एसिड अटैक की शिकार युवतियां शुक्रवार को जंतर मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठ गईं। स्टाप एसिड अटैक के बैनर तले इकट्ठा हुई पीड़िताओं का कहना है कि मांग पूरी होने तक उनका क्रमिक अनशन चलता रहेगा। (सभी फोटो: अनिल कुमार/ अमर उजाला ब्यूरो)
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सबकुछ गंवाने के बाद भी इन्हें करनी पड़ी भूख हड़ताल
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युवतियों की एक सूत्रीय मांग है कि तेजाब की खुलेआम होने वाले बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तत्काल अमल हो। पहले दिन ऋतु, रूपा और सोनिया अनशन पर थीं।
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सबकुछ गंवाने के बाद भी इन्हें करनी पड़ी भूख हड़ताल
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रोहतक निवासी ऋतु के मुताबिक, 2012 में उनके चेहरे पर उनकी बुआ के बेटे ने उस वक्त तेजाब फेंका, जब वह वालीबॉल खेलने के लिए जा रही थीं। विवाद जमीन को लेकर था। राज्य स्तरीय खिलाड़ी रही ऋतु का कैरियर हादसे से पूरी तरह खत्म हो गया।
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ऋतु ने बताया कि अगर तेजाब की बिक्री पर रोक होती, तो शायद उनके साथ हादसा नहीं होता। ऋतु की मंशा है कि इस तरह के मामलों की फास्ट ट्रेक कोर्ट में सुनवाई होनी चाहिए। आरोपी को अधिकतम तीन माह में सजा मिले।
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उधर, गाजियाबाद सोनिया के ऊपर उनके पड़ोस में रहने वाले एक युवक ने तेजाब फेंका था। इससे उनकी पीठ पूरी तरह जल गई। वहीं, हादसे के बाद से उनकी पढाई छूट गई है। माता—पिता इतने गरीब है कि फिलहाल इलाज भी मुमकिन नहीं हो पा रहा।