्जो देते हैं कि उनका कहा पूरा होने के लिए वो किसी भी हद तक चले जाते हैं। चुनावी तारीखों का ऐलान होते ही वो अपने सुबह उठने से लेकर रात को सोने जाने तक होने वाले हर एक काम के लिए उस शख्स की सलाह लेते हैं। यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक कि मतदान नहीं हो जाता।
(नोटः स्टोरी में दिखाई गई सभी फोटो केवल प्रतीक के रूप में इस्तेमाल की गई है)
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- फोटो : अमर उजाला
आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कौन है जिस पर प्रत्याशी इतना भरोसा करते हैं कि अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए उसका हर कहा मानते हैं। तो वह शख्स होते हैं प्रत्याशियों के गुरुजी यानी ज्योतिषी। प्रत्याशियों की ओर से नामांकन करने से पहले अपने गुरूजी से पूछा जाता है कि वह कब नामांकन करने जाए और कब वह पर्चा खरीदें।
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जब गुरूजी बताते हैं उसी वक्त प्रत्याशी नामांकन के लिए पहुंचते हैं। ज्योतिषियों की राय पर चलने का एक मजेदार किस्सा कुछ ऐसा था कि एक प्रत्याशी तो सुबह-सुबह ऑफिस खुलने से पहले ही कलेक्ट्रेट पहुंच गए। हद तो तब हो गई जब उन्होंने कर्मचारी से रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय को खोलने के लिए चपरासी से रिक्वेस्ट कर डाली।
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चपरासी महोदय ने कुछ दक्षिणा ली और प्रत्याशी को 9:14 मिनट पर कार्यालय में प्रवेश करा दिया। जब रिटर्निंग ऑफिसर अपने कार्यालय पहुंचे तो देखा कि एक पार्टी के प्रत्याशी पहले ही उनके ऑफिस में बैठे हैं।
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एसडीएम ने प्रत्याशी से पूछा कि इतनी जल्दी कैसे आ गए तो प्रत्याशी ने जवाब दिया कि गुरूजी का निर्देश था कि वह समय पर कार्यालय में प्रवेश कर जाएं।
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यह प्रत्याशी यहीं नहीं रुका इसके बाद तो इसने रिटर्निंग ऑफिसर को भी इस बात के लिए मनाने की कोशिश की कि उन्हें 10 बजकर 15 मिनट पर ही पर्चा दे दिया जाए और उससे पहले ही सारी कागजी कार्रवाई भी पूरी करा ली जाए। साथ ही दोपहर 2:25 बजे उनको पर्चा दाखिल करने की अनुमति देने का आग्रह किया।
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एक प्रत्याशी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब वह पार्टी में शामिल हुए थे तो उनके गुरूजी ने बताया कि टिकट तो मिलेगा लेकिन काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ेगा।
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हालांकि उम्मीद उसी दिन से बंध गई थी और इसलिए पार्टी में जमकर काम किया। गुरूजी के आर्शीवाद का फल मिला और अंततः उन्हें पार्टी की ओर से टिकट दे दिया।
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एक अन्य प्रत्याशी ने बताया कि ज्योतिष गुरूजी ने बताया कि नामांकन के लिए सुबह जाने से पूर्व किन-किन देवताओं की पूजा-अर्चाना करनी है और सुबह को किस समय उठना है। इसके अलावा नामांकन के लिए जाने से पहले घर में कन्या से तिलक कराना है और क्या खाना खाना है।
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कपड़े सफेद और हरे पहनने है जेब में रूमाल किस रंग का रखना है। यह तक गुरूती ने बताया था। उन्हीं के निर्देश पर सबकुछ किया। प्रत्याशी ने बताया कि जो प्रस्तावक होंगे वह भी ऐसी राशि के होंगे जो उनकी सफलता में सहयोग कर सकें। इसलिए दोनों प्रस्तावकों के नाम का निर्णय भी पहले ही कर लिया गया।
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नोएडा रिटर्निग आफिसर और एसडीएम दादरी अमित कुमार सिंह का कहना है कि कई प्रत्याशी उनके पहुंचने से पहले ही नामांकन पर्चा लेने के लिए रिटर्निंग कार्यालय पहुंच गए थे। जबकि कई प्रत्याशी केवल समय के आधार पर ही टिकट लेते हैं और उसे समय से ही जमा कर रहे हैं। प्रमुख पार्टी के नेताओं द्वारा पहले से ही ऑफिस में समय बताया दिया जाता है कि वह किस समय आएंगे। आधुनिक युग में भी लोग ज्योतिष पर काफी विश्वाश करते हैं।
समाज सेवी डॉ.आनंद आर्य का कहना है कि बड़े-बड़े नेताओं द्वारा नामांकन के लिए ज्योतिष से पूछकर नामांकन करना अंध विश्वाश को बढ़ावा देना है। यदि ऐसे लोग ही इस तरह का काम करेंगे तो आम जनता का क्या हाल होगा। जब चार प्रत्याशी लड़ेंगे तो केवल एक ही जीतेगा और किस पार्टी का प्रत्याशी जीत की ओर है इसकी जानकारी हर एक प्रत्याशी को होती ही है। मगर इस तरह के अंध विश्वास को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।