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PICS : उलझने लगा सुनपेड, आरोपों से मेल नहीं खाते तथ्य

Thu, 22 Oct 2015 08:40 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, फरीदाबाद
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सीबीआई जांच और आरोपियों की बिना शर्त गिरफ्तारी की मांग के बीच बृहस्पतिवार को मधुबन एफएसएल (फोरेंसिक साइंस लैब) से आई टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया।
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PICS : उलझने लगा सुनपेड, आरोपों से मेल नहीं खाते तथ्य

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टीम ने आरोपों के आधार पर तथ्यों को परखा। मौका ए वारदात की परिस्थितियां और लगाए गए आरोपों के बीच संबंध ढूंढने में टीम को मशक्कत करनी पड़ी। टीम ने जांच की शुरुआत कमरे के मुख्य दरवाजे से की। कुंडे के बेलन में लगी धुएं की कालिख का निरीक्षण किया।

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टीम के सदस्यों का कहना था कि दरवाजा बंद रहने का मतलब कुंडे का एक सिरा चौखट में बने छेद के अंदर होना है। छेद में होने की वजह से बेलन के सिरे पर धुएं की कालिख नहीं लग सकती, जबकि इस मामले में सिरे पर कालिख पाई गई।

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इसका मतलब था कि दरवाजा बाहर से खुला था। ग्रामीणों ने बताया कि दरवाजा बंद था और उस पर ताला लगा हुआ था जिसे लोगों ने तोड़कर खोला। जितेंद्र ने भी बताया कि उसने पत्नी बच्चों को मोखले के जरिये दूसरे कमरे में निकाला।
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टीम को मोखले में किसी भी वस्तु के रगड़ने या घिसने के साक्ष्य नजर नहीं आए। टीम का मानना है कि सवा गुणे डेढ़ फुट के इस मोखले से शरीर का कोई अंग छुए बिना किसी का निकलना लगभग नामुमकिन है और जान बचाने के लिए भागने की सूरत में तो कतई नहीं।
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मोखले के दोनों ओर किसी भी तरह की जद्दोजहद के निशान टीम को नहीं मिले। पेट्रोल या ज्वलनशील पदार्थ खिड़की से फेंका गया या नहीं, टीम ने इस सच्चाई को भी परखा। टीम के सदस्यों का मानना है कि बाहर से कोई भी तरल पदार्थ अंदर फेंकने पर उसके कुछ अंश खिड़की पर और बाहर भी गिरने चाहिए, आग लगाए जाने पर यहां भी ज्वलनशील पदार्थ जलता।
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टीम को खिड़की की चौखट पर जलने के निशान नहीं मिले। आग बेड के एक छोटे से हिस्से में ही क्यों लगी, टीम इसका जवाब तलाशने का प्रयास करती रही। टीम के सदस्यों ने बारीकी से हर बिंदु की जांच की और रजिस्टर में दर्ज करने के साथ घटनास्थल की नक्शानवीसी भी की।

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हालांकि टीम ने आधिकारिक रूप से कुछ भी कहने से इनकार किया। उधर, दो बच्चों सहित मां को जिंदा जलाने की घटना की तह तक पहुंचने में सर्विलांस भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। पुलिस सूत्रों के सभी संदिग्धों की कॉल डिटेल और लोकेशन की जांच की जा रही है। बहुत जल्द घटना की सच्चाई का सामने आएगी।

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इससे पहले दलित परिवार के दो मासूमों को जिंदा जलाए जाने की घटना के तीसरे दिन बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल सुनपेड़ गांव पहुंचे। पीड़ित परिवार से मिलने के बाद उन्होंने कहा कि यह जातीय हिंसा नहीं बल्कि रंजिश का मामला है। घटना में मारे गए मासूम बच्चों के हत्यारों को बख्शा नहीं जाएगा।

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अब सीबीआई इस मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच करेगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, वह सलाखों के पीछे होगा। वहीं, मुख्यमंत्री पीड़ित के घर में दलित समाज के अन्य लोगों की बात बिना सुने ही चले गए। इससे समाज के लोगों का गुस्सा फूट गया और पीड़ित के घर में ही मुख्यमंत्री के विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी।

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दोपहर करीब 12:30 बजे मुख्यमंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर, मुख्य संसदीय सचिव सीमा त्रिखा, विधायक मूलचंद शर्मा व टेकचंद शर्मा पीड़ित जितेंद्र के घर पहुंचे। जितेंद्र के पास पहुंचकर कुर्सी पर बैठते ही मुख्यमंत्री ने कहा कि जो हुआ बहुत बुरा, तुम्हें हिम्मत करनी पड़ेगी। जो हो गया है उसे ठीक तो नहीं कर पाएंगे लेकिन जिसने भी इस घटना को अंजाम दिया है, उसे बख्शूंगा भी नहीं।

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इस दौरान मुख्यमंत्री ने पीड़ित को जूस भी पिलाया। करीब 15 मिनट तक उसके पास रहने के बाद बाहर निकले और मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि यह घटना पूरी तरह से रंजिश का नतीजा है। सीबीआई जब तक जांच नहीं कर लेती, कुछ कह पाना मुश्किल है। अभी दोनों पक्षों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है।

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सुनपेड़ कांड को धर्म के नाम पर भड़काने की कोशिशें की जा रही हैं। गांव में घटना के बाद कुछ असामाजिक तत्व और संगठन सक्रिय हो गए हैं, जो दलित परिवार को धर्म के नाम पर गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

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