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सावधान! प्लास्टिक आधार कार्ड है खतरनाक, इन 3 तरीकों से अपने जेब में रखें आधार

Wed, 07 Feb 2018 01:34 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने आगाह किया है कि प्लास्टिक या लैमिनेशन वाले आधार स्मार्ट कार्ड के कारण आप मुसीबत में फंस सकते हैं।
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अनधिकृत वेंडरों से प्रिंटिंग कराने से आधार का क्विक रेस्पांस(क्यूआर) कोड काम करना बंद कर सकता है। साथ ही आधार कार्ड में दर्ज व्यक्तिगत सूचनाएं चोरी हो सकती हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
यूआईडीएआई के सीईओ अजय भूषण पांडे ने कहा, आधार स्मार्ट कार्ड की अनधिकृत प्रिंटिंग पर 50-300 रुपए खर्च आता है, जिसकी कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि आधार लेटर व इसका कटा हुआ हिस्सा पूरी तरह वैध हैं। आधार कार्ड डाउनलोड कर साधारण कागज पर लिया प्रिंट या मोबाइल आधार भी मान्य है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर
हो सकती है जेल
आधार को लैमिनेशन करवाने या उसे प्लास्टिक पर प्रिंट करवाने के लिए किसी अ‌नधिकृत एजेंसी से निजी जानकारी साझा न करें। लोगों से आधार से जुड़ी जानकारी जुटाने व अ‌नधिकृत प्रिंटिंग करने वाली एजेंसियों को जेल की सजा भी हो सकती है।
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सुप्रीम कोर्ट
महज दुरूपयोग की आशंका पर किसी कानून को असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
आधार मामले की सुनवाई के दौरान संविधान पीठ ने मंगलवार को कहा कि किसी भी कानून को महज इसलिए असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता कि उसका दुरूपयोग हो सकता है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के ऐसे आदेशों की भरमार है जब यह कहा गया है कि सिर्फ दुरूपयोग होने की आशंका केआधार पर किसी कानून को असंवैधानिक या गैरकानूनी नहीं ठहराया जा सकता।
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कपिल सिब्बल - फोटो : ANI
सोमवार को एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि आधार कानून शीर्ष अदालत के इन तमाम फैसलों का अवपाद है क्योंकि इस कानून के दुरूपयोग होने की आशंका नहीं है बल्कि इसका दुरूपयोग हो रहा है। हर रोज इस कानून का दुरूपोग हो रहा है। इस पर संविधान पीठ केएक सदस्य न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने सिब्बल से कहा कि दुरूपयोग की आशंका केआधार पर कानून को निरस्त नहीं किया जा सकता।
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कानून को निरस्त करना हमारे लिए दिक्कत की बात है। उन्होंने कहा कि अदालत द्वारा किसी कानून को निरस्त करने से पहले आपको यह साबित करना पड़ेगा कि यह छद्म विधान है। मंगलवार को सुनवाई केदौरान सिब्बल ने कहा कि सूचना के अधिकार (आरटीआई) ने व्यक्ति को जानकारी हासिल करने का अधिकार दिया है वहीं आधार कानून ने राज्य को जानकारी हासिल करने का अधिकार दिया है।

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पीठ ने एक सदस्य न्यायमूर्ति एके सिकरी ने कहा कि अगर सरकार चाहे तो बिना आधार केभी किसी व्यक्ति केबारे में जानकारी हासिल कर सकती है। जवाब में सिब्बल ने कहा कि इसके लिए अदालत केआदेश की जरूरत होगी। तक सिकरी ने कहा कि हमारे कहने का मतलब है कि और भी कई तरीकेहै लोगों के बारे में जानकारी हासिल करने की।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
मनी लाउंडरिंग एक्ट के तहत बैंक खाते को आधार से जोड़ने को लेकर सिब्बल ने कहा है कि आखिर आधार नंबर यह कैसे बता सकता है कि वह व्यक्ति आतंकवादी है या मनी लाउंडरर। सिब्बल ने यह भी क हा कि हर तकनीक को हैक किया जा सकता है। अगर कोई कहता है कि यह हैक नहीं हो सकता है, इसका मतलब है वह झूठ बोल रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई तकनीक नहीं है जिसका दुरूपयोग न हो सके। टेलीफोन का दुरूपयोग भी होता है। इस पर न्यायमूर्ति सिकरी ने कहा कि यानी किसी तरह का कोई अविष्कार नहीं होना चाहिए। सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी।
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