मनोज वशिष्ठ एनकाउंटर मामले में दिल्ली पुलिस ने स्पेशल सेल के उन सभी 9 पुलिसवालों का ट्रांसफर कर दिया है जो इस एंकाउंटर में संलिप्त थे। पुलिस का कहना है कि वो केस की जांच को प्रभावित कर सकते थे इसलिए उनका तबादला कर दिया जाए। उन सभी पुलिसवालों के खिलाफ विजिलेंस जांच की जाएगी। वहीं आज पुलिस की जांच से संतुष्ट होकर मनोज के परिजनों ने उसकी लाश अस्पताल से ले ली है। (सभी फोटोः अनिल कुमार/अमर उजाला)
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पोस्टमार्टम घर में पहुंचे मनोज के परिजन, शव देख बताया ये सच
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मनोज वशिष्ठ के परिजनों ने शव लेने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि जब तक आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता और उन्हें बर्खास्त नहीं किया जाता तब तक शव को साथ नहीं ले जाएंगे।
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परिजन और समर्थक देर रात तक सुचेता कृपलानी अस्पताल तक डटे रहे और पोस्टमार्टम के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह के घर तक कैंडल मार्च करने की तैयारी में जुटे रहे। हालांकि पुलिस ने उन्हें कैंडल मार्च निकालने से रोक दिया।
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परिजनों और समर्थकों का कहना है कि जब तक स्पेशल सेल के उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर बर्खास्त नहीं किया जाता तब तक शव को साथ नहीं ले जाएंगे।
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पोस्टमार्टम के बाद शाम को शव को परिजनों को देने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई लेकिन परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया है। रिश्तेदार दिवाकर ने बताया कि जब तक मांग नहीं मानी जाती तब तक शव अपने साथ नहीं ले जाएंगे। इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती अस्पताल में कर दी गई।
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उधर, पांच डॉक्टरों की मेडिकल बोर्ड ने शव का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम में देरी की एक वजह यह थी कि सोमवार करीब 11 बजे जब पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू हुई तब पुलिस ने परिजनों को कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा।
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परिजनों ने इतने सारे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़ित परिजनों की ओर से वकील को बुलाया गया। इसके बाद वकील के कहने पर परिजन की ओर से कुछ दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए इसके बाद पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू हो पाई।
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पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी के साथ-साथ स्टील फोटोग्राफी भी कराई गई है। इस दौरान परिजन, एसडीएम और पुलिस अधिकारी पोस्टमार्टम घर में ही मौजूद रहे।
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मनोज के परिजन दिवाकर ने बताया कि शव को देखने से स्पष्ट हो रहा है कि मारपीट की गई है। चेहरे पर पिस्टल के बट से मारा गया है। गाल सूजा हुआ था और नीला धब्बा बना हुआ था। शरीर पर जगह-जगह खरोंच के निशान भी थे।
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सूत्रों का कहना है कि मेडिकल बोर्ड ने पोस्टमार्टम की प्रथमदृष्टया रिपोर्ट पुलिस को दी है, लेकिन विस्तृत रिपोर्ट एक से दो दिनों के बाद जांच अधिकारी को सौंपी जाएगी।
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लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के सुचेता कृपलानी अस्पताल में मनोज वशिष्ठ के शव के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू होते ही बागपत से आए सैकड़ों समर्थकों का हुजूम वहां जमा होने लगा।
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समर्थक लगातार दिल्ली पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए एनकाउंटर को फर्जी बता रहे थे। समर्थकों की संख्या को देखते हुए अस्पताल में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। समर्थकों में महिलाओं की संख्या अच्छी खासी थी।
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सभी एक सुर में एनकाउंटर को फर्जी बता रहे थे और बार-बार यही सवाल पूछ रहे थे कि पुलिस वालों ने सिर में गोली क्यों मार दी? यदि गोली मारनी ही थी तो हाथ या पैर में गोली मारनी चाहिए थी। समर्थकों का आरोप था कि पुलिस ने जानबूझकर पूरी तैयारी के साथ फर्जी एनकाउंटर किया है।