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बुराड़ी कांड के चार साल: आज भी लोगों के जेहन में जिंदा हैं दर्दनाक यादें, पढ़ें- उस मकान को मिले नए मालिक की जुबानी

Fri, 01 Jul 2022 04:48 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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burari death case - फोटो : अमर उजाला
बुराड़ी में एक जुलाई 2018 को चूण्डावत परिवार के 11 लोगों की सामूहिक आत्महत्या की झकझोर देने वाली घटना को चार साल हो गए हैं। संत नगर की गली नंबर चार में आज भी वह घटना लोगों में जिंदा हैं। हालांकि, लोगों का कहना है कि वह मार्मिक घटना को दोबारा याद नहीं करता चाहते। क्योंकि, घटना को याद करते हुए उनका दिल बैठ जाता है व जुबां खामोश हो जाती है।

संत नगर का मकान नंबर 137/5/2 को पूरे देश जानता है। यही नहीं विदेश में भी 11 लोगों की मौत ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। घटना के बाद से मकान में परिवार को कोई भी शख्स नहीं रहता है। हालांकि, मकान को नया किरदार मिल गया है, जो बीते तीन सालों से यहां परिवार के साथ रह रहा है।
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burari death case - फोटो : अमर उजाला
मकान में रह रहे मोहन ने बताया कि पहले उनकी बुराड़ी मुख्य रोड पर डायग्नोस्टिक लैब थी। वह परिवार को अच्छी तरह जानते थे और उनके अच्छे संबंध थे, लेकिन परिवार में क्या चल रहा है, इसे लेकर किसी भी अन्य शख्स को जानकारी नहीं थी। परिवार की मौत के एक साल बाद उन्होंने घर के निचला हिस्सा किराए पर ले लिया। अब उसी मकान में मोहन डायग्नोस्टिक लैब व एक किराना की दुकान चला रहे हैं। 

 
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burari death case - फोटो : अमर उजाला
मोहन बताते हैं कि शुरुआत में डर की वजह से लोग दुकान से सामान भी खरीदना पसंद नहीं करते थे। लेकिन, वक्त के साथ-साथ चीजें सामान्य होती गईं और दुकान भी चलने लगी। साथ ही डायग्नोस्टिक लैब भी चल रही है। मोहन कहते हैं कि आज भी वह घटना को याद करते हुए मन भर आता है। पूरा जीवन चाहकर भी इस दर्दनाक घटना को भुलाया नहीं जा सकता है। 

 

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burari death case - फोटो : अमर उजाला
मोहन के पड़ोसी व बीते 14 सालों से संत नगर में रहे रविंद्र ने बताया कि परिवार काफी मिलनसार था। परिवार के जाने से बाद से पूरी गली के लोगों को धक्का लगा। घटना के बाद कई दिनों तक गली में मातम पसरा रहता था। शाम को बच्चों के खेल का शोर, गाड़ियों की आवाजाही व गली में रेहड़ी पटरी वालों का आना-जाना तक बंद हो गया था।
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burari death case - फोटो : अमर उजाला
हमें कई दिनों तक लगता नहीं था कि हम उसी इलाके में रह रहे हैं, हालांकि समय के साथ-साथ गली के हालात तो बदल गए, लेकिन आज भी आंखों में वह दर्दनाक तस्वीर और परिवार की यादें दिल में जिंदा है। जब भी 30 जून को याद करते हैं तो मोहल्ले में चुप्पी सध जाती है। 

 
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burari death case - फोटो : अमर उजाला
गली में खुल गए हैं कई कोचिंग सेंटर व लाइब्रेरी
स्थानीय लोगों ने बताया कि घटना के बाद से लोग बुराड़ी की इस गली में आने से भी कतराते थे। यहां तक की रात 10 बजे के बाद लोगों ने घर के सामने से निकलना बंद कर दिया था। गली में तरह-तरह की अफवाहें फैल गई थीं। समय बीतने के साथ-साथ लोगों में डर खत्म हुआ और यहां फिर से चहल-पहल बढ़ गई। आज गली में कई कोचिंग सेंटर व लाइब्रेरी है, जहां देर रात तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र पढ़ाई करते हैं। 
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burari death case - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली आते ही भर आता है मन 
चूण्डावत परिवार में अब एक बहन और एक भाई है। बहन सोनीपत तो भाई राजस्थान के कोटा शहर में रहते हैं। कोटा में रह रहे भाई दिनेश कहते हैं, पहले दिल्ली आने की वजह थी, लेकिन अब दिल्ली आने की कोई वजह नहीं रही। पहले जब भी दिल्ली गया, तब अपनी मां, भाईयों व बहनों और छोटे-छोटे बच्चों को याद करते ही मन भर गया। यही वजह है कि अब कोटा ही रहकर उन्हें याद करता हूं।
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burari death case - फोटो : अमर उजाला
एक घटना ने पूरे परिवार को छीन लिया और हम भाई-बहन को अकेला कर दिया। एकलौती बची हुई बहन से फोन पर जब भी बात होती है तो अपने परिवार का जिक्र छिड़ता है, जिसके बाद आंखें नम हो जाती हैं। 30 जून की काली रात को पूरी जीवन में कभी भुलाया नहीं जा सकता है। 
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