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मैं दिल्ली का चुना हुआ मुख्यमंत्री हूं, आतंकवादी नहीं...

Thu, 05 Oct 2017 10:30 AM IST
संतोष कुमार/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली विधानसभा में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सख्त लहजे में उपराज्यपाल अनिल बैजल पर हमला बोला। केजरीवाल ने कहा कि अधिकारी उपराज्यपाल के आदेश का हवाला देकर उन्हें और उनके मंत्रियों को कोई फाइल नहीं दिखा रहे हैं। उपराज्यपाल पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि वह फाइल देखकर कोई ऐसा राज नहीं चुरा लेंगे, जिससे देश को नुकसान होगा। उन्होंने कहा, ‘मैं दिल्ली का चुना हुआ मुख्यमंत्री हूं, आतंकी नहीं’।
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अरविंद केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल बुधवार को विधानसभा में अतिथि शिक्षकों के स्थायी करने के लिए लाए गए बिल पर चर्चा पर जवाब दे रहे थे। शुरुआत में उन्होंने बेहद शालीन तरीके से नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता से सवाल-जवाब किए। लेकिन थोड़ी देर बाद केजरीवाल ने कहा कि देश नौकरशाही से नहीं चलता, लोकतंत्र से चलता है। अधिकारियों की जगह चुने हुए नेता देश चलाते हैं। दिल्ली के मालिक हम हैं।
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kejriwal - फोटो : सोशल मीड‌िया
केजरीवाल ने कहा कि विजेंद्र गुप्ता से बात करके भाजपा के नंगेपन को दिखाना चाहते थे। ये अधिकारियों के सहारे दिल्ली को चलाने की बात कर रहे हैं। अधिकारियों की पीठ पीछे छिपकर राज करने की कोशिश है इनकी। केजरीवाल ने कहा, ‘अगर मर्द के बच्चे हो, तो सामने आओ। अधिकारियों के पीछे मत रहो’। इतना सुनने के बाद विपक्षी सदस्यों ने सदन का वॉक आउट कर दिया।

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सीएम अरविंंद केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली सरकार के कामों की तारीफ करते हुए दावा किया कि पूरी दुनिया में शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुए कामों की तारीफ हो रही है। लेकिन उपराज्यपाल उनसे, उनके मंत्रियों से फाइल छिपा रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या वह आतंकवादी नजर आते हैं? केजरीवाल ने एक बार फिर दोहराया कि वह राजनीति में इसीलिए आए क्योंकि दूसरी पार्टी फेल हो गई। हमारे सत्ता में आने के बाद अब फाइल नहीं दिखाई जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर फाइलें इसी तरह छिपाई गईं तो इतिहास दिल्ली को बर्बाद करने के लिए उपराज्यपाल को याद रखेगा। आखिर में केजरीवाल ने बिल पास करने की सदन से अपील की।
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व नेता विपक्ष विजेंद्र गुप्ता के बीच सदन सवाल-जवाब का चला दौर
केजरीवाल: बिल पास करना है या नहीं?
गुप्ता: हां, करना है। लेकिन कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए बिल दुबारा पेश करना होगा इसके लिए।
केजरीवाल: वो हो जाएगा। मतलब आप मानते हो कि विधानसभा बिल पास कर सकती है?
गुप्ता: इसमें कोई दिक्कत नहीं।
केजरीवाल: लेकिन उपराज्यपाल ने कहा है कि सर्विसेज उनकी अधीन है। हमारा मानना है कि यह शिक्षा से जुड़ा मामला है। इस पर क्या कहना है आपका?
गुप्ता: सर्विसेज बाद की बात है। एलजी की छोड़िए। पहले बिल तैयार करवाईए।
केजरीवाल : छोड़िए। हमने अपनी कर ली। कैबिनेट ने बिल तैयार किया। विधान सभा में पेश हो गया। पास होकर इसे उन्हें भेज देंगे। अब साथ-साथ मिलकर इसे पास करवा लें।
गुप्ता: सवाल बिल तैयार करने की प्रक्रिया का है। पहले उसे ठीक करवाईए।
केजरीवाल: अगर कानूनी प्रक्रिया इतनी जरूरी है तो जनता लॉ सचिव को चुन लेती। हमारी, आपकी, हम सबकी क्या जरूरत थी तब। देश नौकरशाही से नहीं, लोकशाही से चलता है। हम दिल्ली को चलाएंगे। अच्छा छोड़ो। बिल को मत मानो। जिस तरह से काश्मीरी विस्थापित शिक्षकों को स्थायी किया गया, उसी तरह अतिथि शिक्षकों को भी पक्का करवा दो।    गुप्ता : बिल का एक भी रिफरेंस ठीक नहीं है। बिल पिट जाएगा।
केजरीवाल: अच्छा आपको जो कमी लगती है, उस पर संशोधन लाओ। अभी पास कर देते हैं।
गुप्ता: आप शासक हैं। हम थोड़े लायेंगे।
केजरीवाल: अच्छा, आप कह रहे हैं कि कई धारायें ठीक नहीं हैं। तो चलो बैठते हैं तीन चार घंटे एक कमरे में। जितना समय लगे, हम चर्चा करते हैं। बिल ठीक करके इसे पास करवाते हैं।
गुप्ता: आप अच्छे नेता हैं। लेकिन अच्छे प्रशासक नहीं हैं। कानून की बारीकियों में जाकर बिल अधिकारी तैयार करते हैं। आपका काम नीतिगत मामलों में मार्गदर्शन करना होता है। एक हफ्ते का समय लीजिए। बिल को ठीक करवाईए। इसके बाद पास करके उपराज्यपाल को भेजते हैं।
(अधिकारियों का संदर्भ आते ही केजरीवाल भड़क गए। इसके बाद विपक्ष ने सदन का वॉक आउट कर दिया।)
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