आम आदमी पार्टी (आप) ने बुधवार को एक बार फिर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली पर हमला बोला। डीडीसीए के दैनिक कामों में दखल न देने के जेटली के इस दावे को गलत बताते हुये पार्टी ने आरोप लगया कि अध्यक्ष पद पर रहते हुये जेटली को डीडीसीए की हर गतिविधि की जानकारी दी। अपने आरोप के समर्थन में करीब चार साल पहले की जेटली की लिखी दो चिट्ठियां भी पार्टी ने मीडिया को दिखा सार्वजनिक की हैं।
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PICS: आप ने जेटली पर फेंका लेटर बम, फिर दागे 5 सवाल
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एक जांच बंद करवाने के लिये जेटली ने जिसे उस वक्त दिल्ली पुलिस को लिखी थी। बुधवार दोपहर पार्टी नेता आशुतोष, दिलीप पांडेय, सौरभ भरद्वाज व दीपक वाजपेयी ने मीडिया से बात कीं। इस मौके पर आशुतोष ने भाजपा व अरुण जेटली का शुतुरमुर्ग तक कह डाला। वहीं, डीडीसीए मामले में जेटली का इस्तीफा भी मांगा।
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आशुतोष ने बताया कि बेशक अरुण जेटली कह रहे हों कि बतौर अध्यक्ष उनका डीडीसीए के दैनिक कामों में दखल नहीं था। लेकिन अरुण जेटली ने 2011 और 2012 में दिल्ली पुलिस के अधिकारियों को दो चिट्ठी लिखी। इनमें डीडीसीए के भ्रष्टाचार के एक मामले में चल रही जांच बंद करने के लिए कहा।
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आशुतोष ने बताया कि सिंडिकेट बैंक क्रिकेट क्लब से जुड़ी शिकायतों के मामले में जेटली ने बीके गुप्ता को लिखा, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि मामले को न्यायपूर्ण ढंग से देखा जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि यह बंद हो क्योंकि डीडीसीए ने इसमें कुछ भी गलत नहीं किया है। आशुतोष के मुताबिक, मई 2012 में जेटली ने दुबारा दिल्ली के तत्कालीन विशेष पुलिस कमिश्नर रंजीत नारायण को दूसरी चिट्ठी लिखी।
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इसमें भी उन्होंने लिखा था कि मामले में मिली शिकायतें अप्रमाणित हैं और किसी अपराध का खुलासा नहीं करती। बार-बार होने वाले सवालों से डीडीसीए के कुछ लोग तंग आ गए हैं। लिहाजा इसे बंद किया जाए, क्योंकि डीडीसीए ने इसमें कुछ भी गलत नहीं किया है। हालांकि, जेटली की चिट्ठी बतौर डीडीसीए अध्यक्ष है। साथ ही लेटर हेड में राष्ट्रीय प्रतीक का निशान नहीं था। फिर भी, आशुतोष का आरोप है कि चिट्ठी लिखते वक्त जेटली राज्यसभा में नेता विपक्ष थे।
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मामला सीधे-सीधे संवैधानिक पद के दुरुपयोग का बनता है। आशुतोष ने आरोप लगाया कि जेटली ने भ्रष्टाचार के मामले में चल रही जांच को प्रभावित करने की कोशिश की है। यह अपराधिक मामला बनता है। साथ ही यह आशंका भी मजबूत होती है कि दिल्ली पुलिस पर सीधा नियंत्रण होने से वह डीडीसीए की मौजूदा जांच को भी वह प्रभावित करने की कोशिश करेंगे। लिहाजा उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना चाहिये।
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आम आदमी पार्टी के वित्त मंत्री से 5 सवाल- -क्या यह सही नहीं है कि राज्य सभा में नेता विपक्ष रहते हुये अरुण जेटली ने दिल्ली पुलिस पर दबाव बनाने के चिट्ठी लिखकर पद का दुरुपयोग किया? -अरुण जेटली क्या इस बात से इंकार कर सकते हैं कि उन्होंने पुलिस की जांच में बाधा नहीं डाली? -सिंडीकेट बैंक से जुड़ी शिकायतों के निराधार होने की बात अरुण जेटली ने किस आधार पर की? -अरुण जेटली का क्या पद पर बने रहना उचित होगा, खासकर तब, जब दिल्ली पुलिस सीधे केंद्र सरकार को रिपोर्ट करती है? -जांच को भटकाने की कोशिश में जेटली का क्या हित था। क्या जेटली ने दिल्ली पुलिस को लिखी गई चिट्ठी की जानकारी डीडीसीए की सामान्य सभा को भी दी थी?