नौकरी से निकाले जाने के कारण बदला लेने के लिए पुराने घरेलू सहायक ने ही दिल्ली के सिविल लाईंस में बुजुर्ग बिल्डर रामकिशोर अग्रवाल की हत्या व लूटपाट की अंजाम दिया था। 20 हजार रुपये चोरी करने के आरोप में रामकिशोर अग्रवाल ने उसे तीन वर्ष पहले नौकरी से निकाल दिया था। वह तीन वर्ष से साजिश रच रहा था। आरोपी ने अपने गांव के एक नाबालिग साथी को बुलाकर इस वारदात को अंजाम दिया था।
आरोपियों ने ऐसे रची थी साजिश
दोनों नाबालिग आरोपियों ने वारदात से पहले लाजपत राय मार्केट से एक टॉय पिस्टल और चावड़ी बाजार से दो सब्जी काटने वाले चाकू खरीदे थे। इन्होंने 28 अप्रैल को वजीराबाद इलाके से एक बाइक चोरी की। वारदात से एक रात पहले दोनों करीब दस बजे पीड़ित के घर के नजदीक पहुंचे, जहां बाइक खड़ी कर दोनों वहां से चले गए। आरोपी को पता था कि सुबह के समय बाइक को एंट्री नहीं मिल सकेगी, क्योंकि वहां गार्ड की तैनाती रहती है। मुख्य नाबालिग आरोपी को पता था बुजुर्ग रोज सुबह साढ़े पांच बजे लॉन में सैर करने के लिए अपने रूम का दरवाजा खोल देते हैं और इतनी जल्दी परिवार का कोई सदस्य उठता भी नहीं है।
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builder murder case
- फोटो : अमर उजाला
साजिश के तहत आरोपी सुबह बाउंड्री वॉल के ऊपर से पीड़ित के घर में पहुंचे। उन्होंने गार्ड के रूम को बाहर से लॉक कर दिया। इसके बाद वे पीड़ित के बेड रूम में गए। उस वक्त बुजुर्ग टीवी देख रहे थे। दोनों ने मौका देख उन्हें काबू में किया और चाकू से गर्दन रेत दी। इसके बाद पेट व में चाकू से ताबड़तोड़ वार कर दिए। अधिक खून बहने से बुजुर्ग की मौके पर ही मौत हो गई थी।
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वारदात के बाद कनॉट प्लेस में जाकर टैटू बनाया था
आरोपी ने पीड़ित के घर से लूटे गए गए सामान को मुकुंदपुर में किराए के मकान में रखा था। लूट की रकम से आरोपियों ने एक मोबाइल खरीदा था। ये लूट की रकम में से 25 हजार रुपये ही खर्च कर पाए थे। वहीं एक नाबालिग ने कनॉट प्लेस आकर टैटू बनवाया था। विशेष पुलिस आयुक्त दीपेंद्र पाठक का कहना है कि पुलिस अदालत से अपील करेगी कि इस मामले में आरोपियों को बालिग मानते हुए उन पर केस चलाया जाए।
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मधुबनी, बिहार के रहने वाला है दोनो नाबालिग
दोनों नाबालिग आरोपी मूलरूप से मधुबनी बिहार के रहने वाले हैं। मुख्य नाबालिग आरोपी वजीराबाद, गांव, दिल्ली में रह रहा था। वह नौवीं कक्षा तक पढ़ा है। दूसरा नाबालिग दसवीं कक्षा तक पढ़ा है। वह मुख्य नाबालिग आरोपी के बचपन का दोस्त है। दोनों आरोपी पकड़े जाने से बचने के लिए बिहार भागने की फिराक में थे।
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बिल्डर का घर
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मेट्रो कार्ड के नंबर से हो सकती है किसी संदिग्ध की पहचान
दिल्ली मेट्रो के सभी मेट्रो कार्ड की यूनीक आईडी होती है। इसकी बदौलत किसी भी मेट्रो स्टेशन से प्रवेश और निकास का समय ऑनलाइन दर्ज होता है। किसी भी संदिग्ध की पहचान हो या फिर किसी मुसीबत में यात्रियों की सहूलियत, कार्ड के जरिये कई जानकारियां हासिल की जा सकती हैं। किसी आपराधिक घटना को सुलझाने के लिए कार्ड का एएफसी गेट पर एक बार पंच करना ही काफी है।
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अगर एक नियत समय, उदाहरण के तौर पर कोई यात्री सुबह 8.18 बजे आजादपुर मेट्रो स्टेशन से मेट्रो में सवार होने के लिए एएफसी गेट पर कार्ड का इस्तेमाल होता है तो इसकी जानकारी दर्ज हो जाती है। आजादपुर से मेट्रो से चढने का बाद वह किसी भी स्टेशन पर 9.00 बजे बाहर निकलता है तो कार्ड के आधार पर उससे सुरक्षा के लिहाज से पूछताछ की जा सकती है।
संदिग्ध से जुड़े सीसीटीवी कैमरे और वारदात स्थल के इर्द गिर्द के फुटेज के मिलान के आधार पर उसकी पहचान की जा सकती है। अगर किसी नियत समय में स्टेशनों से निकलने वाले ऐसे संदिग्ध कार्ड धारकों की संख्या 10, 15, 20 या इससे अधिक भी तो इनकी पहचान के लिए रेड अलर्ट मोड में डाल दिया जाता है। एएफसी गेट के बाहर निकलते ही व्यक्ति की पहचान कार्ड नंबर से कर ली जाती है।